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एफपीआई निवेश की कीमत व कुल निवेश का अनुपात 3 गुना

Last Updated- December 11, 2022 | 4:17 PM IST

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) के निवेश की बाजार कीमत और भारतीय बाजारों में उनके संचयी निवेश का अनुपात तीन गुना है, जो वित्त वर्ष 2022 के 3.4 गुने से कम है लेकिन वित्त वर्ष 2013 के 1.8 गुना के मुकाबले काफी ऊपर है।
मोतीलाल ओसवाल के विश्लेषण के मुताबिक, पिछले तीन दशक में एफपीआई ने देसी सूचीबद्ध‍ कंपनियों में 191 अरब डॉलर का संचयी निवेश किया है। दूसरी ओर, उनके निवेश की कीमत अभी 578 अरब डॉलर है। वित्त वर्ष 2022 में उनके निवेश की कीमत 677 अरब डॉलर पर पहुंच गई थी।

वित्त वर्ष 2012 और वित्त वर्ष 2022 के बीच एफपीआई निवेश की बाजार कीमत स्थानीय मुद्रा के लिहाज से सालाना 16.5 फीसदी की रफ्तार से बढ़ी है और अमेरिकी डॉलर के लिहाज से 11.5 फीसदी की रफ्तार से।
 

एफपीआई की तरफ से किए गए 191 अरब डॉलर के निवेश का करीब 60 फीसदी वित्त वर्ष 2010 से वित्त वर्ष 2015 के बीच आया। वित्त वर्ष 2016 और वित्त वर्ष 2020 के बीच विदेशी निवेश घटकर महज 11 अरब डॉलर रह गया। वित्त वर्ष 2021 में रिकॉर्ड 37.3 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आया, जिसकी वजह महामारी के बाद वैश्विक केंद्रीय बैंकों (मुख्य रूप से अमेरिकी फेडरल रिजर्व) की तरफ से उठाए गए प्रोत्साहन वाले कदम हैं। हालांकि इस निवेश का बड़ा हिस्सा भारत से निकल गया। वित्त वर्ष 2022 और वित्त वर्ष 23 (अब तक) के बीच एफपीआई ने 26 अरब डॉलर की निकासी की है। 
 

वित्त वर्ष 2015 के बाद एफपीआई निवेश हालांकि नरम पड़ा, लेकिन देसी संस्थागत निवेशकों के निवेश की रफ्तार बढ़ी, खास तौर से इक्विटी म्युचुअल फंडों की तरफ से। मोतीलाल ओसवाल के नोट में कहा गया है, वित्त वर्ष 2000 से लेकर पिछले 23 वर्षों में देसी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजारों में 90.6 अरब डॉलर का निवेश किया है और इस निवेश का बड़ा हिस्सा यानी 86.7 अरब डॉलर पिछले आठ वर्षों (वित्त वर्ष 16-वित्त वर्ष 23) के आया है।
 

मजबूत देसी निवेश के कारण भारतीय इक्विटी में देसी संस्थागत निवेशकों का स्वामित्व जून 2022 में बढ़कर 14.2 फीसदी पर पहुंच गया, जो जून 2012 में 10.9 फीसदी था। दूसरी ओर, एफपीआई का स्वामित्व जून 2022 में 18.4 फीसदी रह गया, जो मार्च 2015 में 22.5 फीसदी रहा था।
 

फ्री-फ्लोट मार्केट कैप के प्रतिशत के लिहाज से एफपीआई का स्वामित्व जून 2022 में घटकर 38 फीसदी रह गया, जो जून 2012 में 46.2 फीसदी रहा था। वहीं देसी संस्थागत निवेशकों का स्वामित्व इस अवधि में बढ़कर 29.5 फीसदी पर पहुंच गया, जो पहले 24.2 फीसदी रहा था।
 

एफपीआई के निवेश का 70 फीसदी निफ्टी-50 शेयरों में और 98 फीसदी निफ्टी-500 के शेयरों में है। इसकी तुलना में देसी संस्थागत निवेशकों के निवेश का 64 फीसदी निफ्टी-50 इंडेक्स और 97 फीसदी 500 अग्रणी कंपनियों में है।

First Published - August 25, 2022 | 9:46 PM IST

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