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IPO में आवेदनों की संख्या बढ़ाने का खेल, पकड़े गए आवेदन बढ़ा-चढ़ाकर बताने वाले 3 आईपीओ

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सेबी की चेयरपर्सन माधवी पुरी बुच ने कहा, बाजार नियामक नीतिगत समीक्षा और मर्चेंट बैंकरों के खिलाफ कार्रवाई करेगा

Last Updated- January 19, 2024 | 11:29 PM IST
Vikram Solar IPO

बाजार नियामक सेबी ने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम में बढ़ा-चढ़ाकर आवेदन के आंकड़े सामने रखने के तीन मामले पकड़े हैं, जिनमें कंपनियां विभिन्न तरह के हथकंडों का इस्तेमाल करती पाई गईं। सेबी की चेयरपर्सन माधवी पुरी बुच ने कहा कि नियामक नीतिगत समीक्षा के अलावा ऐसे मामलों में मर्चेंट बैंकरों के खिलाफ कार्रवाई पर विचार कर रहा है। नियामक के पास बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए ऐसे आवेदनों के आंकड़े और सबूत हैं और कुछ निश्चित मर्चेंट बैंकरों के मामले में यह तरीका एक जैसा पाया गया है।

बुच ने एसोसिएशन ऑफ मर्चेंट बैंकर्स ऑफ इंडिया (एआईबीआई) की तरफ से कैपिटल फॉर्मेशन पर आयोजित सम्मेलन में कहा कि आईपीओ के ऐसे मामलों में आवेदन इस तरह से किए गए कि वे अस्वीकार हो जाएं। बाजार के विशेषज्ञों ने कहा कि यह काम गलत स्थायी खाता संख्या (पैन) डालकर या एक ही खाते से कई आवेदन करके या यूपीआई भुगतान नहीं करके किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि आवेदन के आंकड़े बढ़ाचढ़ाकर दिखाने का मकसद यह हो सकता है कि निवेशकों के सामने इश्यू की ज्यादा मांग वाली छवि बन जाए। एक विशेषज्ञ ने कहा कि कुछ निवेशक आवेदन के शुरुआती आंकड़ों से संकेत लेते हैं। अगर मांग ज्यादा है तो वे आवेदन करने के इच्छुक होते हैं। नियामक को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे सुनिश्चित हो कि आवेदन के आंकड़े सही हैं और सिर्फ विशेष परिस्थितियों में ही आवेदन रद्द हुए हैं।

सेबी प्रमुख ने कहा कि सूचीबद्धता के पहले हफ्ते के भीतर 68 फीसदी से ज्यादा गैर-संस्थागत निवेशक इससे बाहर निकल जाते हैं। खुदरा निवेशकों के मामले में यह आंकड़ा 43 फीसदी है, जो पहले हफ्ते में आईपीओ की बिकवाली कर देते हैं। आईपीओ का मूल्य खोज तरीका दोषपूर्ण है, लेकिन इसमें नीतिगत बदलाव की उम्मीद नहीं है। उन्होंने कहा कि खुदरा निवेशकों को मूल्य खोज ज्यादा बेहतर होने तक इंतजार करना चाहिए।

तकनीक अपनाने के बारे में बुच ने कहा कि सेबी आईपीओ के मसौदा दस्तावेज की जांच करने के लिए आर्टिफिशल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करेगा ताकि अधिकारियों पर निर्भरता 80 फीसदी तक कम हो जाए। एआईबीआई के साथ सेबी ने विवरणिका के मसौदे (डीआरएचपी) में पाए गए आम मसलों का विवरण जारी किया है जिसका इस्तेमाल करके मर्चेंट बैंकर प्रोसेसिंग में तेजी ला सकते हैं।

मोटे तौर पर किसी पेशकश दस्तावेज पर अंतिम फैसला लेने में सेबी दो महीने का समय लेता है। उद्योग के प्रतिभागियों ने कहा कि अत्याधुनिक यानी नई पीढ़ी के टूल्स इसे घटा सकते हैं, जिससे कंपनियों को अपने आईपीओ बेहतर तरीके से समय पर लाने में मदद मिले और बाजार के उतारचढ़ाव के कारण देरी से उनका बचाव हो सके।

सेबी की चेयरपर्सन ने स्पष्ट किया कि नियामक अगली बोर्ड बैठक में असूचीबद्धता की व्यवस्था में फेरबदल के प्रस्ताव पर विचार नहीं करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि सेबी सूचीबद्ध कंपनियों की तरफ से अफवाह के सत्यापन को लेकर इंडस्ट्री स्टैंडर्ड फोरम के सुझावों पर विचार करेगा। यह समयसीमा बढ़ाई जानी है।

सेबी ने 1 फरवरी की समयसीमा तय कर रखी है जिसके तहत 100 अग्रणी सूचीबद्ध कंपनियों को बाजार में अफवाह की रिपोर्ट की पुष्टि, सत्यापन या इससे इनकार करना है।

इसके ​अतिरिक्त बाजार नियामक म्युचुअल फंड लाइट पर सुझावों का मसौदा इस साल मार्च तक लेकर आ सकता है, जिसमें पैसिव फंडों के लिए विस्तृत और काफी कम नियामकीय अनिवार्यता है। हालांकि उच्च जोखिम वाले म्युचुअल फंड श्रेणी पर स्पष्टता इस साल बाद में देखने को मिल सकती है।

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First Published - January 19, 2024 | 9:51 PM IST

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