facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

म्युचुअल फंड परिसंप​त्तियों में घट रही
वै​श्विक निवेशकों की भागीदारी

Advertisement

दिसंबर 2018 से दिसंबर 2022 के दौरान संपूर्ण म्युचुअल फंड परिसंप​त्तियों में उनकी भागीदारी 4.2 प्रतिशत से घटकर 3.9 प्रतिशत रह गई

Last Updated- April 12, 2023 | 9:21 PM IST
Mutual Fund

पिछले पांच साल के दौरान निवेश में करीब आधा लाख करोड़ रुपये का इजाफा होने के बावजूद भारतीय म्युचुअल फंडों में प्रवासी भारतीयों (NRI) और वै​श्विक निवेशकों का योगदान घटा है।

बिजनेस स्टैंडर्ड द्वारा भारत में म्युचुअल फंडों के संगठन (Amfi) के आंकड़े के विश्लेषण से पता चलता है कि इस सेगमेंट के लिए म्युचुअल फंड निवेश दिसंबर 2018 तक जहां 0.95 लाख करोड़ रुपये था, वहीं दिसंबर 2022 तक यह बढ़कर 1.54 लाख करोड रुपये हो गया। हालांकि समान अव​धि के दौरान संपूर्ण म्युचुअल फंड परिसंप​त्तियों में उनकी भागीदारी 4.2 प्रतिशत से घटकर 3.9 प्रतिशत रह गई।

पीपीएफएएस म्युचुअल फंड में चेयरमैन एवं मुख्य कार्या​धिकारी नील पराग पारेख का मानना है कि वित्तीय तकनीक (फिनटेक) उद्यमों की वजह से घरेलू निवेशकों के लिए निवेश तक आसान पहुंच से प्रबंधन अधीन परिसंप​त्तियों (AUM) की घरेलू भागीदारी बढ़ी है, और इसका वै​श्विक निवेशकों के योगदान पर प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा, ‘कोविड-19 वर्षों के दौरान, हमने देखा कि बड़ी तादाद में नए निवेशक शामिल हुए। बाजार आकर्षक था और फिनटेक ने निवेश की राह आसान बना दी थी।’

परिसंप​त्ति प्रबंधन कंपनी के बिक्री प्रमुख के अनुसार, महामारी के दौरान अमेरिका जैसे विकसित बाजारों में ऊंचे प्रतिफल ने भी भारत में विदेशी पूंजी प्रवाह की रफ्तार कुछ हद तक सुस्त बनाए रखी।

उन्होंने कहा, ‘यही एक वजह हो सकती है कि पूंजी प्रवाह भारत के बजाय अमेरिकी बाजार तक क्यों सीमित बना रहा। इसके अलावा, रुपया भी 2022 में तेजी से गिरा है। इन कारकों से एनआरआई निवेशकों से प्रवाह प्रभावित हुआ है।’

नैस्डैक कम्पोजिट सूचकांक दिसंबर 2019 से दिसंबर 2022 के बीच 17 प्रतिशत मजबूत हुआ था। कई टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में अच्छी तेजी दर्ज की गई। एमएससीआई यूएसए इंडेक्स समान अव​धि के दौरान 18 प्रतिशत तक चढ़ा।

भारतीय रुपया दिसंबर 2019 में डॉलर के मुकाबले 71.4 पर था, वहीं दिसंबर 2022 तक यह गिरकर 82.7 पर आ गया। रुपये में कमजोरी आने से विदेशी निवेशकों के लिए प्रतिफल घटता है।

म्युचुअल फंडों में निवेशक खातों की संख्या जहां महामारी से पहले 2018 और 2019 में करीब 8-9 लाख थी, वहीं दिसंबर 2022 में यह बढ़कर 14 लाख पर पहुंच गई। कुल प्रबंधन अधीन परिसंप​त्तियां समान अव​धि के दौरान 23 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 40 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गईं।

इस अव​धि के दौरान कुछ समस्याओं की वजह से भी वै​श्विक निवेशकों की निवेश क्षमता प्रभावित हुई थी। एनआरआई निवेश फॉरेन अकाउंट टैक्स कम्पलायंस ऐक्ट (फाटका) की वजह से भी प्रभावित हुआ।

इससे अमेरिकी नागरिक या निवासी से पूंजी स्वीकार करने वाले किसी संस्थान पर अनुपालन की जिम्मेदारी बढ़ गई। उसे किसी संभावित समस्याओं की जानकारी अमेरिकी कर विभाग को देना अनिवार्य कर दिया गया है। ये नियम इंडिविजुअल और नॉन-इंडिविजुअल, दोनों के मामले में लागू हैं।

Advertisement
First Published - April 12, 2023 | 8:21 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement