म्युचुअल फंड

FY26 में डायरेक्ट म्युचुअल फंड प्लान्स का दबदबा, जुड़े 2.1 करोड़ नए फोलियो

एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस अंतर का एक कारण सोने और चांदी के एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) और फंड ऑफ फंड्स (FoFs) में निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी भी है

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अभिषेक कुमार   
Last Updated- April 09, 2026 | 7:44 PM IST

Direct vs Regular Plan: वित्त वर्ष 2025–26 में बाजार की उथल-पुथल के बावजूद म्युचुअल फंड की डायरेक्ट स्कीम्स ने एक बार फिर बाजी मार ली। इन DIY (खुद निवेश करने वाली) योजनाओं में निवेशकों का रुझान तेजी से बढ़ा और इन्होंने पारंपरिक रेगुलर स्कीम्स को पीछे छोड़ दिया। फरवरी तक के आंकड़ों के मुताबिक, डायरेक्ट प्लान्स में करीब 2.1 करोड़ नए फोलियो जुड़े, जबकि रेगुलर प्लान्स में यह संख्या लगभग 1.5 करोड़ रही।

डायरेक्ट प्लान्स ने दूसरी बार मारी बाजी

खास बात यह है कि यह सिर्फ दूसरी बार है जब सालाना फोलियो ग्रोथ के मामले में डायरेक्ट प्लान्स ने रेगुलर प्लान्स को पछाड़ा है। हालांकि, FY24 के पिछले उदाहरण के विपरीत, इस साल मजबूत वृद्धि ऐसे समय में देखने को मिली जब इसकी उम्मीद नहीं थी। आमतौर पर डायरेक्ट प्लान्स को अनुकूल बाजार स्थितियों में ज्यादा निवेशक मिलते हैं, जबकि उतार-चढ़ाव (volatility) के दौर में रेगुलर प्लान्स बेहतर प्रदर्शन करते रहे हैं।

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डायरेक्ट प्लान्स को गोल्ड-चांदी का सहारा

एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस अंतर का एक कारण सोने और चांदी के एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) और फंड ऑफ फंड्स (FoFs) में निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी भी है। FY26 की दूसरी छमाही में कीमती धातुओं (precious metals) की कीमतों में तेजी और बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण गोल्ड और सिल्वर फंड्स में निवेश और फोलियो में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई।

फोलियो में बढ़ोतरी को रिटेल निवेशकों के व्यवहार का बेहतर संकेतक माना जाता है, क्योंकि कुल निवेश बड़े संस्थागत निवेश के कारण प्रभावित हो सकते हैं।

डायरेक्ट प्लान्स में निवेश का बढ़ता रुझान

एक्सपर्टस और म्युचुअल फंड अधिकारियों के अनुसार, डायरेक्ट प्लान्स के फोलियो में अपेक्षाकृत तेज वृद्धि कोविड के बाद के रुझान को ही आगे बढ़ाती है। 2013 में शुरू किए गए डायरेक्ट प्लान्स ने लगातार ऊंची ग्रोथ दर्ज की है। हालांकि यह कम आधार (lower base) पर रही है।

उनके मुताबिक, व्यक्तिगत निवेशकों के बीच डायरेक्ट प्लान्स की बढ़ती लोकप्रियता का कारण फिनटेक प्लेटफॉर्म्स द्वारा निवेश को आसान बनाना और इनके कम लागत के प्रति बढ़ती जागरूकता है।

व्हाइटओक कैपिटल म्युचुअल फंड के सीईओ आशीष सोमैया कहते हैं, “मेरा मानना है कि डायरेक्ट प्लान्स के पक्ष में जो तेज वृद्धि हो रही है, उसका मुख्य कारण फिनटेक प्लेटफॉर्म्स की बढ़ती पहुंच है। AMFI का ‘MF सही है’ अभियान भी इसमें योगदान दे रहा है।

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रेगुलर प्लान की लागत पर बढ़ी नजर

वैल्यू रिसर्च के सीईओ धीरेंद्र कुमार ने कहा कि निवेशक अब रेगुलर प्लान्स की ज्यादा लागत के प्रति तेजी से जागरूक हो रहे हैं।

उन्होंने कहा, “निवेश प्लेटफॉर्म्स, सेबी की पारदर्शिता बढ़ाने की पहल और सच कहें तो इंटरनेट ने रेगुलर प्लान की लागत को उस तरह से दिखा दिया है जैसा पहले कभी नहीं दिखता था। जब एक निवेशक वह आंकड़ा देख लेता है, तो निर्णय अपने आप स्पष्ट हो जाता है। बाजार की अस्थिरता इस गणना को नहीं बदलती। बल्कि गिरता हुआ बाजार लागत के प्रति जागरूकता और बढ़ा देता है, क्योंकि जब रिटर्न कम होते हैं तो खर्च का हर बेसिस पॉइंट और ज्यादा भारी पड़ता है।”

उन्होंने यह भी कहा कि रेगुलर प्लान्स महंगे होते हैं क्योंकि उनमें डिस्ट्रीब्यूटर्स को कमीशन दिया जाता है।

फोलियो ग्रोथ में बाजार का असर

जहां डायरेक्ट प्लान्स में फोलियो (निवेश खातों) की वृद्धि दर रेगुलर प्लान्स की तुलना में तेज रही। वहीं, बाजार की अस्थिरता का असर कुल निवेशक जुड़ाव पर साफ दिखाई दिया। FY26 (फरवरी तक) में उद्योग ने 3.6 करोड़ व्यक्तिगत निवेशक फोलियो जोड़े, जबकि FY25 में यह संख्या 5.62 करोड़ थी।

First Published : April 9, 2026 | 7:44 PM IST