सितंबर 2022 तिमाही के दौरान खुले डीमैट खातों की संख्या जून 2020 के बाद से सबसे कम रही। जुलाई-सितंबर की अवधि के दौरान 61 लाख नए डीमैट खाते खुले जिसके साथ ही इनकी कुल संख्या बढ़कर 10.26 करोड़ हो गई। तिमाही दर तिमाही 6.3 प्रतिशत की वृद्धि लॉकडाउन से प्रभावित जून 2020 की तिमाही के बाद से इस संदर्भ मे सबसे कमजोर रही। जून 2020 की तिमाही में 5.7 प्रतिशत की तिमाही वृद्धि दर्ज की गई थी।
वहीं संपूर्ण आंकड़े के संदर्भ में, वृद्धि मार्च 2021 तिमाही के बाद से सबसे कम रही, क्योंकि तब 53 लाख नए खाते खोले गए थे। प्रतिशत के साथ-साथ कुल संख्या के संदर्भ में सर्वाधिक वृद्धि दिसंबर 2021 की तिमाही के दौरान दर्ज की गई थी। दिसंबर 2021 की तिमाही के दौरान निफ्टी और सेंसेक्स, दोनों ने अपने नए ऊंचे स्तरों को छुआ था। उद्योग के जानकारों का कहना है कि उतार-चढ़ाव बढ़ने, निवेशक आधार में तेजी और इस साल कमजोर प्रतिफल की वजह से वृद्धि की रफ्तार असमान रही है।
मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए वैश्विक केंद्रीय बैंकों द्वारा मौद्रिक सख्ती पर जोर दिए जाने से इक्विटी बाजारों में पिछले एक साल के दौरान बड़ा उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है। निफ्टी मौजूदा समय में 18 अक्टूबर, 2021 को बनाए गए 18,477 के ऊंचे स्तर से करीब 6 प्रतिशत नीचे है।
पिछले महीने डीमैट खातों की संख्या पहली बार 10 करोड़ पर पहुंच गईं। बाजार पर्यवेक्षकों का कहना है कि ब्रोकरों को ग्राहक जोड़ने की ऊंची लागत और छोटे निवेशकों में दिलचस्पी घटने की वजह से नए खातों की संख्या में लगातार इजाफा करने में सफलता नहीं मिल पा रही है। प्राथमिक बाजारों में सुस्ती से भी डीमैट खातों की रफ्तार प्रभावित हुई है। सितंबर तिमाही के दौरान सिर्फ चार आईपीओ बाजार में आए और इनके जरिये सिर्फ 2,965 करोड़ रुपये जुटाए गए।
मिरई ऐसेट कैपिटल मार्केट्स के निदेशक एवं मुख्य व्यावसायिक अधिकारी अरुण चौधरी ने कहा कि अनिश्चित वैश्विक परिवेश का नए खाते खुलने की रफ्तार और रिटेल प्रवाह पर नकारात्मक असर पड़ा है, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि ब्रोकिंग उद्योग वृद्धि की मजबूत रफ्तार बनाए रखेगा।
उन्होंने कहा, ‘मेरी नजर में, यह अस्थायी दौर है, क्योंकि हमें सुधार के संकेत दिखने लगे हैं। रिटेल भागीदारी बढ़ेगी और हम अगले तीन साल के दौरान डीमैट खातों की संख्या में सालाना आधार पर 20-25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करने में सक्षम होंगे।’