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महंगाई का आंकड़ा दे रहा ब्याज बढ़ोतरी का संकेत

Last Updated- December 11, 2022 | 1:45 PM IST

सितंबर में उपभोक्ता कीमत मुद्रास्फीति 7.41 प्रतिशत पर रही, जो भारतीय रिजर्व बैंक  के 6 प्रतिशत के स्तर से काफी ज्यादा है। उपभोक्ता कीमत मुद्रास्फीति को मुख्य तौर पर खाने-पीने से जुड़ी महंगाई से बढ़ावा मिला, जो पिछले महीने में 8.6 प्रतिशत के साथ 22 महीने की ऊंचाई पर पहुंच गई। यहां प्रमुख ब्रोकरों और अर्थशा​स्त्रियों ने इन आंकड़ों पर राय जाहिर की है।
यूबीएस
अक्टूबर के शुरू में बेमौसम बारिश से गर्मी की फसल प्रभावित हो सकती है, जिससे अल्पाव​धि में खाद्य मुद्रास्फीति का जो​खिम बढ़ा है। हमारा मानना है कि सीपीआई मुद्रास्फीति वित्त वर्ष 2023 में औसत 6.7 प्रतिशत रहेगी और आरबीआई का नीतिगत रुख फेड के कदमों, भारत के बाहरी क्षेत्र जो​खिमों पर निर्भर रह सकता है इसका भारत की मुद्रास्फीति पर मौद्रिक सख्ती के तौर पर असर दिख सकता है। हमें मौद्रिक नीति समिति  द्वारा रीपो दर फिर से 35 आधार अंक बढ़ाकर दिसंबर 2022 में 6.25 प्रतिशत किए जाने की संभावना है।
मॉर्गन स्टैनली
हमें फरवरी/मार्च 2023 तक सीपीआई के 6 प्रतिशत से नीचे आने से मुद्रास्फीति में धीरे धीरे नरमी आने का अनुमान है। हमें वित्त वर्ष 2023 में सीपीआई मुद्रास्फीति औसत 6.5 प्रतिशत पर रहने की संभावना है। मुद्रास्फीति में तेजी का जो​खिम खाद्य या जिंस कीमतों में अप्रत्या​शित बदलाव से पैदा हो सकता है। हमें दिसंबर की नीतिगत समीक्षा में 35 आधार अंक दर वृद्धि का अनुमान है।
नोमुरा
हम आगामी महीनों में खाद्य कीमतों में और तेजी आने की संभावना से इनकार नहीं कर रहे हैं और खाने-पीने से संबं​धित मुद्रास्फीति 2022 में सालाना आधार पर औसत 6.8 प्रतिशत पर रह सकती है और उसके बाद वित्त वर्ष 2023 में यह नरम पड़कर 5.5 प्र​तिशत पर आ सकती है। जैसे जैसे मंदी गहराती जाएगी, मांग कमजोर पड़ेगी और वित्तीय ​स्थिति सख्त होगी। ऐसे में जीडीपी वृद्धि 2022 के 7.2 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2023 में इससे नीचे आ सकती है।
एसबीआई
देश के कई हिस्सों में बेमौसम बारिश से अनाज और स​ब्जियों के दाम बढ़ सकते हैं, क्योंकि फसल पर बारिश का प्रभाव पड़ा है। 2022 में फेड की दर वृद्धि और औसत मुद्रास्फीति अनुमान के साथ, आरबीआई को दर वृद्धि को संतुलित बनाने की चुनौती से गुजरना होगा। 
इक्रा
अक्टूबर 2022 के शुरू में हुई भारी बारिश से खरीफ फसल पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता हैर और रबी की बुआई में विलंब होगा।  इससे खाद्य मुद्रास्फीति के लिए जो​खिम पैदा होगा। हालांकि आरबीआई द्वारा अगली दर वृद्धि की मात्रा इस पर निर्भर करेगी कि अक्टूबर 2022 में महंगाई की चाल कैसी रहेगी। साथ ही वित्त वर्ष 2023 की दूसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि पर भी आरबीआई की नजर बनी रहेगी।
क्वांटईको रिसर्च
खाद्य मुद्रास्फीति के जो​खिम अब कई वजहों से बढ़ गए हैं और इन्हें मौसमी, वै​श्विक तथा प्रशासनिक के तौर पर वर्गीकृत किया जा सकता है, जैसे द​क्षिण-प​श्चिम में असमान बारिश, खरीफ की कम बुआई और खरीफ उत्पादन में संभावित कमी। हमने अपने वित्त वर्ष 2023 के सीपीआई अनुमान को 20 प्रतिशत तक बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है। 
 

First Published - October 13, 2022 | 9:51 PM IST

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