म्युचुअल फंड

4 साल बाद बदली तस्वीर, क्रेडिट रिस्क फंड्स में फिर आने लगा पैसा; बेहतर रिटर्न से बढ़ी निवेशकों की रुचि

कम रेटिंग वाले बचत पत्रों में भारी निवेश करने की इजाजत वाली एकमात्र डेट म्युचुअल फंडों की इस श्रेणी में अप्रैल और मई- दोनों महीनों में निवेश आया

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अभिषेक कुमार   
Last Updated- June 16, 2026 | 10:55 PM IST

लगातार 52 महीनों तक बिकवाली दबाव और निवेशकों के लगभग 15,000 करोड़ रुपये की निकासी के बाद क्रेडिट रिस्क फंडों में तेजी के शुरुआती संकेत दिख रहे हैं। कम रेटिंग वाले बचत पत्रों में भारी निवेश करने की इजाजत वाली एकमात्र डेट म्युचुअल फंडों की इस श्रेणी में अप्रैल और मई- दोनों महीनों में निवेश आया। इससे चार साल से ज्यादा से जारी हर महीने की बिकवाली का सिलसिला टूट गया।

इस कैटेगरी में अप्रैल में लगभग 1,318 करोड़ रुपये का निवेश आया, जो कम से कम अप्रैल 2019 के बाद से किसी भी महीने में आया सबसे अधिक निवेश है। अप्रैल 2019 में ही एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) ने कैटेगरी के हिसाब से निवेश का डेटा देना शुरू किया था। मई में भी निवेश का सिलसिला जारी रहा, हालांकि इसकी रफ्तार थोड़ी धीमी थी और निवेशकों ने लगभग 49 करोड़ रुपये का निवेश किया।

मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया में वरिष्ठ विश्लेषक नेहल मेश्राम ने कहा, ‘पिछले महीने क्रेडिट रिस्क फंडों में मामूली निवेश आया। लिहाजा, अप्रैल में शुरू हुई रिकवरी जारी रही। लेकिन निवेश की आवक अभी भी कमजोर और चुनिंदा है। इससे जाहिर होता है कि सिस्टम में तरलता बेहतर होने के बावजूद निवेशक अभी भी अच्छी गुणवत्ता वाले निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं। गौरतलब है कि मई में क्रेडिट रिस्क फंड ही एकमात्र ऐसी श्रेणी थी जिसमें निवेश आया, जबकि डेट की 16 में से 15 श्रेणियों में इस दौरान शुद्ध निकासी दर्ज की गई।’

क्रेडिट रिस्क फंड वर्ष 2019 की शुरुआत तक लगभग 80,000 करोड़ रुपये की एयूएम के साथ सबसे बड़ी डेट म्युचुअल फंड श्रेणियों में से एक थे। तब से उनमें लगातार पैसा बाहर निकल रहा है। अब इनकी एयूएम लगभग 21,000 करोड़ रुपये रह गई हैं।

वर्ष 2018 के बाद इस श्रेणी की लोकप्रियता कम होने लगी। इसकी वजह आईएलऐंडएफएस संकट और डीएचएफएल तथा येस बैंक जैसे जारीकर्ता रहे जिनके भुगतान न कर पाने से कई योजनाओं को नुकसान हुआ। 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान नकदी की कमी ने निवेशकों के बाहर निकलने की रफ्तार और बढ़ा दी। मार्च-जून 2020 की अवधि के दौरान निवेशकों ने क्रेडिट रिस्क फंडों से लगभग 31,000 करोड़ रुपये निकाले।

हाल के वर्षों में क्रेडिट रिस्क फंडों ने अच्छा प्रदर्शन किया है। इसलिए इनमें निवेश फिर से आने लगा है। यह श्रेणी लगातार सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले डेट फंड सेगमेंट में से एक रही है और इसकी किसी भी योजना में कोई बड़ा डिफॉल्ट नहीं हुआ है। यील्ड बढ़ने के दबाव के बावजूद इनका एक साल का औसत रिटर्न अभी 8.5 प्रतिशत है। वैल्यू रिसर्च के डेटा के अनुसार तीन और पांच साल का औसत सालाना रिटर्न लगभग 10 प्रतिशत है। जानकारों का कहना है कि इन योजनाओं पर विचार किया जा सकता है क्योंकि इनमें डिफॉल्ट का जोखिम अपेक्षाकृत कम रहता है।

First Published : June 16, 2026 | 10:51 PM IST