म्युचुअल फंड

निकासी घटने से इक्विटी म्युचुअल फंड्स में निवेश 8% बढ़ा, SIP में मामूली गिरावट; Gold-ETF में भी आई कमजोरी

फरवरी में एसआईपी के माध्यम से प्राप्त रकम 29,845 करोड़ रुपये रही जो जनवरी की तुलना में 4 फीसदी कम है

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अभिषेक कुमार   
Last Updated- March 10, 2026 | 10:24 PM IST

फरवरी में म्युचुअल फंडों (एमएफ) की इक्विटी योजनाओं में शुद्ध निवेश में मामूली इजाफा हुआ। लेकिन कम दिन वाले महीने में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिये आने वाले निवेश में गिरावट आई। फरवरी में ऐक्टिव इक्विटी योजनाओं में लगभग 26,000 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। यह जनवरी की तुलना में 8 फीसदी ज्यादा है। यह बढ़ोतरी इसलिए हुई क्योंकि निवेश निकासी यानी रीडम्पशन में 13 फीसदी की गिरावट आई जिसने कुल निवेश में 5 फीसदी की कमी की भरपाई कर दी।

पिछले महीने निवेश में हुई वृद्धि का एक कारण एनएफओ के जरिये ज्यादा धन संग्रह को भी माना जा सकता है। एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) के आंकड़ों के अनुसार फरवरी में आठ इक्विटी एनएफओ ने 3,955 करोड़ रुपये जुटाए, जो जनवरी के 806 करोड़ रुपये के आंकड़े के मुकाबले चार गुना से भी ज्यादा है। अकेले एसबीआई क्वॉलिटी फंड एनएफओ ने 2,245 करोड़ रुपये जुटाए।

वृद्धि के बावजूद फरवरी में इक्विटी योजनाओं में कुल निवेश 2025 के मासिक औसत से कम रहा। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इक्विटी बाजारों में उतार-चढ़ाव और मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए निवेश का स्तर ठीक-ठाक बना हुआ है।

कोटक महिंद्रा एएमसी के खुदरा बिक्री प्रमुख ओवास बख्शी ने कहा, बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद इक्विटी निवेश मजबूत बना हुआ है, जो खुदरा निवेशकों के निरंतर भरोसे को दर्शाता है। फ्लेक्सीकैप, फोकस्ड फंड, मल्टीकैप फंड और लार्ज व मिडकैप फंड जैसी श्रेणियों में निवेश में कुछ कमी देखी गई, लेकिन निवेश ठीक-ठाक बना हुआ है और निवेशकों के मुख्य आवंटन का हिस्सा है। फ्लेक्सीकैप श्रेणी में सबसे अधिक 6,925 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। मिडकैप, स्मॉलकैप और लार्जकैप फंडों में भी मजबूत निवेश जारी है, जो वृद्धि वाले सेक्टरों के प्रति निवेशकों की निरंतर दिलचस्पी दर्शाता है।

फरवरी में एसआईपी के माध्यम से प्राप्त रकम 29,845 करोड़ रुपये रही जो जनवरी की तुलना में 4 फीसदी कम है। एम्फी के अनुसार यह गिरावट मुख्य रूप से कार्य दिवसों की संख्या में कमी के कारण हुई। साल के बाकी महीनों के मुकाबले छोटा महीना 27 तारीख को समाप्त हो गया क्योंकि 28 तारीख को शनिवार था।

एम्फी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वेंकट चलसानी ने कहा, हाल के महीनों की तुलना में मामूली नरमी मुख्य रूप से फरवरी के छोटे महीने होने के कारण है, जिसमें महीने के अंत में एसआईपी की कुछ किस्तें आमतौर पर मार्च की शुरुआत में प्रोसेस्ड होती हैं।
पिछले महीने निवेश के मामले में इक्विटी योजनाओं से आगे निकल चुके गोल्ड और सिल्वर के एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों (ईटीएफ) के शुद्ध निवेश में भारी गिरावट देखी गई।

गोल्ड ईटीएफ में शुद्ध निवेश जनवरी के 24,000 करोड़ रुपये से घटकर करीब 5,255 करोड़ रुपये रह गया जबकि सिल्वर ईटीएफ से इस महीने करीब 826 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी हुई। सोने और चांदी के फंड ऑफ फंड्स (एफओएफ) में निवेश में कमी के कारण फंड ऑफ फंड्स (एफओएफ) में भी शुद्ध निवेश में 70 फीसदी की गिरावट आई।

मिरे ऐसेट इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स (इंडिया) की वितरण और रणनीतिक गठबंधन प्रमुख सुरंजना बड़ठाकुर ने कहा, गोल्ड ईटीएफ और अन्य ईटीएफ में निवेश पिछले महीने की तुलना में काफी कम रहा, जो क्रमशः 5,200 करोड़ रुपये और 4,500 करोड़ रुपये था। हालांकि, कुल मिलाकर आंकड़े अच्छे हैं। यह गिरावट बढ़ते जोखिमों के बीच आई है और निवेशक कीमती धातुओं की तेजी की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

फरवरी में डेट, पैसिव और अन्य योजनाओं की श्रेणियों सहित शुद्ध निवेश 94,530 करोड़ रुपये रहा। इस निवेश और मार्क-टु-मार्केट लाभ के कारण फरवरी में उद्योग की कुल प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियों में 1.2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और ये बढ़कर 82 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गईं।

मंगलवार को परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों (एएमसी) के शेयरों में भारी उछाल आई। इसका मुख्य कारण निवेश में लगातार वृद्धि थी। आदित्य बिड़ला सन लाइफ एएमसी के शेयर 20 फीसदी तक बढ़कर 1,044 रुपये के 52 सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए।

अच्छा प्रदर्शन करने वाली प्रमुख कंपनियों में आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एएमसी और निप्पॉन लाइफ इंडिया ऐसेट मैनेजमेंट शामिल हैं, जिनमें करीब 6-6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। इसके अलावा श्रीराम एएमसी (7 फीसदी), यूटीआई एएमसी (5 फीसदी) और एचडीएफसी एएमसी (4 फीसदी) के शेयरों में भी तेजी दर्ज हुई।

First Published : March 10, 2026 | 10:01 PM IST