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Gold-Silver ETFs में ठंडा पड़ा निवेश: इक्विटी की ओर बढ़ा रुझान, निवेशक क्या करें?

Gold ETF में निवेश 57% घटकर ₹2,265 करोड़ रह गया, Silver ETF में लगातार दूसरे महीने निकासी

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अंशु   
Last Updated- April 10, 2026 | 7:21 PM IST

Gold and Silver ETFs: गोल्ड और सिल्वर एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETF) में मार्च 2026 के दौरान निवेशकों की दिलचस्पी कुछ कम होती दिखाई दी। एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, मार्च में गोल्ड ईटीएफ में निवेश मासिक आधार पर 57 फीसदी घटकर 2,265 करोड़ रुपये रह गया, जबकि फरवरी में यह 5,254 करोड़ रुपये था। वहीं, सिल्वर ईटीएफ में मार्च में लगातार दूसरे महीने निकासी देखने को मिली। AMFI के मुताबिक, मार्च में सिल्वर ईटीएफ से 683 करोड़ रुपये की निकासी हुई, जबकि फरवरी में यह आंकड़ा 826 करोड़ रुपये था। हालांकि बाजार में जारी अनिश्चितता के बीच निवेशकों की सोने को एक डायवर्सिफिकेशन टूल के रूप में पसंद बरकरार रही।

Gold-Silver ETFs में क्यों घटा निवेश?

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण भारत समेत वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, लेकिन इसके बावजूद निवेशकों का भरोसा एक बार फिर इक्विटी म्यूचुअल फंड्स की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। यही वजह है कि अब निवेशकों का पैसा धीरे-धीरे दोबारा इक्विटी बाजार की तरफ लौट रहा है।

इन्क्रेड मनी के सीईओ- एमएफ नितिन अग्रवाल कहते हैं, “गोल्ड ईटीएफ में निवेश में आई नरमी इक्विटी बाजार के प्रति नए सिरे से बढ़ते भरोसे का संकेत देती है। 40,450 करोड़ रुपये का इक्विटी नेट इनफ्लो निवेशकों की मजबूत खरीदारी (कन्विक्शन बायिंग) को दर्शाता है। भले ही पिछले महीनों में निवेश थोड़ा धीमा पड़ा था, लेकिन मार्च 2026 के आंकड़े यह भरोसा दिलाते हैं कि ज्यादा अनिश्चितता और उतार-चढ़ाव के दौर में भी पॉजिटिव फंड फ्लो जारी रह सकता है, जो निवेशकों की परिपक्वता को साफ तौर पर दिखाता है।”

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इक्विटी का वैल्यूएशन सोने से ज्यादा आकर्षक

सोने-चांदी की कीमतों में आई नरमी के बीच, सोने के मुकाबले इक्विटी का वैल्यूएशन निवेशकों को ज्यादा आकर्षक नजर आने लगा है। द वेल्थ कंपनी म्युचुअल फंड के CIO–डेट उमेश शर्मा ने कहा कि अन्य ETF कैटेगरी में मजबूत इनफ्लो देखने को मिला, जिसे मुख्य रूप से इक्विटी से जुड़े निवेशों का समर्थन मिला। इसके विपरीत, मार्च में गोल्ड ईटीएफ में निवेश घटकर लगभग 2,000 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले महीनों के स्तर से कम है। इसका कारण यह हो सकता है कि सोने की तुलना में इक्विटी का मूल्यांकन निवेशकों को ज्यादा आकर्षक लगने लगा है।

Gold-Silver ETFs का AUM घटा

गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ दोनों के AUM में गिरावट देखने को मिली। गोल्ड ईटीएफ का AUM करीब 6 फीसदी घटकर 1.71 लाख करोड़ रुपये रह गया। वहीं, सिल्वर ईटीएफ का AUM 13 फीसदी गिरकर 79,805 करोड़ पर आ गया।

पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग से अन्य ETF में तेजी

अन्य ETF कैटेगरी में मजबूत तेजी देखने को मिली, जहां मार्च में 19,802.41 करोड़ रुपये का निवेश आया, जो फरवरी के 4,487.15 करोड़ रुपये के मुकाबले काफी ज्यादा है। इसके अलावा, इंडेक्स फंड्स में भी निवेशकों की स्थिर भागीदारी बनी रही और इस दौरान 8,168.76 करोड़ रुपये का इनफ्लो दर्ज किया गया।

