म्युचुअल फंड

उथल-पुथल के बीच Equity Funds में ₹40,000 करोड़ से ज्यादा का निवेश! क्या संकेत दे रहा है बाजार?

AMFI March 2026 Data: ए​​क्टिव म्युचुअल फंड्स में Flexi cap Funds लगातार 8वें महीने सबसे ज्यादा निवेश आया। हालांकि AUM में 10% की गिरावट आई

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आशुतोष ओझा   
Last Updated- April 10, 2026 | 2:56 PM IST

AMFI March 2026 Data: प​श्चिम ए​शिया तनाव के चलते दुनियाभर के बाजारों में उठापटक के बावजूद इ​क्विटी म्युचुअल फंड्स पर भारतीय निवेशकों को भरोसा बना हुआ है। एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2026 में इ​क्विटी फंड्स में ₹40,450 करोड़ रुपये का इनफ्लो दर्ज किया गया। यह फरवरी में हुए 25,978 करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 56 फीसदी ज्यादा है। हालांकि, बाजार में गिरावट के चलते म्युचुअल फंड इंडस्ट्री का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹73.73 लाख करोड़ रह गया।

AMFI की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, इ​क्विटी फंड्स में सबसे ज्यादा निवेश फ्लेक्सी कैप फंड्स में 10,055 करोड़ रुपये हुआ। दूसरी ओर, डेट फंड्स से करीब 2.95 करोड़ रुपये और हा​इब्रिड फंड्स से 16538 करोड़ रुपये आउटफ्लो दर्ज किया गया। वहीं, मार्च महीने में SIP निवेश ₹32,087 करोड़ के रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गया है।

अबैकस म्युचुअल फंड के सीईओ वैभव चुघ का कहना है कि मार्च महीने के म्युचुअल फंड फ्लो यह साबित करते हैं कि भारत के निवेशक काफी परिपक्व हो गए हैं। अब हर गिरावट को बाहर निकलने की वजह नहीं, बल्कि निवेश के मौके के रूप में देखा जा रहा है, और इसी वजह से इक्विटी फंड्स में शानदार निवेश देखने को मिला है। हालांकि लिक्विड और आर्बिट्राज फंड्स से कुछ आउटफ्लो देखने को मिला है, लेकिन यह मुख्य रूप से वित्त वर्ष के अंत में नकदी की जरूरत के कारण हुआ है।

SIP से रिकॉर्ड ₹32,087 करोड़ आए

आंकड़ों के मुताबिक, मार्च में एसआईपी का जलवा जबरदस्त रहा। पिछले महीने SIP कंट्रीब्यूशन 32,087 करोड़ रुपये के अब तक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। फरवरी में यह 29,845 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था। इससे पहले, जनवरी में एसआईपी के जरिए रिटेल निवेशकों ने 31,002 करोड़ रुपये म्युचुअल फंड्स में लगाए ​थे।

वहीं, अगर न्यू फंड ऑफर्स (NFOs) की बात करें तो एक्टिव इक्विटी NFOs में 1,947 करोड़ रुपये का निवेश आया। मार्च में 24 नए फंड लॉन्च हुए। इनमें 23 क्लोज-एंडेड स्कीम और एक ओपन-एंडेड स्कीम​ थी। इन एनएफओ के जरिए 3,985 करोड़ रुपये जुटाए गए। वहीं, इससे पहले फरवरी 2026 में 21 NFOs के जरिए 4,979 करोड़ रुपये जुटाए गए थे।

AUM में आई 10% की गिरावट

AMFI के डाटा के मुताबिक, मार्च में म्युचुअल फंड्स की इक्विटी कैटेगरी में निवेश तेजी से बढ़ा है लेकिन इंडस्ट्री के कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में मंथली आधार पर गिरावट आई। मार्च में कुल एयूएम घटकर ₹73.73 लाख करोड़ रह गया, जो फरवरी में ₹82.03 लाख करोड़ था। महीने-दर-महीने एयूएम में करीब 10.1 फीसदी की गिरावट है।

Equity Funds: Flexi Cap लगातार 8वें महीने टॉप पर

AMFI की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, बाजार की उठापटक के बीच ए​क्टिव म्युचुअल फंड्स में फ्लेक्सी कैप फंड्स का दबदबा बरकरार है। इस कैटेगरी में लगातार आठवें महीने सबसे ज्यादा निवेश दर्ज किया गया। फ्लेक्सी कैप फंड्स में 10,054.12 करोड़ रुपये का इनफ्लो आया, जो फरवरी के 6,924.65 करोड़ रुपये से ज्यादा है।

