विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) की एक रिपोर्ट के जून तिमाही में सोने की मांग 49 फीसदी बढ़ने के बाद कैलेंडर वर्ष के शेष समय में भारत में स्वर्ण मांग में कमी आने का अनुमान है। अप्रैल-जून तिमाही में देश में सोने की मांग बढ़कर 140.3 टन पर पहुंच गई।
डब्ल्यूजीसी के क्षेत्रीय मुख्य कार्याधिकारी सोमसुंदरम पीआर ने कहा, ‘अक्षय तृतीया और शादियों से संबंधित खरीदारी ने आभूषण मांग को बढ़ावा दिया। 2021 की पहली तिमाही कोरोना की दूसरी लहर से प्रभावित हुई थी। 2022 की पहली छमाही में कुल आभूषण मांग 234 टन तक पहुंच गई जो सालाना आधार पर 6 फीसदी की वृद्धि है।
आर्थिक परिदृश्य को लेकर अनिश्चितता, आयात शुल्क में बढ़ोतरी और सोने की खरीद पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए जाने की संभावना तथा रुपया-डॉलर विनिमय दर में हो रही समस्याओं के कारण देश में सोने की मांग पर नियंत्रण रह सकता है।
सोमसुंदरम का मानना है कि मांग में तेजी सामान्य मानसून, उच्च मुद्रास्फीति और स्थिर कीमतों के कारण आ सकती है। इस बीच जून 2022 की तिमाही में भारत में सोने की कुल मांग 170.7 टन रही, जो सालाना 43 फीसदी की वृद्धि है। अगर मूल्य के संदर्भ में बात करें तो यह 65,140 करोड़ रुपये रही जो 2021 के दूसरी तिमाही में दर्ज 40,610 करोड़ रुपये की तुलना में 60 फीसदी की वृद्धि थी।
वर्ष 2022 की पहली छमाही में देश में कुल आभूषण की मांग 234 टन तक पहुंच गई, जो 6 फीसदी अधिक थी। जून तिमाही में सोने में निवेश, सिक्के की मांग आदि 20 फीसदी बढ़कर 30 टन तक पहुंच गया। 2022 की पहली छमाही में यह निवेश 11 फीसदी की मजबूती के साथ 72 टन तक पहुंच गया। इस दौरान सोने की मांग को बाजारों में मौजूद अस्थिरता और मुद्रास्फीति की उम्मीदों का समर्थन मिला। इस बीच जून 2022 की तिमाही में सोने की कीमतें औसत 1,871 डॉलर प्रति औंस रहीं जो बीते साल के मुकाबले 3 फीसदी अधिक थी लेकिन बीते साल में इसी तिमाही के मुकाबले 6 फीसदी कम थी। वैश्विक स्तर पर सोने की मांग (ओटीसी को छोड़कर) सालाना आधार पर 8 फीसदी कम होकर 948 टन पर रह गई हैं।