वैश्विक ब्रोकिंग हाउस सीएलएसए को निफ्टी-50 में मौजूदा स्तर से 30 फीसदी गिरावट की संभावना दिख रही है जबकि उसका मानना है कि भारतीय बॉन्ड व इक्विटी बाजारअपने प्रतिस्पर्धी वैश्विक बाजारों से अलग नजर आ रहे हैं। सीएलएसए के विकास कुमार जैन ने ताजा रिपोर्ट में कहा है, 10 वर्षीय भारतीय बॉन्ड व अमेरिकी बॉन्ड के प्रतिफल का अंतर 13 साल के निचले स्तर 3.3 फीसदी पर आ गया है।
इसके अलावा देसी बॉन्ड व बाकी बाजारों से भारतीय इक्विटी मूल्यांकन रिकॉर्ड स्तर के करीब होने से संकेत मिलता है कि भारतीय बॉन्ड व इक्विटी बाजार एक तरह से अन्य से अलग हो गए हैं। सीएलएसए के जैन ने कहा, हालांकि यह टिका नहीं रहेगा और यह सुरक्षा के काफी कम मार्जिन का संकेतक है।
सीएलएसए के मुताबिक, अमेरिका के अलावा भारत एकमात्र बाजार है जहां देसी बॉन्ड के मुकाबले इक्विटी मूल्यांकन बढ़ा है। भारत सरकार के 10 वर्षीय बॉन्ड का प्रतिफल व निफ्टी आय प्रतिफल का अंतर 2 फीसदी है, जिसके बारे में जैन का मानना है कि इस अंतर पर सामान्यत: नकारात्मक इक्विटी रिटर्न देखने को मिलता है।
जैन ने लिखा है, ‘मतलब स्पष्ट है कि बदलाव से बड़ी तेजी को बढ़ावा मिल सकता है और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल 4 प्रतिशत पर बना रह सकता है। आय प्रतिफल के मुकाबले 1 प्रतिशत अंक का ऐतिहासिक औसत अंतर निफ्टी के आय प्रतिफल को 7.7 प्रतिशत पर पहुंचाने में मददगार होगा, जिससे 13 गुना पीई का संकेत मिलता है जो 18.3 गुना के मौजूदा 12 महीने के आगामी पीई से 30 प्रतिशत नीचे है। बॉन्ड प्रतिफल में वैल्यूएशन मीन रिवर्सन से निफ्टी में 30 प्रतिशत गिरावट आने का संकेत मिलता है।’
इस बीच, भारतीय इक्विटी बाजारों का इस साल वैश्विक बाजारों से अलग रहना बेहद महत्वपूर्ण है। जहां एसऐंडपी 500 सूचकांक कैलेंडर वर्ष 2022 में अब तक 20 प्रतिशत से ज्यादा गिरा है, वहीं निफ्टी-50 सूचकांक में उसके मुकाबले काफी कम गिरावट आई है।
जूलियस बेयर के विश्लेषकों का कहना है कि प्रदर्शन में यह असमानता मुख्य तौर पर ऐसे समय में भारतीय इक्विटी में मजबूत घरेलू प्रवाह की वजह से देखी गई, जब विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) भारी बिकवाली कर रहे थे।