फ्लेक्सी कैप के बाद स्मॉल कैप फंड्स में 6,263.56 करोड़ रुपये का सबसे ज्यादा निवेश आया। फरवरी में निवेशकों ने स्मालकैप फंड्स में 3,881.06 करोड़ रुपये लगाए थे। मिड कैप कैटेगरी में 6,063.53 करोड़ रुपये का निवेश दर्ज किया गया। फरवरी के इस कैटेगरी में 4,002.99 करोड़ रुपये से ज्यादा का इनफ्लो दर्ज किया गया।

वहीं, लार्ज कैप फंड्स में मार्च में 2,997.84 करोड़ रुपये निवेशकों ने लगाए। फरवरी में यह आंकड़ा 2,111.68 करोड़ रुपये था। सेक्टोरल और थीमैटिक फंड्स में 2,698.82 करोड़ रुपये का इनफ्लो हुा। जबकि फरवरी में इस कैटेगरी में 2,987.29 करोड़ रुपये आए थे।

इ​क्विटी- गिरावट में खरीदारी का मौका

द वेल्थ कंपनी म्युचुअल फंड के सीईओ (डेट) उमेश शर्मा ने बताया कि पश्चिम एशिया संघर्ष के बाद बाजार में आई गिरावट के कारण निवेश के बेहतर मौके बने, जिससे निवेशकों की रुचि बढ़ी। फ्लेक्सी कैप फंड्स में लगातार निवेश बना रहा, जबकि स्मॉल कैप और मिड कैप फंड्स में पहले के मुकाबले ज्यादा निवेश देखा गया। इसका कारण यह है कि इन कैटेगरी में वैल्यूएशन बेहतर हो गए हैं और रिटर्न की संभावनाएं आकर्षक दिख रही हैं।

शर्मा का कहना है कि कुल मिलाकर, मार्च के आंकड़े बताते हैं कि निवेशकों का रुझान ग्रोथ-ओरिएंटेड एसेट्स यानी इक्विटी की ओर बढ़ा है। बाजार में गिरावट के बाद बेहतर एंट्री पॉइंट मिलने से निवेश बढ़ा है। दूसरी ओर, फिक्स्ड इनकम में भारी निकासी हुई, जो मुख्य रूप से साल के अंत में नकदी की जरूरत और महंगाई व यील्ड में उतार-चढ़ाव की चिंताओं के कारण है। यह रुझान दिखाता है कि निवेशक बेहतर रिटर्न के लिए इक्विटी की ओर झुक रहे हैं, लेकिन वैश्विक अनिश्चितता के बीच ब्याज दर और ड्यूरेशन जोखिम को लेकर सतर्क भी हैं।

मिरे एसेट इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स (इंडिया) की हेड ऑफ डिस्ट्रीब्यूशन एंड स्ट्रैटेजिक एलायंसेज सुरंजना बोरठाकुर का कहना है, मार्च 2026 ने दो अलग-अलग तस्वीरें दिखाईं। इक्विटी फंड्स ने मजबूत वापसी की। घरेलू निवेशक (DIIs) अब बाजार के मजबूत आधार बन चुके हैं। DIIs अब सिर्फ सहारा नहीं, बल्कि बाजार में गिरावट के दौरान मजबूती देने का काम कर रहे हैं।

उनका कहना है कि पूरे साल के नजरिए से देखें तो FY26 को भारत के म्युचुअल फंड निवेशकों के मैच्योर होने का साल माना जाएगा।  ELSS में पहली बार पूरे साल में शुद्ध आउटफ्लो देखा गया, जो नए टैक्स सिस्टम के कारण एक स्थायी बदलाव का संकेत देता है। FY26 म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के लिए सबसे शोर वाला साल नहीं था, लेकिन यह सबसे महत्वपूर्ण साल जरूर साबित हुआ।

मार्च 2026: इ​क्विटी म्युचुअल फंड्स में इनफ्लो/आउटफ्लो

स्कीम नेट इनफ्लो (करोड़ रुपये में)
मल्टीकैप फंड 2,981.55
लार्ज कैप फंड 2,997.84
लार्ज एंड मिड कैप फंड 5,307.25
मिड कैप फंड 6,063.53
स्माल कैप फंड 6,263.56
डिविडेंड यील्ड फंड -59.21
वैल्यू/कॉन्ट्रा फंड 2,155.55
फोकस्ड फंड 2,424.59
सेक्टोरल/​थीमैटिक फंड्स 2,698.82
ELSS -437.34
फ्लेक्सी कैप फंड 10,054.12
कुल 40,450.26

(सोर्स: AMFI)

