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IOC से लेकर ONGC तक: तेल गिरा तो किसकी चांदी, किसका नुकसान? निवेशक कहां लगाएं पैसा

क्रूड गिरते ही OMCs की मौज, ONGC और ऑयल इंडिया पर कितना असर, जानें क्या कहती है ब्रोकरेज रिपोर्ट

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देवव्रत वाजपेयी   
Last Updated- April 09, 2026 | 12:22 PM IST

अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के लिए संघर्ष रोकने की घोषणा के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट आई है। ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 15 डॉलर प्रति बैरल गिरकर 95 डॉलर के आसपास आ गया है। इससे भारत के तेल और गैस सेक्टर पर बड़ा असर पड़ने वाला है। हालांकि अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है, खासकर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज खुलेगा या नहीं और बीमा लागत पहले जैसी होगी या नहीं, इस पर तस्वीर साफ नहीं है। इसी बीच ब्रोकरेज फर्म ICICI सिक्योरिटीज ने ऑयल एंड गैस सेक्टर के चुनिंदा स्टॉक्स को खरीदारी की सलाह दी है और टारगेट प्राइस में बदलाव किया है।

OMCs और रिलायंस को सबसे ज्यादा फायदा

ICICI सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के मुताबिक, तेल की कीमतें घटने से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों यानी IOC, BPCL, HPCL और रिलायंस इंडस्ट्रीज को फायदा होगा। सस्ता कच्चा तेल मिलने से इन कंपनियों के मार्जिन बेहतर होंगे। डीजल पर घाटा घटकर करीब 22 रुपये प्रति लीटर तक आ सकता है, जो पहले करीब 52 रुपये था। वहीं पेट्रोल पर घाटा करीब 2.5 रुपये प्रति लीटर रह सकता है। इसके अलावा LPG पर होने वाला नुकसान भी करीब 30% तक कम हो सकता है।

ONGC और ऑयल इंडिया पर मिलाजुला असर

अपस्ट्रीम कंपनियों जैसे ONGC और ऑयल इंडिया के लिए तस्वीर थोड़ी अलग है। अगर कच्चा तेल 75-80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे जाता है तो इनकी कमाई पर असर पड़ सकता है। लेकिन अगर कीमतें 90-95 डॉलर के आसपास रहती हैं, तो इन कंपनियों को अब भी अच्छा फायदा मिल सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर तेल की कीमत 15 डॉलर ज्यादा रहती है, तो ONGC और ऑयल इंडिया की कमाई में 22-25% तक की बढ़ोतरी हो सकती है।

रिफाइनिंग और पेट्रोकेम कंपनियों के लिए भी अच्छा संकेत

तेल की कीमतों में गिरावट और सप्लाई में दिक्कत के चलते रिफाइनिंग और पेट्रोकेम कंपनियों के मार्जिन बेहतर हो सकते हैं। गल्फ क्षेत्र में हमलों की वजह से करीब 9% वैश्विक पेट्रोकेम क्षमता प्रभावित हुई है, जिससे कीमतें मजबूत रह सकती हैं। इसका फायदा रिलायंस और IOC जैसी कंपनियों को अगले 12-18 महीनों तक मिल सकता है।

गैस कंपनियों के लिए चिंता बरकरार

गैस सेक्टर में स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। कतर से LNG सप्लाई सामान्य होने में समय लग सकता है, जिससे गैस की उपलब्धता सीमित रह सकती है। हालांकि स्पॉट LNG की कीमतें घटने से थोड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन पूरी तरह सुधार में अभी समय लगेगा।

भारत के लिए क्यों जरूरी है गल्फ और रूस का कच्चा तेल

रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के लिए मिडिल ईस्ट और रूस का कच्चा तेल ज्यादा अहम है। इसकी वजह यह है कि भारत की रिफाइनरियां खास तरह के कच्चे तेल के हिसाब से डिजाइन की गई हैं, जिससे ज्यादा डीजल बनता है। अगर भारत को अमेरिका या अफ्रीका से हल्का कच्चा तेल लेना पड़ता है, तो डीजल उत्पादन प्रभावित हो सकता है और देश में डीजल की कमी भी हो सकती है।

रिपोर्ट का कहना है कि अभी बाजार में सुधार की उम्मीद पहले से ज्यादा दिख रही है, लेकिन असली बदलाव तभी होगा जब सीजफायर लंबे समय तक कायम रहेगा। फिलहाल दिशा सकारात्मक है, खासकर ONGC, रिलायंस और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के लिए। हालांकि गैस सेक्टर को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

टारगेट और रेटिंग

कंपनी का नाम पुराना टारगेट प्राइस (रुपये) नया टारगेट प्राइस (रुपये) पुरानी सलाह नई सलाह
रिलायंस इंडस्ट्रीज 1,740 1,740 खरीदें खरीदें
आईओसीएल 190 190 खरीदें खरीदें
बीपीसीएल 390 390 खरीदें खरीदें
एचपीसीएल 470 470 खरीदें खरीदें
ओएनजीसी 332 374 खरीदें खरीदें
ऑयल इंडिया 515 505 जोड़ें जोड़ें
गेल 184 162 जोड़ें जोड़ें
पीएलएनजी 310 280 जोड़ें जोड़ें
जीएसपीएल 325 265 जोड़ें जोड़ें
आईजीएल 250 240 खरीदें खरीदें
जीजीएल 455 350 जोड़ें जोड़ें
एमजीएल 1,500 1,375 खरीदें खरीदें
जीओएल 1,595 1,505 खरीदें खरीदें

(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)

First Published : April 9, 2026 | 12:18 PM IST