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लाभांश देने वाली कंपनियां हो रहीं लोकप्रिय

Last Updated- December 11, 2022 | 5:28 PM IST

वेदांत की सहायक इकाई हिंदुस्तान जिंक (एचजेडएल) ने पिछले सप्ताह 21 रुपये प्रति शेयर के लाभांश की घोषणा की, जिसकी वजह से उसे करीब 8,863 करोड़ रुपये का भुगतान करना पड़ रहा है। इस घोषणा से भारतीय उद्योग जगत की लाभांश भुगतान नीति सुर्खियों में आ गई है।
बिजनेस स्टैंडर्ड रिसर्च ब्यूरो द्वारा बीएसई-500 कंपनियों के विश्लेषण से पता चलता है कि वित्त वर्ष2022 में शीर्ष-20 लाभांश भुगतान वाली कंपनियों में वेदांत, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, एचजेडएल, ओएनजीसी, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (इंडियनऑयल), हिंदुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल), रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) और बजाज ऑटो मुख्य रूप से शामिल हैं।
क्षेत्रीय स्तर पर, धातु एवं खनन से लेकर तेल और गैस, बैंकिंग एवं वित्त, इस्पात, कोयला, विद्युत आईटी, उपभोक्ता वस्तु, और वाहन क्षेत्र की कंपनियों का वित्त वर्ष 2022 में लाभांश चुकाने वाली कंपनियों की शीर्ष-20 सूची में जिक्र किया गया है।
कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 2022 में शीर्ष-20 कंपनियों का लाभांश खर्च 1.66 लाख करोड़ रुपये पर दर्ज किया गया था, जिससे 2020-21 के मुकाबले उनके लाभांश भुगतान अनुपात में 37.18 प्रतिशत की वृद्धि का पता चलता है। 2020-21 में लाभांश भुगतान अनुपात 35.55 प्रतिशत था, लेकिन यह 2019-20 (42.19 प्रतिशत) के मुकाबले कम था।
विश्लेषकों का मानना है कि वित्त वर्ष 2023 में भी वित्त वर्ष 2022 जैसा रुझान देखा जा सकता है, क्योंकि कुछ कंपनियां अच्छे निवेश योग्य अवसरों के अभाव से जूझ रही हैं और उन्हें लाभांश के तौर अपने लाभ को कई जगह पुन: वितरण के लिए बाध्य होना पड़ सकता है। अभी अभी अन्य कंपनियां अपने शेयरधारकों को लगातार लाभान्वित करने पर जोर दे सकती हैं, जैसे कि सरकार, जो इन कंपनियों में बड़ी शेयरधारक हो सकती है। अन्य कंपनियां बैलेंस शीट को मजबूत बनाने के लिए अपनी पैतृक कंपनियों की मदद की संभावना तलाश सकती हैं।
उदाहरण के लिए, अरबपति अनिल अग्रवाल के नेतृत्व में वेदांत रिसोर्सेज के स्वामित्व वाली वेदांत भी इसमें शामिल है। रेटिंग एजेंसी मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस (मूडीज) के अनुसार होल्डिंग कंपनी ने अगले तीन साल में कर्ज घटाकर 4 अरब डॉलर का लक्ष्य रखा है।
मूडीज का कहना है कि अप्रैल में, वेदांत ने 31.5 रुपये प्रति शेयर के लाभांश की घोषणा की थी, जिसकी वजह से उसे 11,710 करोड रुपये का भुगतान करना पड़ा था। इसमें से, 8,162 करोड़ रुपये उसकी होल्डिंग कंपनी वेदांत रिसोर्सेज (फर्म पर 69.7 प्रतिशत स्वामित्व) को हासिल हुए थे।
मूडीज का कहना है, ‘बड़ा नकदी लाभांश वेदांत रिसोर्सेज के लिए ऋण-अनुकूल है।’
कंपनी ने शुक्रवार को एक्सचेंज को दी गई जानकारी में कहा था कि वेदांत के निदेशक मंडल की बैठक 19 जुलाई को हो रही है, जिसमें दूसरे अंतरिम लाभांश पर विचार होगा।  
दूसरी तरफ, आईटी और एफएमसीजी क्षेत्र में कंपनियां पूंजी-केंद्रित नहीं हैं।
इक्विनोमिक्स रिसर्च ऐंड एडवायजरी के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक चोकालिंगम जी का कहना है, ‘इसके बजाय वे लाभांश और पुनर्खरीद के जरिये भी शेयरधारकों को लाभान्वित करने पर जोर दे रही हैं।’
उदाहरण के लिए, ओएनजीसी ने पांच साल के दौरान करीब 33 प्रतिशत का औसत लाभांश भुगतान अनुपात दर्ज किया है, जबकि इंडियनऑयल के लिए लाभांश भुगतान के संदर्भ में यह आंकड़ा 49 प्रतिशत रहा है। आंकड़े से पता चलता है कि कोल इंडिया ने करीब 62 प्रतिशत का पांच वर्षीय औसत लाभांश भुगतान अनुपात दर्ज किया है।
एनटीपीसी और एनएमडीसी का लाभांश भुगतान अनुपात समीक्षाधीन अवधि के दौरान 41 प्रतिशत और 46 प्रतिशत रहा।

First Published - July 19, 2022 | 1:23 AM IST

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