म्युचुअल फंड

STT बढ़ा, निवेश घटा… आर्बिट्राज फंड के लिए आगे कैसा रहेगा रास्ता?

एडलवाइस म्युचुअल फंड की रिपोर्ट में घटती भागीदारी, कम स्प्रेड और नए नियमों के असर की बात

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देवव्रत वाजपेयी   
Last Updated- April 03, 2026 | 10:06 AM IST

Arbitrage Funds: मार्च 2026 का महीना शेयर बाजार के लिए आसान नहीं रहा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के बीच बाजार में दबाव साफ दिखा। निफ्टी से लेकर मिडकैप और स्मॉलकैप तक हर तरफ गिरावट का माहौल रहा। ऐसे समय में निवेशकों के बीच बेचैनी बढ़ना स्वाभाविक था। इसी बीच एडलवाइस म्युचुअल फंड की रिपोर्ट सामने आई है, जो बताती है कि इस उथल-पुथल के बीच आर्बिट्राज फंड सेगमेंट ने संतुलन बनाए रखा, लेकिन निवेशकों का भरोसा थोड़ा डगमगाता नजर आया।

बाजार में गिरावट, लेकिन Arbitrage Funds में स्थिरता

रिपोर्ट के मुताबिक मार्च सीरीज में निफ्टी 50 करीब 12 प्रतिशत से ज्यादा गिरा। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी करीब 10 प्रतिशत तक की गिरावट आई। यानी बाजार का कोई भी हिस्सा इस दबाव से अछूता नहीं रहा। इसके बावजूद आर्बिट्राज फंड पर इसका सीधा असर उतना नहीं दिखा।

अवधि Edelweiss Arbitrage डायरेक्ट प्लान रिटर्न Edelweiss Arbitrage रेगुलर प्लान रिटर्न बेंचमार्क
1 साल 6.73% 6.00% 7.24%
3 साल 7.72% 6.99% 7.68%
5 साल 6.74% 5.99% 6.41%
10 साल 6.58% 5.84% 5.62%

वजह साफ है, ये फंड बाजार के ऊपर या नीचे जाने पर दांव नहीं लगाते, बल्कि कीमतों के छोटे अंतर से कमाई करते हैं। यही कारण है कि गिरावट के माहौल में भी यह सेगमेंट अपेक्षाकृत स्थिर बना रहा।

फ्यूचर्स बाजार में भरोसा पूरी तरह नहीं टूटा

एडलवाइस की रिपोर्ट बताती है कि सिंगल स्टॉक फ्यूचर्स में रोलओवर करीब 93 प्रतिशत रहा। यह पिछले कुछ महीनों के औसत के आसपास है और यह संकेत देता है कि बाजार में कमजोरी के बावजूद बड़े खिलाड़ी पूरी तरह बाहर नहीं हुए हैं। हालांकि रोल स्प्रेड 57 से 60 बेसिस प्वाइंट के बीच सीमित रहे। इसका मतलब यह है कि ट्रेडिंग के मौके तो थे, लेकिन बहुत बड़े नहीं। कम वोलैटिलिटी ने यहां भी अपनी भूमिका निभाई।

Arbitrage Funds: निवेशकों ने बढ़ाई सतर्कता

यहां तस्वीर थोड़ी बदलती है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अप्रैल सीरीज के लिए ओपन इंटरेस्ट घटकर करीब 4.26 लाख करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले महीने से करीब 11 प्रतिशत कम है। सिर्फ इतना ही नहीं, आर्बिट्राज कैटेगरी का कुल निवेश भी घटकर लगभग 3.16 लाख करोड़ रुपये रह गया। यह दिखाता है कि निवेशकों ने इस दौर में थोड़ा संभलकर कदम रखा। विदेशी निवेशकों ने अपनी नेट लॉन्ग पोजिशन घटाई, वहीं रिटेल और बड़े निवेशकों ने भी एक्सपोजर कम किया। यानी बाजार में जोखिम लेने की भूख कम होती दिखी।

कम वोलैटिलिटी ने सीमित किए मौके

रिपोर्ट का एक अहम निष्कर्ष यह है कि पिछले कुछ समय में बाजार में उतार-चढ़ाव उतना तेज नहीं रहा, जितना आम तौर पर ऐसे माहौल में देखने को मिलता है। कम वोलैटिलिटी का सीधा असर आर्बिट्राज स्प्रेड पर पड़ा। इसका मतलब यह हुआ कि फंड को बहुत बड़े रिटर्न के मौके नहीं मिले।

नियमों में बदलाव और नया दबाव

एडलवाइस म्युचुअल फंड ने अपनी रिपोर्ट में नियामकीय बदलावों का भी जिक्र किया है। सेबी द्वारा डेट निवेश के नियमों में ढील से फंड को कुछ राहत मिल सकती है और डेट पोर्टफोलियो में बेहतर विकल्प मिल सकते हैं। लेकिन दूसरी तरफ 1 अप्रैल 2026 से फ्यूचर्स पर एसटीटी बढ़ा दिया गया है, जिससे रिटर्न पर कुछ दबाव आने की संभावना है। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि इसे कुछ हद तक मैनेज किया जा सकता है।

Arbitrage Funds: आगे क्या तय करेगा दिशा

रिपोर्ट के अनुसार आने वाले समय में बाजार की दिशा कई अहम घटनाओं पर निर्भर करेगी। इनमें आरबीआई की मौद्रिक नीति बैठक, महंगाई के आंकड़े और कंपनियों के तिमाही नतीजे शामिल हैं। इन घटनाओं से बाजार में वोलैटिलिटी बढ़ सकती है, जो आर्बिट्राज फंड्स के लिए नए मौके भी पैदा कर सकती है।

First Published : April 3, 2026 | 10:06 AM IST