एक्सपर्ट मानते हैं कि FY27 में, एसेट एलोकेशन रिटर्न का मुख्य आधार होगा। फोटो एआई जेनरेटेड
Equity, Debt or Hybrid Funds: पश्चिम एशिया तनाव का असर भारतीय बाजारों पर भी देखने को मिल रहा है। शेयर बाजार से लेकर सोने-चांदी तक में अच्छा-खासा करेक्शन आ चुका है। ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध की शुरुआत (28 फरवरी) से अब तक बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स करीब 7.5 फीसदी, सोना 10 फीसदी, और चांदी 22 फीसदी तक टूट चुके हैं। इसका असर म्युचुअल फंड इंडस्ट्री के रिटर्न पर भी हुआ। हालांकि, म्युचुअल फंड इंडस्ट्री के ग्रोथ की बात करें, तो लगातार तीसरे वित्त वर्ष इंडस्ट्री की AUM (एसेट अंडर मैनेजमेंट) ग्रोथ 20 फीसदी से ज्यादा रही। एक्सपर्ट मानते हैं कि वित्त वर्ष 2027 में बेहतर रिटर्न के लिए एसेट अलोकेशन (इक्विटी, डेट या हाइब्रिड) काफी अहम होगा। साथ ही यह भी देखना होगा कि निवेशक किस तरह की निवेश स्ट्रैटेजी अपनाते हैं।
म्युचुअल फंड इंडस्ट्री ने लगातार तीसरे वित्त वर्ष में एसेट अंडर मैनजमेंट (AUM) में 20 फीसदी से ज्यादा की ग्रोथ दर्ज की। वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (Q4FY26) में इंडस्ट्री का एवरेज AUM 81.5 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 67 लाख करोड़ रुपये से 21 फीसदी ज्यादा है। जबकि, बेंचमार्क इंडेक्स FY26 के दौरान दबाव में रहे। निफ्टी 50 में 5.1 फीसदी की गिरावट आई, जबकि सेंसेक्स 7.1 फीसदी फिसला, जो महामारी प्रभावित FY20 के बाद उनका सबसे खराब प्रदर्शन रहा।
ऑप्टिमा मनी मैनेजर्स के एमडी पंकज मठपाल का कहना है कि नए वित्त वर्ष में इक्विटी, डेट या हाइब्रिड फंड्स में बेहतर च्वाइस की बात करें, तो मौजूदा उथल-पुथल भरे माहौल में हाइब्रिड फंड्स एक बैलेंस्ड च्वाइस है। निवेशकों को हाइब्रिड फंड में कम रिस्क के साथ अच्छा रिटर्न मिलने की संभावना रहती है।
मनीफ्रंट के को-फाउंडर एंड सीईओ मोहित गांग का कहना है, बाजार के उठापटक वाले माहौल में नए वित्त वर्ष के लिए हाइब्रिड और मल्टी एसेट अलोकेशन फंड बेस्ट च्वाइस हैं। साथ ही जियो-पॉलिटिकल हालातों को देखा जाए तो निवेशकों के लिए अलग-अलग फेज में गोल्ड फंड्स में निवेश करना भी एक अच्छा अलोकेशन हो सकता है।
उनका कहना है कि ऐसे निवेशक, जिनका लंबी अवधि तक निवेश बनाए रख सकते हैं और रिस्क उठाने की क्षमता है, उनके लिए मिड और स्मालकैप फंड्स को भी पोर्टफोलियो में शामिल करने का अच्छा समय है।
बीपीएन फिनकैप के डायरेक्टर एके निगम कहते हैं, जब भी हम इक्विटी, डेट या हाइब्रिड फंड्स में एक सेगमेंट चुनने की बात करते हैं, तो यह निवेशक की कैटेगरी पर निर्भर करता है। यानी, सलेक्शन की बजाय अलोकेशन पर फोकस करना जरूरी होता है।
उन्होंने कहा कि अगर आप अग्रेसिव निवेशक हैं, तो 70-80 फीसदी इक्विटी में निवेश कर सकते हैं। मॉडरेट निवेशक 50-65 फीसदी इक्विटी और शेष हाइब्रिड फंड्स के साथ जा सकते हैं। जबकि कंजर्वेटिव निवेशकों को 20-40 फीसदी ही इक्विटी में पैसा लगाना चाहिए और शेष रकम के लिए डेट या हाइब्रिड फंड्स को चुनना बेहतर होगा।
उनका कहना है, वित्त वर्ष 2027 में अर्निंग्स रिकवरी की उम्मीद है। ऐसे में लॉन्ग टर्म वेल्थ क्रिएशन के लिए इक्विटी फंड्स बेहतर विकल्प हो सकते हैं। वहीं, अगर स्थिरता के साथ आमदनी चाहिए, तो डेट फंड के साथ जाना अच्छा फैसला माना जाएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि अगर ब्याज दरें नरम होती हैं तो इसका फायदा होगा लेकिन मौजूदा समय में महंगाई बढ़ने का भी जोखिम बना हुआ है।