मिरे असेट में डिस्ट्रीब्यूशन एवं स्ट्रैटेजिक एलायंसेज की हेड सुरंजना बोरठाकुर बताती है कि तीन असाधारण महीनों के बाद गोल्ड ईटीएफ का निवेश घटकर 2,266 करोड़ रुपये रह गया, जबकि अन्य ETF ने मार्च में अब तक का सबसे बेहतर प्रदर्शन करते हुए 19,800 करोड़ रुपये का इनफ्लो दर्ज किया। इसमें संस्थागत निवेशकों द्वारा वित्त वर्ष के अंत में किए गए पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग का भी योगदान रहा।

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सोना-चांदी पर दबाव, वजहें कई

मार्च 2026 में सोना और चांदी दोनों पर जबरदस्त दबाव देखने को मिला, जिसके चलते उनकी कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। भारत में सोने की कीमत करीब 7 फीसदी गिरी, जबकि डॉलर के आधार पर यह गिरावट और गहरी होकर लगभग 11 फीसदी तक पहुंच गई। चांदी भी इसी दबाव से अछूती नहीं रही। टाटा म्युचुअल फंड की रिपोर्ट के अनुसार, यह गिरावट अचानक नहीं आई, बल्कि कई बड़े कारण एक साथ सामने आए, जिन्होंने बाजार की दिशा बदल दी।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के चलते जोखिम वाले एसेट्स में बिकवाली, मजबूत डॉलर और मार्जिन कॉल की जरूरत के कारण सोने की कीमतों पर दबाव बना रहा। हालांकि, रुपये में तेज गिरावट के कारण घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट अंतरराष्ट्रीय कीमतों के मुकाबले सीमित रही।

चांदी की कहानी थोड़ी अलग है, क्योंकि यह केवल निवेश का माध्यम ही नहीं बल्कि एक अहम इंडस्ट्रियल मेटल भी है। वैश्विक आर्थिक सुस्ती, सोलर इंस्टॉलेशन की धीमी रफ्तार और औद्योगिक मांग में कमी ने इसकी कीमतों पर दबाव डाला है। साथ ही, निवेशकों द्वारा अपनी पोजिशन घटाने से गिरावट और तेज हो गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, चांदी में उतार-चढ़ाव अपेक्षाकृत ज्यादा रह सकता है, क्योंकि इसकी कीमतें निवेश के साथ-साथ औद्योगिक गतिविधियों पर भी निर्भर करती हैं। हालांकि, ग्रीन एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य उद्योगों में इसकी लगातार जरूरत बनी रहती है, जो लंबी अवधि में इसकी मांग को सहारा दे सकती है।

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

टाटा म्युचुअल फंड की रिपोर्ट के अनुसार, मजबूत डॉलर, ऊंचे यील्ड, अमेरिका में ब्याज दरों में लंबा ठहराव और मिश्रित बाजार संकेतों के चलते शॉर्ट टर्म में सोने की कीमतें मौजूदा दायरे में ही रहने की संभावना है। इसमें लगभग 5 फीसदी तक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। हालांकि मध्यम से लंबी अवधि का नजरिया अभी भी पॉजिटिव बना हुआ है।

रिपोर्ट में कहा गया है, “निवेशक कीमतों में गिरावट आने पर धीरे-धीरे खरीदारी (एक्यूम्युलेशन) कर सकते हैं। हमारा मानना है कि लंबी अवधि के निवेश के तौर पर पोर्टफोलियो में सोने का एक रणनीतिक आवंटन फायदेमंद रहेगा।”

वहीं, चांदी में निवेश के लिए टाटा म्युचुअल फंड ने सलाह दी है कि इसकी ज्यादा उतार-चढ़ाव वाली प्रकृति को देखते हुए निवेशकों को मध्यम से लंबी अवधि के लिए इसमें एक बार में निवेश करने के बजाय धीरे-धीरे निवेश करना बेहतर है।

First Published : April 10, 2026 | 7:21 PM IST