facebookmetapixel
रेट कट का असर! बैंकिंग, ऑटो और रियल एस्टेट शेयरों में ताबड़तोड़ खरीदारीTest Post कैश हुआ आउट ऑफ फैशन! अक्टूबर में UPI से हुआ अब तक का सबसे बड़ा लेनदेनChhattisgarh Liquor Scam: पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य को ED ने किया गिरफ्तारFD में निवेश का प्लान? इन 12 बैंकों में मिल रहा 8.5% तक ब्याज; जानिए जुलाई 2025 के नए TDS नियमबाबा रामदेव की कंपनी ने बाजार में मचाई हलचल, 7 दिन में 17% चढ़ा शेयर; मिल रहे हैं 2 फ्री शेयरIndian Hotels share: Q1 में 19% बढ़ा मुनाफा, शेयर 2% चढ़ा; निवेश को लेकर ब्रोकरेज की क्या है राय?Reliance ने होम अप्लायंसेस कंपनी Kelvinator को खरीदा, सौदे की रकम का खुलासा नहींITR Filing 2025: ऑनलाइन ITR-2 फॉर्म जारी, प्री-फिल्ड डेटा के साथ उपलब्ध; जानें कौन कर सकता है फाइलWipro Share Price: Q1 रिजल्ट से बाजार खुश, लेकिन ब्रोकरेज सतर्क; क्या Wipro में निवेश सही रहेगा?Air India Plane Crash: कैप्टन ने ही बंद की फ्यूल सप्लाई? वॉयस रिकॉर्डिंग से हुआ खुलासा

निवेशकों को तेजी आने पर करनी चाहिए बिकवाली

Last Updated- December 11, 2022 | 6:37 PM IST

एसऐंडपी 500 सूचकांक में ऊंचे स्तर से 20 प्रतिशत की भारी गिरावट के बावजूद जेफरीज में इक्विटी रणनीति के वैश्विक प्रमुख जेफरीज क्रिस्टोफर वुड का मानना है कि अभी और गिरावट का अनुमान है। उनका मानना है कि निवेशकों को किसी तरह की अल्पावधि तेजी में शेयरों से निकलने पर ध्यान देना चाहिए।  
निवेशकों को भेजी अपनी साप्ताहिक रिपोर्ट ग्रीड ऐंड फियर में वुड ने लिखा है, ‘हालात उम्मीद के विपरीत बने हुए हैं और ग्रीड ऐंड फियर में कहा गया है कि निवेशकों को तेजी पर बिकवाली करनी चाहिए। यदि फेडरल रिजर्व अपने मौजूदा सख्त एजेंडे पर कायम रहता है तो निवेशकों को न्यूनतम गिरावट का अनुमान जताना चाहिए। एसेंडपी 500 में अब तक करीब 20 प्रतिशत से ज्यादा की कमजोरी पहले ही आ चुकी है और यह बढ़कर 30 प्रतिशत हो सकती है।’
याद रखने की बात यह है कि प्यू रिसर्च सेंटर के इस महीने जारी किए गए सर्वे के हवाले से वुड ने लिखा कि अमेरिकी किसी अन्य मुद्दे के जाय मुद्रास्फीति को लेकर ज्यादा चिंतित हैं। 70 प्रतिशत अमेरिकियों ने मुद्रास्फीति को देश के लिए बेहद बड़ी समस्या करार दिया, जिसके बाद 55 प्रतिशत ने हेल्थकेयर और 65 प्रतिशत ने अपराध को बड़ी समस्या बताया। यह सर्वेक्षण 25 अप्रैल से 1 मई के बीच कराया गया था।
वैश्विक वित्तीय बाजारों में गिरावट आई है, क्योंकि मुद्रास्फीति बढ़ी है, जिससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व और आरबीआई समेत कई केंद्रीय बैंकों को सख्त रुखे अपनाने और ब्याज दरें बढ़ाने का कदम उठाना पड़ा है।
उदहारण के लिए, अमेरिका में मुद्रास्फीति अप्रैल में 8.3 प्रतिशत के साथ 41 वर्षीय ऊंचे स्तर पर पहुंच गई, जो मार्च के 8.5 प्रतिशत से कुछ कम है। वहीं घरेलू तौर पर, उपभोक्ता कीमत मुद्रास्फीति (सीपीआई) दर अप्रैल में 7.79 प्रतिशत के आठ वर्ष ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। दूसरी तरफ थोक बिक्री कीमत सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति दर अप्रैल में बढ़कर 15.08 प्रतिशत पर पहुंच गई, क्योंकि जिंस और खाद्य कीमतें चढ़ गई थीं। आंकड़े से पता चलता है कि इसके साथ डब्ल्यूपीआई आधारित महंगाई लगातार 13 महीनों मेें दो अंक में रही।
बीएसई के सेंसेक्स और निफ्टी-50 सूचकांकों में कैलेंडर वर्ष 2022 में अब तक करीब 7-7 प्रतिशत की कमी आई है। कई विश्लेषकों को भारतीय बाजारों के कैलेंडर वर्ष 2022 में अस्थिर बने रहने का अनुमान है, क्योंकि वे बढ़ती मुद्रास्फीति और ब्याज दरों के नए नॉर्मल को समायोजित कर सकते हैं। इससे निवेशकों के लिए खासकर निर्धारित आय/डेट सेगमेंट में निवेश के और अवसर पैदा होंगे। उनका कहना है कि निवेशकों के लिए रिस्क-रिवार्ड अनुकूल होने से इक्विटी बाजारों में अब और गिरावट आ सकती है।

First Published - May 28, 2022 | 12:25 AM IST

संबंधित पोस्ट