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रुपये में गिरावट: विदेश में पढाई और यात्रा को लेकर क्या हो रणनीति

Last Updated- December 11, 2022 | 5:27 PM IST

अगर आप विदेश यात्रा या अपने बच्चों को देश से बाहर के कॉलेजों में पढाने की सोच रहे हैं तो आपको इसके लिए अब ज्यादा खर्च करने होंगे क्योंकि इस वर्ष अभी तक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में तकरीबन 7 प्रतिशत की गिरावट आई है।

खर्च में बढोतरी 

महामारी  की वजह से  रुकी हुई मांग के फिर से निकलने, हवाई किराए में वृद्धि और ऑन-ग्राउंड शुल्क में बढोतरी की वजह से विदेशी दौरा वर्ष 2019 या महामारी से ठीक पहले की तुलना में 50 प्रतिशत तक महंगा हुआ है।
 
छह महीने पहले की कीमतों की तुलना में टूर/घूमने  का खर्च और हवाई यात्रा का किराया काफी बढा है,  जिसकी वजह मजबूत मांग और कच्चे तेल की कीमत में आई भारी तेजी है। कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल का परिणाम है एयर टर्बाइन ईंधन (एटीएफ)  की कीमत में बढोतरी । उदाहरण के लिए मुंबई में एटीएफ की कीमतों की बात करते हैं। जुलाई में ये 140 रुपये प्रति लीटर हो गई हैं। जबकि 2022 की शुरुआत में ये 75 रुपये और पिछले अप्रैल में केवल 56 रुपये थी। आमतौर पर एटीएफ की लागत किसी एयरलाइन के कुल खर्च का 40.50 प्रतिशत  ही होता है। अंतरराष्ट्रीय टूर पैकेज की कीमत में विमान किराया, होटल, परिवहन, दर्शनीय स्थलों की यात्रा, भोजन, वीजा और बीमा आदि शामिल होते हैं।
 
डेनियल डिसूजा का कहना है कि मजबूत पेंट-अप मांग, आपूर्ति में रुकावट और एटीएफ की लागत में वृद्धि के कारण हवाई किराए में वृद्धि आई है।  डेनियल डिसूजा एसओटीसी ट्रेवल के प्रेसिडेंट और कंट्री हेड हैं।
 
डिसूजा के मुताबिक एयरलाइंस की क्षमता और मार्गों में विस्तार के साथ ही किरायों में स्थिरता आएगी।
 
इट्स माई ट्रिप के प्रवक्ता ने कहा, "तेल की कीमतों और मांग में वृद्धि के कारण 2019 से हवाई किराए में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। होटल की दरों में भी 10-15 फीसदी का इज़ाफ़ा हुआ हैं। हमने बुकिंग पर कोई खास असर नहीं देखा है। कोविड के बावजूद लोगों में यात्रा को लेकर सकारात्मकता बनी हुई है।"
 
राजीव काले कहते हैं, “कीमतों में वृद्धि के बावजूद, हमारे ग्राहक अपने पसंदीदा अंतरराष्ट्रीय जगहों के लिए बुकिंग कर रहे हैं। इसके और बढ़ने की भी उम्मीद है। हमसे मूल्य, किफायती, लग्जरी और प्रीमियम जगहों के बारे पूछताछ की जा रही है। " राजीव काले थॉमस कुक इंडिया के अध्यक्ष और कंट्री हेड हैं।

महंगी उच्च शिक्षा को लेकर बढी चिंता 

रुपये में अवमूल्यन से विदेशों में पढ़ाई की लागत भी बढ़ जाएगी। यहां तक कि उन मामलों में भी जहां कॉलेजों ने अपनी फीस में कोई वृद्धि नहीं की है। शिक्षा सलाहकारों का कहना है कि पहले वे माता-पिता को लागत में 2.3 फीसदी वार्षिक वृद्धि के लिए तैयार रहने की सलाह देते थे। लेकिन अब रुपये में हालिया गिरावट के बाद, वे उन्हें 5.7 फीसदी वार्षिक वृद्धि के लिए तैयार रहने की सलाह दे रहे हैं।
 
