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सोने की चमक फीकी, इक्विटी में सावधानी: फरवरी में निवेशकों का मूड बदला, क्या संकेत दे रहे हैं आंकड़े?

जनवरी में जहां कमोडिटी में 51,483 करोड़ रुपये का निवेश आया था। वहीं, फरवरी में यह 89 फीसदी घटकर सिर्फ 5,774 करोड़ रुपये रह गया

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अंशु   
Last Updated- March 18, 2026 | 6:45 PM IST

फरवरी महीने में निवेशकों का रुख अचानक बदलता नजर आया। जहां जनवरी में कमोडिटी खासकर सोना-चांदी में जबरदस्त पैसा लग रहा था। वहीं, फरवरी आते-आते यह रफ्तार लगभग थम गई। Vallum Capital की मंथली मैक्रो ग्रिड चार्टबुक रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी में कुल निवेश 1.64 लाख करोड़ रुपये था। फरवरी में यह आधे से ज्यादा घटकर 73,842 करोड़ रुपये रह गया। यानी निवेश में करीब 55% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। मनी मार्केट में भी निवेश घटा। फिक्स्ड इनकम में लगातार पैसा निकलता रहा, जबकि इक्विटी में निवेश अपेक्षाकृत स्थिर बना रहा।

कमोडिटी निवेश में ₹45,708 करोड़ की भारी गिरावट

सबसे बड़ा झटका कमोडिटी सेगमेंट को लगा। जनवरी में जहां कमोडिटी में 51,483 करोड़ रुपये का निवेश आया था। वहीं, फरवरी में यह 89 फीसदी घटकर सिर्फ 5,774 करोड़ रुपये रह गया। इसकी सबसे बड़ी वजह रही सोने और चांदी की कीमतों में आई ठंडक। यह सभी एसेट क्लास में एक महीने में सबसे बड़ा रिवर्सल रहा। सोने और चांदी में तेजी का ट्रेंड कमजोर पड़ने से रिटेल निवेशकों की दिलचस्पी भी घट गई।

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मनी मार्केट में निवेश 45% घटा

मनी मार्केट में भी तेज गिरावट देखने को मिली। जनवरी में 77,722 करोड़ रुपये का निवेश आया था, जो फरवरी में 45 फीसदी घटकर 42,970 करोड़ रुपये रह गया। हालांकि एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह गिरावट असामान्य नहीं है, क्योंकि जनवरी में तिमाही के अंत (quarter-end) के कारण निवेश ज्यादा था। फरवरी में यह सामान्य स्तर पर आ गया, लेकिन फिर भी संस्थागत निवेशकों की कैश रखने की पसंद बनी हुई है।

इक्विटी में सावधानी से पैसा लगा रहे निवेशक

इक्विटी मार्केट की बात करें तो यहां गिरावट जरूर आई, लेकिन तस्वीर पूरी तरह कमजोर नहीं है। जनवरी के 52,110 करोड़ रुपये के मुकाबले फरवरी में 42,017 करोड़ रुपये का निवेश आया। यानी करीब 10,093 करोड़ रुपये (लगभग 19%) की कमी आई।

ब्रॉड मार्केट इक्विटी फंड्स में निवेश 30,359 करोड़ रुपये से घटकर 27,254 करोड़ रुपये रह गया। लार्ज-कैप फंड्स में भी निवेश घटकर 11,007 करोड़ रुपये से 9,316 करोड़ रुपये हो गया, लेकिन ये अब भी सबसे ज्यादा हिस्सेदारी रखते हैं।

मिड और स्मॉल-कैप फंड्स में निवेश बढ़ा

दिलचस्प बात यह है कि मिड-कैप और स्मॉल-कैप फंड्स में निवेश बढ़ा। मिड-कैप 3,297 करोड़ रुपये से बढ़कर 3,739 करोड़ रुपये और स्मॉल-कैप 2,536 करोड़ रुपये से बढ़कर 3,055 करोड़ रुपये हो गया। इससे पता चलता है कि निवेशक गिरावट में खरीदारी (buy on dips) कर रहे हैं। फ्लेक्सी-कैप फंड्स में निवेश घटकर 8,100 करोड़ रुपये से 6,046 करोड़ रुपये रह गया।

