म्युचुअल फंड

‘हेडलाइन्स’ से कहीं आप भी तो नहीं हो रहे गुमराह? SIP पर जारी रखें ये स्ट्रैटेजी

शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों का सबसे बड़ा दुश्मन अक्सर बाजार नहीं, बल्कि खबरों की भाषा बन जाती है

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अंशु   
Last Updated- March 26, 2026 | 5:56 PM IST

आजकल फाइनैंशियल न्यूज वेबसाइट पर “ब्लडबाथ”, “क्रैश”, “वाइपआउट” जैसी हेडलाइन्स की बाढ़ आ गई है। वजह है ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच छिड़ी जंग। इसके चलते दुनिया भर के शेयर बाजार हिचकोले खा रहे हैं। बाजार में उतार-चढ़ाव के इस माहौल में सवाल यह है कि क्या ये हेडलाइन्स सच दिखा रही हैं या आपको गुमराह कर रही हैं?

व्हाइटओक कैपिटल म्युचुअल फंड की एक हालिया रिपोर्ट इशारा करती है कि ऐसी हेडलाइन्स अक्सर निवेशकों में डर और जल्दबाजी पैदा करने के लिए तैयार की जाती हैं। नतीजा यह होता है कि निवेशक सोच-समझकर नहीं, बल्कि भावनाओं में आकर फैसले लेने लगते हैं। जबकि समझदारी इसी में है कि SIP जैसी स्ट्रैटेजी को जारी रखा जाए और शोर से दूर रहा जाए।

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हेडलाइन्स आपको कैसे गुमराह करती हैं?

शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों का सबसे बड़ा दुश्मन अक्सर बाजार नहीं, बल्कि खबरों की भाषा बन जाती है। रिपोर्ट के अनुसार, हेडलाइन्स निवेशकों को अक्सर तीन तरीकें से गुमराह करती है। पहला बड़े नंबर दिखाकर डर पैदा करना, दूसरा कागजी नुकसान को असली नुकसान बताना और तीसरा डरावनी भाषा से निवेशकों को भावनात्मक फैसले लेने पर मजबूर करना।

1. बड़े नंबर दिखाकर डर पैदा करना: हेडलाइन्स अक्सर बड़े (एब्सोल्यूट) नंबरों का इस्तेमाल कर सामान्य बाजार हलचल को भी बड़ा संकट दिखाती हैं। उदाहरण के तौर पर, “1,800 अंकों की गिरावट” सुनने में डरावनी लगती है। 23 मार्च 2026 तक सेंसेक्स करीब 74,000 अंक पर था। एब्सोल्यूट नंबर की जगह प्रतिशत में देखे तो यह लगभग 2.4% की गिरावट होती है।

रिपोर्ट के अनुसार, बाजार में एक दिन में 1% से 3% तक का उतार-चढ़ाव सामान्य माना जाता है। ऐसे में केवल पॉइंट्स में गिरावट या बढ़त दिखाने के बजाय प्रतिशत के आधार पर बदलाव को समझना ज्यादा सही तस्वीर पेश करता है। इसके बावजूद, फाइनैंशियल मीडिया अक्सर पॉइंट्स का सहारा लेती है, क्योंकि इससे खबर ज्यादा नाटकीय और डर पैदा करने वाली लगती है, जिससे निवेशक भावनात्मक रूप से प्रभावित हो सकते हैं।

2. ‘वाइपआउट’ का भ्रम: मीडिया अक्सर कागजी (अनरियलाइज्ड) गिरावट को स्थायी नुकसान की तरह दिखाती है। उदाहरण के तौर पर, “11 लाख करोड़ रुपये का नुकसान” सुनकर लगता है कि संपत्ति खत्म हो गई है, लेकिन ऐसा नहीं है। असल में सिर्फ स्क्रीन पर मार्केट कैप घटा है। कोई फैक्ट्री बंद नहीं हुई है। कोई डिविडेंड बंद नहीं हुआ है।

जब तक आपने घबराकर अपने निवेश को बेच नहीं दिया, तब तक आपको कोई वास्तविक नुकसान नहीं हुआ है। यह “नुकसान” सिर्फ एक आंकड़ा है, आपकी जिंदगी की सच्चाई नहीं।

3. डर पैदा करने वाली भाषा का इस्तेमाल:  हेडलाइन्स में अक्सर युद्ध जैसी भाषा का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि आपकी स्वाभाविक ‘बचाव’ की भावना सक्रिय हो जाए। रिपोर्ट कहती है कि “ब्लडबाथ”, “क्रैश”, “वाइपआउट” जैसे शब्द इसी मकसद से चुने जाते हैं। ये आपके तार्किक दिमाग को दरकिनार कर सीधे ‘फाइट या फ्लाइट’ प्रतिक्रिया को ट्रिगर करते हैं।

जब ऐसा होता है, तो आप एसेट एलोकेशन जैसे समझदारी भरे फैसलों के बजाय सिर्फ नुकसान से बचने के बारे में सोचने लगते हैं। यही वह समय होता है जब अक्सर गलत फैसले लिए जाते हैं।

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निवेशकों को क्या करना चाहिए?

सबसे पहले तो निवेशकों को घबराना नहीं है। रिपोर्ट कहती है कि निवेश के फैसले लेते समय खबरों के बजाय अपनी योजना और एसेट एलोकेशन पर भरोसा करें। गिरावट में SIP जारी रखें और बाजार को बार-बार देखने से बचें, क्योंकि इससे सिर्फ तनाव बढ़ता है।

1. टिकर नहीं, अपना एसेट एलोकेशन देखें: रिपोर्ट कहती है कि फाइनेंस न्यूज ऐप खोलने के बजाय अपनी एसेट एलोकेशन की योजना पर ध्यान दें। अगर आपका निवेश तय लक्ष्य के अनुसार बना हुआ है, तो कुछ न करना ही सही कदम है।

2. अपनी SIP जारी रखें: आज आपके SIP से पिछले महीने की तुलना में ज्यादा यूनिट्स खरीदी गई हैं। यह कोई समस्या नहीं, बल्कि यही इसकी सही काम है। गिरावट के समय SIP रोकना ऐसा है जैसे बारिश शुरू होते ही छाता बंद कर देना।

3. मीडिया की एक सीमा तय करें: बाजार को दिन में सिर्फ एक बार देखें। बेहतर है कि क्लोजिंग के बाद, न कि ट्रेडिंग के दौरान। उतार-चढ़ाव के समय लाइव टिकर पर नजर बनाए रखना “डूमस्क्रॉलिंग” जैसा है। इससे कुछ नहीं बदलता, बस तनाव बढ़ता है।

4. फाइनेंशियल एडवाइजर की सलाह लें: व्हाट्सऐप ग्रुप के बजाय अपने सलाहकार से बात करें। ग्रुप चैट अक्सर घबराहट बढ़ाती हैं, जबकि आपका सलाहकार आपके लक्ष्य, समय-सीमा और जोखिम क्षमता को बेहतर समझता है।

रिपोर्ट चेतावनी देती है कि फाइनेंशियल मीडिया लगातार डर पैदा करने वाली हेडलाइन्स देता रहेगा– कल भी और आगे भी। बाजार के हर करेक्शन में ऐसा हुआ है, और हर बार बाजार ने वापसी की है। इसलिए जहां हेडलाइन्स जल्दबाजी पैदा करती हैं, वहीं आपके पोर्टफोलियो को धैर्य की जरूरत होती है।

First Published : March 26, 2026 | 5:56 PM IST