निगम कहते हैं, अगर बात करें हाइब्रिड फंड्स की, तो आज के समय में ये कैटेगरी काफी ट्रेंड में है। बाजारों में भारी उथल-पुथल के चलते इस कैटेगरी की ओर से निवेशकों को रुझान काफी तेजी से बढ़ा है। इसमें निवेशकों को इक्विटी के साथ-साथ डेट और गोल्ड में भी निवेश का मौका मिलता है। वहीं, मल्टी एसेट फंड्स कोर पोर्टफोलियो होल्डिंग्स का धीरे-धीरे हिस्सा बनते जा रहे हैं।
उनका कहना है, वित्त वर्ष 2027 में हाइब्रिड और मल्टी एसेट फंड्स निवेशकों की प्रीफर्ड कैटेगरी बनकर उभर सकते हैं क्योंकि निवेशक ग्लोबल अनिश्चितता में स्टैबिलिटी चाहते हैं।
मोहित गांग कहते हैं, वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत से जिस तरह की ग्लोबल अनिश्चितता देखने को मिल रही है, उसके देखते हुए निवेशकों को 40-60 फीसदी इक्विटी, 20 फीसदी हाइब्रिड या मल्टी एसेट अलोकेशन करना चाहिए। इसके अलावा 10-20 फीसदी इंटरनेशनल और 10-20 फीसदी गोल्ड फंड्स में निवेश करना चाहिए।
| एसेट क्लास | आवंटन सुझाव (%) |
|---|---|
| इक्विटी फंड्स | 40% – 60% |
| हाइब्रिड / मल्टी एसेट फंड्स | लगभग 20% |
| इंटरनेशनल फंड्स | 10% – 20% |
| गोल्ड फंड्स | 10% – 20% |
वहीं, पंकज मठपाल कहते हैं, दरअसल एसेट अलोकेशन निवेशक के निवेश लक्ष्यों, जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश की अवधि पर निर्भर करता है। अगर कोई 7 साल से ज्यादा की अवधि के लिए निवेश करना चाहता है तो कमोबेश 60% इक्विटी, 30% डेट और 10% गोल्ड हो सकता है। वहीं, अगर लक्ष्य शॉर्ट टर्म के लिए हो तो इक्विटी में निवेश कम कर दें।
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एके निगम कहते हैं, ग्लोबल उथल-पुथल की बात करें, तो कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और जियो-पॉलिटिकल टेंशन बना हुआ है। विदेशी निवेश (FIIs) बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, जिनका असर माकेट पर देखा जा रहा है। हालांकि इन चुनौतियों के बावजूद भारी की ग्रोथ करीब 7 फीसदी के आसपास बनी हुई है। उनका कहना है कि वित्त वर्ष 27 में, एसेट एलोकेशन (स्टॉक या फंड सलेक्शन नहीं) रिटर्न का मुख्य आधार होगा।
निगम का कहना है कि ग्लोबल अनिनिश्चितता और उथल-पुथल वाले माहौल में वित्त वर्ष 2027 के लिए एसेट अलोकेशन को चार तरह से करना चाहिए। इनमें कोर अलोकेशन, स्टैबिलिटी लेयर, डायवर्सिफायर और टेक्टिकल शामिल हैं। कोर अलोकेशन में 40-60% फीसदी आवंटन इक्विटी में कर सकते हैं। इनमें डायवर्सिफाइड फंड्स होने चाहिए।
उनका कहना है, स्टैबिलिटी के लिए 20-30 फीसदी आवंटन डेट कैटेगरी में करें। यह शॉर्ट ड्यूरेशन और डायनैमिक बॉन्ड हो सकते हैं। डायवर्सिफायर की बात करें, तो 10-15 फीसदी गोल्ड में बतौर कमोडिटी निवेश करें। गोल्ड में म्युचुअल फंड्स के जरिए न करें। वहीं, टेक्टिकल अलोकेशन में 10-20 फीसदी आवंटन मिड, स्मालकैप या सेक्टोरल फंड्स हो सकते हैं।
| कैटेगरी | अनुशंसित आवंटन (%) | कहां करें निवेश | क्यों चुनें |
|---|---|---|---|
| कोर अलोकेशन | 40% – 60% | इक्विटी (डायवर्सिफाइड फंड्स) | लंबी अवधि की ग्रोथ के लिए मुख्य हिस्सा |
| स्टैबिलिटी लेयर | 20% – 30% | डेट फंड्स (शॉर्ट ड्यूरेशन, डायनैमिक बॉन्ड) | पोर्टफोलियो में स्थिरता और कम जोखिम |
| डायवर्सिफायर | 10% – 15% | गोल्ड (कमोडिटी) | महंगाई और अनिश्चितता से बचाव, MF के जरिए नहीं |
| टैक्टिकल अलोकेशन | 10% – 20% | मिडकैप, स्मॉलकैप, सेक्टोरल फंड्स | अवसर आधारित उच्च रिटर्न के लिए |