अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के लिए संघर्ष रोकने की घोषणा के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट आई है। ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 15 डॉलर प्रति बैरल गिरकर 95 डॉलर के आसपास आ गया है। इससे भारत के तेल और गैस सेक्टर पर बड़ा असर पड़ने वाला है। हालांकि अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है, खासकर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज खुलेगा या नहीं और बीमा लागत पहले जैसी होगी या नहीं, इस पर तस्वीर साफ नहीं है। इसी बीच ब्रोकरेज फर्म ICICI सिक्योरिटीज ने ऑयल एंड गैस सेक्टर के चुनिंदा स्टॉक्स को खरीदारी की सलाह दी है और टारगेट प्राइस में बदलाव किया है।
ICICI सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के मुताबिक, तेल की कीमतें घटने से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों यानी IOC, BPCL, HPCL और रिलायंस इंडस्ट्रीज को फायदा होगा। सस्ता कच्चा तेल मिलने से इन कंपनियों के मार्जिन बेहतर होंगे। डीजल पर घाटा घटकर करीब 22 रुपये प्रति लीटर तक आ सकता है, जो पहले करीब 52 रुपये था। वहीं पेट्रोल पर घाटा करीब 2.5 रुपये प्रति लीटर रह सकता है। इसके अलावा LPG पर होने वाला नुकसान भी करीब 30% तक कम हो सकता है।
अपस्ट्रीम कंपनियों जैसे ONGC और ऑयल इंडिया के लिए तस्वीर थोड़ी अलग है। अगर कच्चा तेल 75-80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे जाता है तो इनकी कमाई पर असर पड़ सकता है। लेकिन अगर कीमतें 90-95 डॉलर के आसपास रहती हैं, तो इन कंपनियों को अब भी अच्छा फायदा मिल सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर तेल की कीमत 15 डॉलर ज्यादा रहती है, तो ONGC और ऑयल इंडिया की कमाई में 22-25% तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
तेल की कीमतों में गिरावट और सप्लाई में दिक्कत के चलते रिफाइनिंग और पेट्रोकेम कंपनियों के मार्जिन बेहतर हो सकते हैं। गल्फ क्षेत्र में हमलों की वजह से करीब 9% वैश्विक पेट्रोकेम क्षमता प्रभावित हुई है, जिससे कीमतें मजबूत रह सकती हैं। इसका फायदा रिलायंस और IOC जैसी कंपनियों को अगले 12-18 महीनों तक मिल सकता है।
गैस सेक्टर में स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। कतर से LNG सप्लाई सामान्य होने में समय लग सकता है, जिससे गैस की उपलब्धता सीमित रह सकती है। हालांकि स्पॉट LNG की कीमतें घटने से थोड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन पूरी तरह सुधार में अभी समय लगेगा।
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के लिए मिडिल ईस्ट और रूस का कच्चा तेल ज्यादा अहम है। इसकी वजह यह है कि भारत की रिफाइनरियां खास तरह के कच्चे तेल के हिसाब से डिजाइन की गई हैं, जिससे ज्यादा डीजल बनता है। अगर भारत को अमेरिका या अफ्रीका से हल्का कच्चा तेल लेना पड़ता है, तो डीजल उत्पादन प्रभावित हो सकता है और देश में डीजल की कमी भी हो सकती है।
रिपोर्ट का कहना है कि अभी बाजार में सुधार की उम्मीद पहले से ज्यादा दिख रही है, लेकिन असली बदलाव तभी होगा जब सीजफायर लंबे समय तक कायम रहेगा। फिलहाल दिशा सकारात्मक है, खासकर ONGC, रिलायंस और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के लिए। हालांकि गैस सेक्टर को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
| कंपनी का नाम | पुराना टारगेट प्राइस (रुपये) | नया टारगेट प्राइस (रुपये) | पुरानी सलाह | नई सलाह |
|---|---|---|---|---|
| रिलायंस इंडस्ट्रीज | 1,740 | 1,740 | खरीदें | खरीदें |
| आईओसीएल | 190 | 190 | खरीदें | खरीदें |
| बीपीसीएल | 390 | 390 | खरीदें | खरीदें |
| एचपीसीएल | 470 | 470 | खरीदें | खरीदें |
| ओएनजीसी | 332 | 374 | खरीदें | खरीदें |
| ऑयल इंडिया | 515 | 505 | जोड़ें | जोड़ें |
| गेल | 184 | 162 | जोड़ें | जोड़ें |
| पीएलएनजी | 310 | 280 | जोड़ें | जोड़ें |
| जीएसपीएल | 325 | 265 | जोड़ें | जोड़ें |
| आईजीएल | 250 | 240 | खरीदें | खरीदें |
| जीजीएल | 455 | 350 | जोड़ें | जोड़ें |
| एमजीएल | 1,500 | 1,375 | खरीदें | खरीदें |
| जीओएल | 1,595 | 1,505 | खरीदें | खरीदें |
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)