आईआईएफएल सिक्योरिटीज के चेयरमैन आर वेंकटरामन ने पुनीत वाधवा के साथ बातचीत में कहा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा पिछले सप्ताह मुद्रास्फीति से निपटने के लिए अपना रुख स्पष्ट किए जाने से बाजार इस उम्मीद से अलग नजर आ रहा है कि वैश्विक मंदी को ध्यान में रखते हुए आगामी दर वृद्धि तेज किए जाने की जरूरत नहीं होगी। पेश हैं उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश:
क्या आप मानते हैं कि केंद्रीय बैंक की बैठकों के परिणाम के संदर्भ में बाजार की चाल बाद में कुछ हद तक अनिश्चित हो गई है?
ऐसा लग रहा है कि बाजार इस उम्मीद से अलग दिख रहे हैं कि वैश्विक मंदी को देखते हुए भविष्य में दर वृद्धि की रफ्तार तेज करने की जरूरत नहीं होगी। लेकिन मुद्रास्फीति का आंकड़ा अनुकूल नहीं है, जिससे बड़ी बिकवाली की आशंका बढ़ी है। मुद्रास्फीति दर ऊंची बनी रहेगी। भले ही इसमें धीरे धीरे कमी आए, या यह काफी समय तक तय स्तरों से ऊपर बनी रहे, लेकिन दर वृद्धि की रफ्तार तेज रहेगी, और बाजारों में बिकवाली की धारणा के साथ उतार-चढ़ाव बरकरार रह सकती है।
निर्माण संबंधित ताजा पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स का आंकड़ा निराशाजनक रहा है। मुद्रास्फीति भी कम नहीं हुई है। ऐसे में, बाजार और निवेशक इन आंकड़ों को नजरअंदाज क्यों कर रहे हैं?
जहां पीएमआई आंकड़े वैश्विक तौर पर कमजोर रहे हैं, वहीं भारत में निर्माण और सेवा पीएमआई दोनों ही 57-58 के दायरे में हैं। इसलिए हम अच्छी स्थिति में हैं। बैंकों से मिली ताजा प्रतिक्रिया में कहा गया है कि कॉरपोरेट पूंजीगत खर्च बढ़ने की संभावना है। अर्थव्यवस्था में, क्षमता इस्तेमाल पर आरबीआई का आंकड़ा 75 पर पहुंचना उत्साहजनक है। इसलिए, कमजोर पीएमआई भारत के लिए, दूसरों के लिए समस्या है।
बाजार अनिश्चितता पर छोटे निवेशकों ने कैसी प्रतिक्रिया दिखाई है?
हाल के वर्षों में छोटे निवेशक बाजार उतार-चढ़ाव को लेकर अधिक सजग हुए हैं। भले ही बाजार ऊंचे स्तरों पर डटे रहने में सफल नहीं हो पा रहा है, लेकिन छोटे निवेशक म्युचुअल फंड योजनाओं, एसआईपी आदि के जरिये लगातार बाजारों में पैसा लगा रहे हैं। वैश्विक बाजारों की चुनौतियों का हमारे बाजारों पर भी प्रभाव पड़ेगा।