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लॉजि​स्टिक्स शेयरों के दाम सही

Last Updated- December 11, 2022 | 3:23 PM IST

 लॉजि​​स्टिक्स नीति शुरू करने के बाद सोमवार को स्टॉक एक्सचेंजों में लॉजिस्टिक कंपनियों के शेयरों के कारोबार का रुख मिला-जुला रहा
सरकार की तरफ  से शनिवार, 17 सितंबर को राष्ट्रीय लॉजि​​स्टिक्स नीति (एनएलपी) शुरू करने के बाद सोमवार को लॉजिस्टिक कंपनियों के शेयरों के कारोबार में मिला-जुला रुख रहा। जहां एक ओर निवेशकों ने ऑलकार्गो लॉजिस्टिक्स, कॉनकॉर, वीआरएल लॉजिस्टिक्स और लैंसर कंटेनर के शेयरों में खरीदारी की वे उनमें 0.4 फीसदी से लेकर सात फीसदी तक का इजाफा दर्ज किया गया, वहीं दूसरी ओर स्नोमैन लॉजिस्टिक्स, महिंद्रा लॉजिस्टिक्स और डेलिवरी के शेयरों पर दबाव रहा। इन कंपनियों के शेयरों में चार फीसदी तक की गिरावट आई।

बाजार की यह प्रतिक्रिया एनएलपी के संबंध में विश्लेषकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया को दर्शाती है क्योंकि भले ही उन्हें इस बात की उम्मीद हो कि इस नीति से मध्य अव​धि से लेकर दीर्घाव​धि तक लॉजिस्टिक कंपनियों को फायदा होगा, लेकिन उन्हें निकट अवधि में कोई फायदा नहीं दिख रहा है।

मिसाल के तौर पर जेफरीज के विश्लेषकों का मानना ​​है कि इस नई नीति के तहत अनुकूल वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से इस क्षेत्र में संगठित कंपनियों को फायदा होगा। वे कॉनकॉर, टीसीआई एक्सप्रेस और डेलिवरी के मध्य अवधि के परिदृश्य के संबंध में आशावादी बने हुए हैं। 
सप्ताहांत में सरकार ने राष्ट्रीय लॉजि​स्टिक्स नीति पेश की थी, जिसका उद्देश्य देश में तकनीकी रूप से सक्षम लॉजि​स्टिक्स व्यवस्था को एकीकृत और विकसित करना है।इस नई लॉजिस्टिक्स नीति का लक्ष्य वर्ष 2030 तक लागत को कम करके एकल अंक मे लाना है, जो फिलहाल सकल घरेलू उत्पाद के 13 से 14 प्रतिशत स्तर पर है। यह अमेरिका और जर्मनी जैसे विकसित देशों की तर्ज पर होगा, जहां लॉजि​स्टिक्स लागत सात प्रतिशत से लेकर नौ प्रतिशत के दायरे में है।

सरकार ने कहा कि इस लागत को डिजिटल प्रणाली के एकीकरण (आईडीएस), यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (यूलिप), लॉजिस्टिक्स सुगमता (ईएलओजी), नेटवर्क नियोजन समूह (एनपीजी) और प्रणाली सुधार समूह (एसआईजी) जैसी पहलों के जरिये कम किया जाएगा। 

जेएम फाइनैं​शियल के विश्लेषक मानते हैं कि यूलिप और ईएलओजी जैसे प्लेटफॉर्म की शुरुआत से लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के लगभग सभी खंडों की संभावनाओं को एनएलपी से बढ़ावा मिल सकता है। 
कंटेनर कॉरपोरेशन (कॉनकोर) और गेटवे डिस्ट्रिपार्क्स के संबंध में उन्होंने ‘खरीद’ की रेटिंग के साथ एक नोट में लिखा है कि लागत में कमी और अ​धिक मात्रा या दक्षता के जरिये यह नीति कंटेनर ट्रेन परिचालकों, सड़क लॉजिस्टिक्स वाली कंपनियों, वेयरहाउसिंग क्षेत्र की कंपनियों, एक्सप्रेस लॉजिस्टिक्स कंपनियों और एयर कार्गो कंपनियों की संभावनाओं को बढ़ावा देने के लिए है। 

आईडीबीआई कैपिटल के अनुसंधान प्रमुख एके प्रभाकर ने कहा कि चूंकि कार्गो और माल की आवाजाही आम तौर पर सड़कों के माध्यम से होती है, इसलिए एनएलपी रेलवे जैसे परिवहन के अन्य साधनों पर भी ध्यान केंद्रित करती है। इससे सड़क लॉजि​स्टिक्स लागत कम करने और रेल के माध्यम से परिवहन मार्ग खोलने में मदद मिलेगी।

 

First Published - September 19, 2022 | 10:14 PM IST

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