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अग्रणी शेयरों में आधे हैं कमजोर

Last Updated- December 11, 2022 | 1:47 PM IST

बेंचमार्क निफ्टी बुधवार को अपने 200 दिन के मूविंग एवरेज (डीएमए) पर दोबारा आने में कामयाब हुआ, ले​किन 500 अग्रणी शेयरों में से आधे अहम तकनीकी संकेतकों से नीचे बने हुए हैं।
200 डीएमए (बंद भाव का साल का औसत) का विश्लेषण ट्रेडर बाजार के सेंटिमेंट को समझने के लिए करते हैं। इस स्तर से नीचे कमजोर रुख का संकेत देता है। आंकड़े बताते हैं कि 500 अग्रणी शेयरों में से 117 अपने-अपने 200 डीएमए से 10 फीसदी से ज्यादा नीचे कारोबार कर रहे हैं।
वैयक्तिक शेयरों की बात करें तो तानला प्लेटफॉर्म, मास्टेक और मेडप्लस हेल्थ सर्विसेज अपने-अपने 200 डीएमए से 30 फीसदी से ज्यादा नीचे कारोबार कर रहे हैं। उधर, मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स, केआरबीएल और कोचीन शिपयार्ड अपने-अपने 200 डीएमए से ऊपर हैं। मझगांव डॉक 104 फीसदी ऊपर कारोबार कर रहा है, वहीं कोचीन शिपयार्ड 55 फीसदी ऊपर कारोबार कर रहा है।
विश्लेषकों ने कहा कि बीएसई 500 के आधे शेयर 200 डीएमए से नीचे हैं, जो संकेत देता है कि बाजार का सेंटिमेंट मजबूत नहीं है और व्यापक बाजारों में बिकवाली का काफी ज्यादा दबाव है।
आईडीबीआई कैपिटल के शोध प्रमुख ए के प्रभाकर ने कहा, जब बाजारों में उतारचढ़ाव होता है तब मिडकैप व स्मॉलकैप शेयर का प्रदर्शन अच्छा नहीं होता। वैश्विक अवरोधों के चलते व्यापक रुख तत्काल बदलने की संभावना नहीं है। ऐसे में बढ़त क्षेत्र व शेयर विशेष में होगा।
बॉन्ड के बढ़ते प्रतिफल, भूराजनीतिक स्थिति खराब रहने और वैश्विक मंदी का डर निवेशकों को जोखिम वाली परिसंपत्तियों से दूर रहने के लिए बाध्य कर रहा है। वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती और बढ़ते बॉन्ड प्रतिफल ने एफपीआई को भारतीय इक्विटी का शुद्ध‍ बिकवाल बना दिया है और निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
इसके अतिरिक्त देसी बाजार भी वैश्विक झंझावात बहुत समय तक बचा नहीं रह सकता जबकि वैश्विक आर्थिक दबाव वाले साल में भारतीय अर्थव्यवस्था कई अन्य देशों  के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।

First Published - October 12, 2022 | 10:52 PM IST

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