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10 करोड़ के पार पहुंचे डीमैट खाते

Last Updated- December 11, 2022 | 3:56 PM IST

 देश में डीमैट खातों की संख्या अगस्त में पहली बार 10 करोड़ के पार निकल गई। डिपॉजिटरी फर्मों – नैशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) और सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (सीडीएसएल) द्वारा जारी आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले महीने 22 लाख से अधिक नए खाते खुले, जिससे कुल खातों की संख्या बढ़कर 10.05 करोड़ हो गई। पिछले चार महीनों में सबसे अधिक खाते अगस्त में ही खुले हैं। मार्च 2020 में कोविड-19 महामारी फैलने से ठीक पहले भारत में डीमैट खातों की संख्या 4.09 करोड़ ही थी। 
बाजार में तेजी से बढ़ोतरी, लॉकडाउन के कारण खाली वक्त मिलने और वर्क फ्रॉम होम का मौका मिलने, खाता खोलने में आसानी, मोबाइल और डेटा के प्रसार तथा ब्रोकरेज शुल्क में गिरावट आने से डीमैट खातों की रफ्तार बढ़ी है। सीडीएसएल के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्य अधिकारी निहाल वोरा ने कहा, ‘डीमैट खातों की संख्या 10 करोड़ होना इस बात का सबूत है कि घरेलू बचत में वृद्धि के कारण निवेश के ठिकाने के रूप में डीमैट खातों और शेयर बाजार की स्वीकार्यता बढ़ रही है।’ 
एनएसडीएल के कार्यकारी उपाध्यक्ष प्रशांत वागल ने कहा, ‘पिछले दो साल में हमने डीमैट खातों की संख्या में बड़ी वृद्धि देखी है। इस बात पर भी गौर करना चाहिए कि एनएसडीएल की कस्टडी वैल्यू अगस्त में 320 लाख करोड़ रुपये (4 लाख करोड़ डॉलर) पर पहुंच गई, जो अप्रैल 2020 में 174 लाख करोड़ रुपये ही थी।
इससे पता चलता है कि खुदरा और संस्थागत दोनों ही निवेशक इसमें भागीदारी कर रहे हैं।’सूचीबद्ध फर्म सीडीएसएल के पास ज्यादा डीमैट खाते खुले हैं मगर एनएसडीएल के पास अधिक असेट अंडर कस्टडी (एयूसी) है। अगस्त के आखिर में सीडीएसएल के पास 7.16 करोड़ डीमैट खाते थे, जिनका एयूसी करीब 38.5 लाख करोड़ रुपये था। एनएसडीएल के पास 2.89 करोड़ खाते और 320 लाख करोड़ रुपये एयूसी थी। मगर ध्यान रहे कि 10 करोड़ डीमैट खातों का मतलब यह नहीं है कि देश में डीमैट खाते खोलने वालों की संख्या 10 करोड़ के पार पहुंच गई है।

First Published - September 5, 2022 | 9:53 PM IST

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