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मंदी की आहट से बाजार गिरे

Last Updated- December 11, 2022 | 6:05 PM IST

बाजार में बुधवार को फिर से भारी गिरावट देखने को मिली, क्योंकि अनिश्चित आर्थिक परिदृश्य से जुड़ी चिंताओं ने निवेशकों को आशंकाओं के घेरे में बनाए रखा। अमेरिकी इक्विटी बाजारों में तेजी को दरकिनार करते हुए कई एशियाई बाजार गिरावट के साथ खुले और शेयर गिरकर पिछले दिन बनाई गई बढ़त गंवा बैठे। विश्लेषकों का कहना है कि निवेशकों में इसे लेकर आशंकाएं हैं कि क्या नीति निर्माता मंदी को बढ़ावा दिए बगैर मुद्रास्फीति पर काबू पाने के लिए मौद्रित सख्ती के सटीक उपाय करने में सक्षम  हो पाएंगे।
सेंसेक्स 709 अंक या 1.35 प्रतिशत गिरकर आखिर में 51,822 पर बंद हुआ, वहीं निफ्टी-50 सूचकांक 225 अंक या 1.4 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 15,413 पर बंद हुआ। एसऐंडपी 500 सूचकांक मंगलवार को 2.5 प्रतिशत चढ़ गया था, लेकिन बुधवार को अमेरिकी वायदा बाजार ने वॉल स्ट्रीट पर कमजोर शुरुआत का संकेत दिया।
ओआंडा में वरिष्ठ बाजार विश्लेषक (एशिया प्रशांत) जेफ्रे हैली ने कहा, ‘ऐसा लगता है कि बाजारों में केंद्रीय बैंकों द्वारा सख्ती और मंदी की चिंताओं से निवेशकों की घबराहट बढ़ गई है। मंगलवार को वाल स्ट्रीट पर इक्विटी तेजी 60 सेकंड में गायब हो गई।’
कई वैश्विक बाजारों में दबाव देखा गया, क्योंकि दुनियाभर के नीति निर्माताओं ने दर वृद्धि की राह पर चलने पर जोर दिया है।
निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व के प्रमुख जेरोम पॉवेल दिन के आखिर में लिए जाने वाले निर्णयों सेपहले भी आशंकित बने हुए थे।
पॉवेल के कदमों से इसे लेकर आशंका पैदा हो गई है कि क्या फेड जुलाई की अपनी बैठक में भी 75 आधार अंक की दर वृद्धि कर सकता है। निवेशक इसे लेकर चिंतित हैं कि ज्यादा दर वृद्धि और केंद्रीय बैंकों की सख्ती से अर्थव्यवस्थाओं के मंदी की चपेट में जाने की खतरा बढ़ेगा।
मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज के प्रमुख (खुदरा शोध) सिद्धार्थ खेमका ने कहा, ‘बुधवार को इक्विटी बाजार बढ़ती मुद्रास्फीति और दर वृद्धि की चिंताओं के बीच सप्ताह की शुरुआती बढ़त को बरकरार रखने में नाकाम रहे।’

First Published - June 23, 2022 | 12:28 AM IST

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