वैभव चुघ का कहना है कि डिस्ट्रिब्यूटर्स और एडवाइजर्स ने भी बाजार की अनिश्चितता के समय निवेशकों का सही मार्गदर्शन किया है। SIP निवेश में बढ़ोतरी भी इसी बात को दर्शाती है। फ्लेक्सीकैप फंड्स निवेश के लिए सबसे बेहतर माने जा रहे हैं, क्योंकि फंड मैनेजर अलग-अलग मार्केट कैप में निवेश कर सकते हैं, जिससे यह ज्यादा लचीले और डायनामिक बनते हैं। इसी कारण निवेशक इस कैटेगरी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं।

भारतीय निवेशकों की बढ़ती समझदारी देखकर खुशी होती है, क्योंकि वे अब वैल्यूएशन को समझकर निवेश कर रहे हैं। हाल के समय में स्मॉल कैप का प्रदर्शन कमजोर रहा है, फिर भी निवेशकों ने इसमें निवेश बढ़ाया है, क्योंकि उन्हें समझ आ गया है कि वैल्यूएशन अपने उच्च स्तर और 10 साल के औसत से नीचे आ गया है।

Debt Funds: ₹2.94 लाख करोड़ का आउटफ्लो

एम्फी डाटा के मुताबिक, मार्च महीने में डेट फंड्स में 2.94 लाख करोड़ रुपये का आउटफ्लो दर्ज हुआ, जबकि फरवरी में 42,106.31 करोड़ रुपये का इनफ्लो आया था। लिक्विड फंड्स में सबसे ज्यादा 1.34 करोड़ रुपये का आउटफ्लो दर्ज किया गया। फरवरी में इस कैटेगरी में 59,077.39 करोड़ रुपये आया था। वहीं, ओवरनाइट फंड्स में 40,227.90 करोड़ रुपये का आउटफ्लो हुआ। फरवरी में इसमें 14,006.21 करोड़ रुपये का आउटफ्लो था।

डेट फंड्स से क्यों हुआ आउटफ्लो?

उमेश शर्मा का कहना है कि मार्च 2026 में डेट-ओरिएंटेड स्कीम्स में ₹2,94,987 करोड़ का नेट आउटफ्लो दर्ज हुआ। यह खासकर एक साल से कम अवधि वाले फंड्स से भारी रिडम्प्शन के कारण हुआ। इस तरह का आउटफ्लो हर साल देखने को मिलता है, क्योंकि मार्च में तिमाही और वित्त वर्ष के अंत में नकदी की जरूरत बढ़ जाती है।

उनका कहना है कि ड्यूरेशन- आधारित कैटेगरी भी दबाव में रहीं और इनमें लगातार आउटफ्लो देखा गया। मौजूदा वैश्विक अनिश्चितता के चलते जोखिम और रिटर्न का संतुलन इन फंड्स में कमजोर नजर आ रहा है। एनर्जी की कीमतों में बढ़ोतरी से यील्ड पर दबाव बढ़ा है, जिससे निवेशकों के पोर्टफोलियो पर मार्क-टू-मार्केट असर पड़ा है। कॉरपोरेट बॉन्ड फंड्स से करीब ₹15,000 करोड़ का आउटफ्लो हुआ, जो पिछले महीनों की कमजोरी को आगे बढ़ाता है। निवेशकों ने हाई क्वॉलिटी वाले ड्यूरेशन फंड्स में जोखिम को देखते हुए अपने निवेश का रीवैल्युएशन किया है।

Hybrid Funds: निवेशकों ने ₹16,538 करोड़ निकाले

एम्फी के आंकड़ों के मुताबिक, हाइब्रिड म्युचुअल फंड्स में मार्च में 16,538.47 करोड़ रुपये का आउटफ्लो दर्ज किया गया। जबकि फरवरी में 11,983.37 करोड़ रुपये का निवेश आया ​था। इस कैटेगरी में आर्बिट्राज फंड्स में सबसे ज्यादा 21,113.70 करोड़ रुपये निवेशकों ने निकाल लिये। जबकि फरवरी में 591.85 करोड़ रुपये का निवेश आया था।

हाइब्रिड फंड्स की अन्य स्कीम्स की बात करें तो मल्टी एसेट अलोकेशन फंड में 5212.73 करोड़ का निवेश आया है। वहीं बैलेंस्ड हाइ​ब्रिड फंड/एग्रेसिव फंड में 994.53 करोड़ का निवेश दर्ज किया गया।

दूसरी ओर, गोल्ड ETF में फरवरी के मुकाबले लगभग आधा इनफ्लो रह गया। आंकड़ों के मुताबिक, मार्च में गोल्ड ETF 2,266 करोड़ रुपये रहा, जबकि फरवरी में यह 5,254.95 करोड़ रुपये था।

First Published : April 10, 2026 | 1:15 PM IST