म्युचुअल फंड

पूंजी बाजार के शेयरों की चमकीली राह, अगले 10 साल में MFs का AUM 17% की दर से बढ़ने का अनुमान

रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल बदलाव और निवेश की बढ़ती संस्कृति की वजह से खुदरा निवेशकों की भागीदारी में जो तेजी आई है

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निकिता वशिष्ठ   
Last Updated- April 16, 2026 | 10:10 PM IST

घरेलू बचत का पारंपरिक संपत्तियों से हटकर वित्तीय योजनाओं में निवेश बढ़ रहा है। इस संरचनात्मक बदलाव के कारण विश्लेषक भारतीय पूंजी बाजार की लंबी अवधि की विकास संभावनाओं को लेकर आशावादी हैं। उन्हें उम्मीद है कि बाजार इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रदाता और परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों की आय में कई वर्षों तक वृद्धि होती रहेगी।

एमके ग्लोबल फाइनैंशियल सर्विसेज के विश्लेषकों ने इस सेक्टर के बारे में अपनी आरंभिक रिपोर्ट में कहा, ‘पिछले दशक में भारतीय म्युचुअल फंड (एमएफ) उद्योग की प्रबंधन अधीन परिसंप​त्तियां (एयूएम) वित्त वर्ष 2016 के 12.3 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 73.7 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई हैं, जो 10 साल में 20 प्रतिशत की सालाना चक्रवृद्धि दर (सीएजीआर) है।’

रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल बदलाव और निवेश की बढ़ती संस्कृति की वजह से खुदरा निवेशकों की भागीदारी में जो तेजी आई है, जिससे आने वाले वर्षों में यह सेक्टर संस्थागत निवेशकों के लिए बहुत ही भरोसेमंद निवेश का जरिया बन जाएगा।

ब्रोकरेज फर्म ने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि भारतीय म्युचुअल फंड उद्योग एयूएम में अगले दस साल में लगभग 17 प्रतिशत की सीएजीआर हासिल करेगा और वित्त वर्ष 2035 तक यह 309 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी। इसकी मुख्य वजह निवेशकों की बढ़ती पहुंच और निवेश में लगातार बने रहने की प्रवृत्ति में सुधार के कारण होने वाला मजबूत शुद्ध प्रवाह है।’

आगे की तेज राह

एमके ग्लोबल के अनुसार भारतीय ऐसेट मैनेजमेंट कंपनियां भारतीय धन के संस्थानीकरण की सबसे कुशल माध्यम हैं। वे लंबी अवधि में एक ऐसा महारुझान देख रही हैं जो एयूएम में लगातार वृद्धि को रफ्तार दे रहा है।

ऐसा इसलिए है क्योंकि निवेश का लोकतंत्रीकरण अब भारतीयों में गहराई से जड़ जमा चुका है। इसमें सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) बाजारों के लिए एक ‘​स्टिकी ऐंड ग्रैन्युलर ऑटोमेटेड इंजन’ का काम करते हैं। मार्च 2026 में एसआईपी के जरिये आने वाला निवेश रिकॉर्ड 32,000 करोड़ रुपये के आंकड़े तक पहुंच गया।

ब्रोकरेज ने ऊंचे दर्जे की उन एएमसी फ्रेंचाइजी पर सकारात्मक रुख बनाए रखा है, जिनके कम पूंजी वाले और कारोबार बढ़ाने वाले मॉडल हैं। एमके ग्लोबल ने एचडीएफसी एएमसी (कीमत लक्ष्य 5,100 रुपये), आईसीआईसीआई प्रूडें​शियल एएमसी (850 रुपये), और निप्पॉन लाइफ इंडिया (750 रुपये) के लिए ‘खरीदें’ रेटिंग दी है। उसने आदित्य बिड़ला सन लाइफ एएमसी और यूटीआई एएमसी को ‘जोड़ें’ रेटिंग दी है, जिनके कीमत लक्ष्य क्रमशः 600 रुपये और 1,200 रुपये हैं।

हालांकि परिसंप​त्ति प्रबंधन व्यवसाय का स्थायी लागत आधार बहुत ज्यादा है। फिर भी इसे राजस्व के लिहाज से कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसकी मुख्य वजहें हैं सेबी के टोटल एक्सपेंस रेश्यो (टीईआर) स्लैब और कम रिटर्न देने वाला पैसिव सेगमेंट।

ब्रोकरेज ने कहा, ‘हालांकि, परिचालन दक्षता की मदद से राजस्व में आई कमी की कुछ हद तक भरपाई होने की संभावना है। इसलिए, मुनाफा एयूएम में बढ़ोतरी पर निर्भर करेगा।’

परिसंप​त्ति प्रबंधन परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए ऐ​क्सिस कैपिटल ने मार्केट इन्फ्रास्ट्रक्चर और यूटीलिटी कंपनियों पर कवरेज शुरू किया है और उन्हें स्पष्ट आय वाला ‘इनविजिबल इंजन’ बताया है। ऐ​क्सिस कैपिटल ने केफिन टेक्नॉलजीज को खरीदें रेटिंग देते हुए उसका कीमत लक्ष्य 1,200 रुपये रखा गया है।

First Published : April 16, 2026 | 10:07 PM IST