Market Outlook 2025: साल 2025 में शेयर बाजार दो हिस्सों में बंटा नजर आ सकता है। पहले हिस्से में मार्केट में कंसोलिडेशन देखने को मिलेगा, जबकि दूसरे हिस्से में रिकवरी की उम्मीद है। भारतीय बाजार पर वैश्विक और घरेलू आर्थिक घटनाओं का बड़ा प्रभाव रहेगा।
फरवरी 2025 में आरबीआई द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना, अमेरिका में ब्याज दरों में कमी होने का ट्रेंड और जनवरी 2025 में Donald Trump के US President बनने के बाद ट्रेड पॉलिसी में बदलाव की उम्मीद से बाजार में अस्थिरता रह सकती है। इसके अलावा, फरवरी 2025 में पेश होने वाला केंद्रीय बजट भी बाजार को अहम संकेत देगा। फिलहाल, कमजोर वैश्विक आर्थिक माहौल और घरेलू मिश्रित आर्थिक कारकों के चलते मार्केट कंसोलिडेशन मोड में बना रह सकता है।
दूसरे हिस्से में नजर आएगी रिकवरी
Motilal Oswal Wealth Management के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 की पहली छमाही में कंपनियों के कमजोर नतीजों के बाद, दूसरी छमाही में सुधार की उम्मीद है। ग्रामीण क्षेत्र में खर्च बढ़ने, शादी के सीजन की मांग, और सरकारी खर्च में तेजी से बाजार को सहारा मिल सकता है। उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2025-27 के दौरान कमाई 16% की वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ेगी।
हालिया बाजार सुधार और मूल्यांकन में आई नरमी निवेशकों को चुनिंदा शेयरों में निवेश का मौका दे रही है। लंबी अवधि में भारतीय कंपनियों की मजबूत बैलेंस शीट और मुनाफे की बेहतर संभावनाओं के कारण बाजार का रुझान सकारात्मक रहने की उम्मीद है।
2024 में भारतीय शेयर बाजार का प्रदर्शन: एक मजबूत साल
साल 2024 में निफ्टी ने करीब 13% की बढ़त दर्ज की, यह लगातार 9वां साल है जब बाजार ने सकारात्मक रिटर्न दिया। सितंबर में निफ्टी ने 26,277 के रिकॉर्ड स्तर को छुआ। मजबूत कॉर्पोरेट नतीजे, घरेलू निवेशकों का भरोसा और स्थिर अर्थव्यवस्था ने बाजार को मजबूती दी।
हालांकि, अक्टूबर-नवंबर में निफ्टी अपने उच्चतम स्तर से 11% गिरा। विदेशी निवेशकों (FIIs) ने इन दो महीनों में 1.5 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली की, जो अब तक की सबसे बड़ी बिकवाली रही। ऊंचे वैल्यूएशन और डॉलर इंडेक्स की मजबूती इसका मुख्य कारण बने।
नवंबर में महाराष्ट्र और हरियाणा चुनावों में बीजेपी की जीत से बाजार में फिर से उत्साह लौटा। आरबीआई के 50 बेसिस पॉइंट्स सीआरआर कट से लिक्विडिटी बढ़ने की उम्मीद भी बाजार को समर्थन दे रही है।
भारतीय बाजार में हालिया परिदृश्य और निवेश रणनीति
Motilal Oswal Wealth Management के मुताबिक, हाल के सुधार से भारतीय बाजार में लार्ज-कैप कंपनियों के मूल्यांकन में गिरावट आई है, जबकि मिड और स्मॉल-कैप अभी भी अपने ऐतिहासिक औसत से महंगे बने हुए हैं। निकट भविष्य में, निवेशकों को लार्ज-कैप स्टॉक्स में अधिक निवेश करने की सलाह दी जाती है, साथ ही मिड और स्मॉल-कैप में चयनात्मक निवेश करें।
फोकस वाले सेक्टर: IT, हेल्थकेयर, BFSI, कंज्यूमर डिस्क्रीशनरी, इंडस्ट्रियल्स, रियल एस्टेट, कैपिटल मार्केट, EMS, डिजिटल ई-कॉम और होटल्स।
कम फोकस वाले सेक्टर: मेटल्स, एनर्जी और ऑटोमोबाइल।
BFSI सेक्टर फिलहाल मजबूत स्थिति में है और 2025 की शुरुआत में ब्याज दरों में कटौती से इसकी कमाई और बढ़ सकती है। कैपिटल मार्केट में निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और डिजिटलीकरण का फायदा मिलेगा।
IT सेक्टर को अमेरिका में टेक्नोलॉजी खर्च में सुधार से फायदा हो सकता है। खासतौर पर AI, ऑटोमेशन और क्लाउड सर्विसेज में काम करने वाली कंपनियां मजबूत स्थिति में हैं।
कंज्यूमर डिस्क्रीशनरी सेक्टर को संगठित रिटेल चैनल्स में बढ़ते उपभोक्ता रुझान का फायदा मिलेगा।
भारत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में आगे बढ़ रहा है। 2027 तक ई-रिटेल 10% तक पहुंचने की उम्मीद है। सरकार की नीतियां डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स और EMS जैसे सेक्टरों को बढ़ावा देंगी।
टॉप शेयर:
ICICI बैंक, HCL टेक, एलएंडटी, जोमैटो, NAM इंडिया, मैनकाइंड, लेमन ट्री, पॉलिकैब, मैक्रोटेक डिवेलपर्स, सिरमा एसजीएस।