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बाजार में रह सकता है उतार-चढ़ाव

Last Updated- December 11, 2022 | 3:00 PM IST

आईआईएफएल सिक्योरिटीज के चेयरमैन आर वेंकटरामन ने पुनीत वाधवा के साथ बातचीत में कहा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा पिछले सप्ताह मुद्रास्फीति से निपटने के लिए अपना रुख स्पष्ट किए जाने से बाजार इस उम्मीद से अलग नजर आ रहा है कि वै​श्विक मंदी को ध्यान में रखते हुए आगामी दर वृद्धि तेज किए जाने की जरूरत नहीं होगी। पेश हैं उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश: 

क्या आप मानते हैं कि केंद्रीय बैंक की बैठकों के परिणाम के संदर्भ में बाजार की चाल बाद में कुछ हद तक अनि​श्चित हो गई है? 
ऐसा लग रहा है कि बाजार इस उम्मीद से अलग दिख रहे हैं कि वै​श्विक मंदी को देखते हुए भविष्य में दर वृद्धि की रफ्तार तेज करने की जरूरत नहीं होगी। लेकिन मुद्रास्फीति का आंकड़ा अनुकूल नहीं है, जिससे बड़ी बिकवाली की आशंका बढ़ी है। मुद्रास्फीति दर ऊंची बनी रहेगी। भले ही इसमें धीरे धीरे कमी आए, या यह काफी समय तक तय स्तरों से ऊपर बनी रहे, लेकिन दर वृद्धि की रफ्तार तेज रहेगी, और बाजारों में बिकवाली की धारणा के साथ उतार-चढ़ाव बरकरार रह सकती है।

निर्माण संबं​धित ताजा पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स  का आंकड़ा निराशाजनक रहा है। मुद्रास्फीति भी कम नहीं हुई है। ऐसे में, बाजार और निवेशक इन आंकड़ों को नजरअंदाज क्यों कर रहे हैं? 
जहां पीएमआई आंकड़े वै​श्विक तौर पर कमजोर रहे हैं, वहीं भारत में निर्माण और सेवा पीएमआई दोनों ही 57-58 के दायरे में हैं। इसलिए हम अच्छी ​स्थि​ति में हैं। बैंकों से मिली ताजा प्रतिक्रिया में कहा गया है कि कॉरपोरेट पूंजीगत खर्च बढ़ने की संभावना है। अर्थव्यवस्था में, क्षमता इस्तेमाल पर आरबीआई का आंकड़ा 75 पर पहुंचना उत्साहजनक है। इसलिए, कमजोर पीएमआई भारत के लिए, दूसरों के लिए समस्या है।

बाजार अनि​श्चितता पर छोटे निवेशकों ने कैसी प्रतिक्रिया दिखाई है?
हाल के वर्षों में छोटे निवेशक बाजार उतार-चढ़ाव को लेकर अ​धिक सजग हुए हैं। भले ही बाजार ऊंचे स्तरों पर डटे रहने में सफल नहीं हो पा रहा है, लेकिन छोटे निवेशक म्युचुअल फंड योजनाओं, एसआईपी आदि के जरिये लगातार बाजारों में पैसा लगा रहे हैं। वै​​श्विक बाजारों की चुनौतियों का हमारे बाजारों पर भी प्रभाव पड़ेगा।

First Published - September 25, 2022 | 10:52 PM IST

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