पिछले एक साल में निफ्टी ट्रांसपोर्टेशन ऐेंड लॉजिस्टिक्स इंडेक्स 14 फीसदी चढ़ा है जबकि बेंचमार्क निफ्टी-50 मोटे तौर पर स्थिर रहा है। कुछ फंड हाउस ट्रांसपोर्टेशन ऐंड लॉजिस्टिक्स सेक्टर में आई इस तेजी को कई साल की रिकवरी की शुरुआत के दौर पर देख रहे हैं। इसे देखते हुए म्चुचुअल फंड हाउस ने ट्रांसपोर्टेशन थीम पर दो नए फंड ऑफर (एनएफओ) का खाका तैयार किया है और ऐसी कुछ और योजनाओं से जुड़े सूचना दस्तावेज अगले कुछ महीनों में जमा कराए जा सकते हैं।
ट्रांसपोर्टेशन ऐंड लॉजिस्टिक्स फंड से जुड़े आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल व आईडीएफसी एमएफ के एनएफओ इस महीने आवेदन के लिए खुले हैं। इस बीच, यूटीआई एमएफ की पहले से ही ऐसी योजना बाजार में है, जिसने तीन साल में 20 फीसदी सालाना चक्रवृद्धि और एक साल में 19 फीसदी के हिसाब से रिटर्न दिया है। वैल्यू रिसर्च के आंकड़ों से यह जानकारी मिली।
निफ्टी ट्रांसपोर्टेशन ऐंड लॉजिस्टिक्स इंडेक्स में ऑटोमोबाइल, एयरलाइंस, शिपिंग और लॉजिस्टिक्स सॉल्यूशंस जैसे उद्योग के शेयर होते हैं। अभी सबसे ज्यादा भारांक वाले शेयर हैं महिंद्रा ऐंड महिंद्रा, मारुति सुजूकी, टाटा मोटर्स, अदाणी पोर्ट्स ऐंड एसईजेड और आयशर मोटर्स। ऑटोमोबाइल व वाहन कलपुर्जा शेयरों की हिस्सेदारी इंडेक्स में 74 फीसदी है।
पेश होने वाली दो नई योजनाएं हालांकि सक्रियता से प्रबंधित फंड हैं और उनका आवंटन निफ्टी इंडेक्स से अलग होगा। विश्लेषकों को उम्मीद है कि ऑटोमोबाइल क्षेत्र बिक्री व मार्जिन दोनों मोर्चे पर बढ़त दर्ज करेगा।
इलारा कैपिटल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) जय काले ने कहा, ट्रैक्टर को छोड़कर ऑटोमोबाइल क्षेत्र के अन्य हिस्से अभी भी वित्त वर्ष 2019 के सर्वोच्च स्तर से नीचे हैं। कोविड के बाद शहरी व उच्च आय वर्ग के बीच बिक्री सुधरी है, लेकिन जब ग्रामीण अर्थव्यवस्था पटरी पर आ जाएगी तब वाहनों की बिक्री बढ़त के नए पायदान की ओर जाएगी। प्रति व्यक्ति आय और जीडीपी में वृद्धि के चलते बिक्री दो अंकों में बढ़ने की संभावना है।
विश्लेषकों को लगता है कि वित्त वर्ष 23 में दोपहिया की बिक्री 15 फीसदी, यात्री वाहनों की बिक्री 20 फीसदी और वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री 30 फीसदी बढ़ेगी।
इसके अतिरिक्त, उच्च बिक्री से कंपनियों का मुनाफा भी बेहतर होने की उम्मीद है। मोतीलाल ओसवाल इन्वेस्टमेंट सर्विसेज के मुताबिक, बढ़ती इनपुट लागत के बावजूद मार्जिन में सुधार होगा। ब्रोकरेज की रिपोर्ट में कहा गया है, लगातार दूसरी तिमाही (वित्त वर्ष 23, दूसरी तिमाही) में हम मार्जिन में सुधार की उम्मीद कर रहे हैं, जिसे कीमत बढ़ोतरी, ऑपरेटिंग लिवरेज आदि से सहारा मिलेगा, हालांकि इनपुट लागत बढ़ने का भी कुछ असर दिखेगा।
लॉजिस्टिक्स उद्योग को मजबूती
पिछले महीने भारत सरकार ने डेटा व तकनीक के सही इस्तेमाल के जरिये देश में वस्तुओं की अबाध आवाजाही की खातिर राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति पेश की।
जेफरीज के मुताबिक, संगठित लॉजिस्टिक्स कंपनियों को नियामकीय कदमों से फायदा मिलने के आसार हैं। जेफरीज के अनुमान के मुताबिक, कुल लॉजिस्टिक्स लागत में उनकी हिस्सेदारी वित्त वर्ष 22 के 30 अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 26 में दोगुना से ज्यादा होकर 65 अरब डॉलर हो जाएगी।
काले का मानना है कि राजस्व में बढ़ोतरी के अलावा लॉजिस्टिक्स कंपनियों का मार्जिन भी ठीक रहेगा। उन्होंने कहा, ईंधन की कीमतें घटी हैं लेकिन मालभाड़े की दरें सुदृढ़ हैं। हालांकि लॉजिस्टिक्स लागत घटाने पर केंद्र सरकार के ध्यान दिए जाने से दक्षता में सुधार होगा।
क्या निवेशकों को एनएफओ खरीदना चाहिए?
आंकड़ों और विश्लेषकों की राय पर नजर डालें तो ट्रांसपोर्टेशन व लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में वृद्धि की संभावना नजर आती है लेकिन खुदरा निवेशकों को किसी क्षेत्र विशेष या थिमेटिक फंड में निवेश पर सतर्कता बरतनी चाहिए। ज्यादातर क्षेत्रों की प्रकृति साइक्लिकल है और कई सालों तक ये सुस्त बने रह सकते हैं। ये योजनाएं उनके लिए हैं जिनके पास इस क्षेत्र की जानकारी है और सही समय पर निवेश निकासी की क्षमता है। निवेश विशेषज्ञों का कहना है कि उच्च जोखिम को देखते हुए सेक्टोरल फंड उन निवेशकों के लिए बेहतर हैं जिनके पास अनुभवी सलाहकार हैं या ज्यादा जोखिम लेने (मसलन एचएनआई) की इच्छा है।