पिछले एक महीने में बाजार में औसतन 7.4 फीसदी की गिरावट आई, जिससे निवेशक थोड़े सतर्क हो गए।

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थीमैटिक और सेक्टोरल फंड्स में मिला-जुला रुख

थीमैटिक फंड्स में निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा है। इन फंड्स से निकासी बढ़कर 2,322 करोड़ रुपये से 4,372 करोड़ रुपये हो गई। इसी तरह पीएसयू फंड्स से भी निवेशक तेजी से पैसा निकाल रहे हैं, जहां निकासी 3,859 करोड़ रुपये से बढ़कर 5,389 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

हालांकि, हर जगह तस्वीर नकारात्मक नहीं है। टेक्नोलॉजी सेक्टर ने उलट रुख दिखाया है। पहले जहां यहां से पैसा निकल रहा था, अब निवेशक वापस लौटे हैं और 1,541 करोड़ रुपये का निवेश किया है। वो भी तब, जब इस सेक्टर का रिटर्न बीते महीने (-11.1%) कमजोर रहा।

इसी तरह बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर (BFSI) में भी सुधार देखने को मिला है। यहां भी पहले पैसा निकल रहा था, लेकिन अब स्थिति बदल गई है और इस सेक्टर में 828 करोड़ रुपये का निवेश आया है।

डायनेमिक स्ट्रैटेजी फंड्स में भी निवेश घटा

डायनेमिक स्ट्रैटेजी फंड्स में निवेश की रफ्तार धीमी पड़ गई है। जनवरी में जहां इनमें 19,804 करोड़ रुपये का निवेश आया था, वह फरवरी में घटकर 13,528 करोड़ रुपये रह गया।

मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड्स ने हालांकि मजबूती बनाए रखी और इनमें 9,060 करोड़ रुपये का निवेश आया, जिससे यह कैटेगरी निवेशकों के लिए एक स्थिर विकल्प बनी हुई है।

वहीं, आर्बिट्राज फंड्स में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली। इनमें निवेश 5,075 करोड़ रुपये से घटकर सिर्फ 535 करोड़ रुपये रह गया, जो इक्विटी कैटेगरी में मासिक आधार पर सबसे बड़ी गिरावट है।

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डेट फंड्स की स्थिति ज्यादा नहीं बदली

फिक्स्ड इनकम यानी डेट फंड्स से निवेशकों की निकासी जारी है। फरवरी में भी करीब 16,919 करोड़ रुपये बाहर निकले। हालांकि यह जनवरी के मुकाबले थोड़ा कम है। इस बीच एक अच्छी बात यह रही कि सरकारी बॉन्ड्स में स्थिति कुछ बेहतर हुई। यहां निकासी घटकर 1,850 करोड़ रुपये से 346 करोड़ रुपये रह गई। फिर भी कुल मिलाकर तस्वीर यही है कि डेट फंड्स से लगातार पैसा निकल रहा है और निवेशकों का भरोसा अभी पूरी तरह वापस नहीं लौटा है।

“कूलिंग ऑफ” का महीना रहा फरवरी

अगर पूरे डेटा को आसान भाषा में समझें, तो फरवरी का महीना “कूलिंग ऑफ” का रहा। जनवरी में जहां एक्सट्रीम मूवमेंट दिखा, फरवरी में वह सामान्य होने लगा। सोने की दीवानगी कम हुई, मनी मार्केट शांत हुआ और इक्विटी में निवेशकों ने थोड़ा सतर्क रुख अपनाया।

कुल मिलाकर, निवेशकों का फोकस अब बदल रहा है। वे सिर्फ रैली के पीछे नहीं भाग रहे, बल्कि सोच-समझकर सेक्टर चुन रहे हैं। खासकर मिडकैप, स्मॉलकैप और टेक्नोलॉजी में जो हलचल दिख रही है, वह आने वाले समय के लिए बड़े ट्रेंड का संकेत हो सकती है।

First Published : March 18, 2026 | 6:45 PM IST