कुछ माता-पिता ने तो अपने बच्चों को विदेश भेजने के इरादे को ही बदल दिया है। बेंगलुरु स्थित स्पार्क करियर मेंटर्स के सह-संस्थापक और निदेशक नीरज खन्ना ने इस बात की पुष्टि की। नीरज ने कहा, "जिन परिवारों के साथ हम बच्चों को विदेश भेजने की योजना बना रहे थे, उनमें से लगभग 5 प्रतिशत ने अपने बच्चे को भारत के ही कॉलेज में भेजने का फैसला किया है।"
 
खन्ना ने कहा " शेष 95 प्रतिशत में से जो आर्थिक रूप से मजबूत हैं, वे चिंतित नहीं हैं। लेकिन बाकियों के बीच, चिंता बनी हुई है। ये आमतौर पर वेतनभोगी पेशेवर हैं। जिन्होंने पहले ही अपने सभी संसाधनों से पैसा जुटा लिया है, कर्ज ले लिया है।  लेकिन उसके बाद भी पैसों की कमी पड़ रही है।"
 
छात्र और अभिभावक समाधान निकाल रहे हैं। कई, जो पढ़ाई के दौरान काम करने के लिए तैयार नहीं थे, अब सप्ताहांत और छुट्टियों के दौरान ऑनलाइन काम करने की योजना बना रहे हैं। पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहे छात्र टीचिंग असिस्टेंटशिप की तलाश में हैं। कुछ की योजना छुट्टियों के दौरान भारत नहीं लौटने और इसके बजाय काम करने की है।
 
अवंतिका सिंह खर्च  में कटौती के कुछ उपायों की योजना बना रही है। अवंतिका पटना की एक छात्रा हैं जो जल्द ही विदेश जाने वाली हैं। उनका कहना है, "मैं  कैंपस के बाहर एक आवास में रहने की योजना बना रही हूं। जिसे मैं औरों के साथ साझा कर सकूँ। जो आमतौर पर सस्ता होता है। और खाना भी मैं खुद ही बनाउंगी।
 
कॉलेज और देश के बारे में निर्णय लेते समय, कई चीज़ों का ध्यान रखना ज़रूरी है। सिर्फ पढ़ाई का खर्चा और आवास की लागत ही कुल खर्च नहीं है। अमित यादव ने कहा, “एक शिक्षा ऋण का चयन करने से पहले, एक छात्र को हर तरह के खर्चे से अवगत होना ज़रूरी है। फिर कुल खर्च का अनुमान लगाने के बाद उचित ऋण राशि के लिए आवेदन करें। " अमित यादव अवांसे फाइनेंशियल सर्विसेज में मुख्य रणनीति अधिकारी और मुख्य व्यवसाय अधिकारी-डिजिटल व्यवसाय के पद पर हैं।
 
यादव ने ये भी कहा, "रुपये का अवमूल्यन कुछ छात्रों के पक्ष में भी काम करेगा।  ये वो हैं जो वर्तमान में अमेरिका में पढ़ रहे हैं और डॉलर में भुगतान करने वाली नौकरी हासिल करने की योजना बना रहे हैं। उन्हें अपने शिक्षा ऋण को चुकाने में आसानी होगी।”
 
अगर आपका बच्चा पहले से विदेश में है तो पैसे एडवांस में भेज दें। यदि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया और कमजोर हुआ तो इंतजार की कीमत आपको महंगी पड सकती है।  वहीं, यात्रा करने की योजना बना रहे लोगों को टिकट, होटल और अन्य सेवाओं की प्री-बुकिंग अभी से कर लेनी चाहिए। ऐसा करना उनके लिए मददगार साबित होगा।
 
यदि आपके लक्ष्य लंबी अवधि के हैं, तो ऐसी संपत्तियों में निवेश करें जो  रुपये में अवमूल्यन के खिलाफ बचाव प्रदान कर सकें। विशाल धवन, मुख्य वित्तीय योजनाकार, प्लान अहेड वेल्थ एडवाइजर्स ने कहा, “अपने इक्विटी पोर्टफोलियो का 15-20 फीसदी अंतरराष्ट्रीय म्यूचुअल फंड में रखें। इसके अलावा सोने में कुल पोर्टफोलियो का 5-10 फीसदी रख सकते हैं। ”
 
ये परिसंपत्तियां रुपये के अवमूल्यन के खिलाफ बचाव प्रदान कर सकती हैं।

First Published - July 19, 2022 | 6:14 PM IST

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