बाजार में जारी अनिश्चितता और तेज उतार-चढ़ाव के बीच एक दिलचस्प तस्वीर उभरकर सामने आई है। DSP Mutual Fund की एक नई इनसाइट रिपोर्ट इस माहौल में इक्विटी पर दांव लगाने का एक अलग ही नजरिया पेश करती है। जहां निवेशकों के बीच डर और अस्थिरता का माहौल है, वहीं रिपोर्ट का मानना है कि यही समय चुनिंदा और सोच-समझकर इक्विटी में निवेश बढ़ाने का मौका भी बन सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, घबराहट के इस दौर में वैल्यूएशंस धीरे-धीरे आकर्षक स्तर पर आ रहे हैं। कंपनियों की बैलेंस शीट मजबूत बनी हुई है और लॉन्ग टर्म में बेहतर रिटर्न की संभावनाएं बन रही हैं। हालांकि, यह अवसर पूरे बाजार में समान रूप से नहीं है– कुछ सेक्टर निवेश के लिए बेहतर नजर आ रहे हैं, जबकि कुछ में अब भी सतर्क रहने की जरूरत है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अब इक्विटी को लेकर पहले जैसी सतर्क (कंजर्वेटिव) रणनीति छोड़ने का समय आ गया है। खासतौर पर लार्ज-कैप शेयरों में वैल्यूएशन, Nifty 50 के 22,500 के स्तर पर आने के साथ अब लंबे समय के औसत के करीब पहुंच गए हैं। बैंकिंग, आईटी, हेल्थकेयर, इंश्योरेंस, हाउसिंग फाइनेंस और कुछ FMCG कंपनियां (जो मिलकर बाजार पूंजीकरण (MCap) का आधे से ज्यादा हिस्सा बनाती हैं) फिलहाल अपने लॉन्ग टर्म वैल्यूएशन के बराबर या उससे नीचे ट्रेड कर रही हैं।
कई लार्ज-कैप कंपनियां 15% से 16% के रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) और 17 गुना से कम के वैल्यूएशन मल्टीपल पर उपलब्ध हैं। मौजूदा 10% से 12% की कमाई वृद्धि के बावजूद इनमें उचित आवंटन करना समझदारी हो सकती है। जब आय वृद्धि में तेजी आएगी, तो ये स्टॉक्स बॉन्ड्स की तुलना में बेहतर रिटर्न दे सकते हैं। ऐसे कई अवसर फिलहाल बाजार में मौजूद हैं।
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रिपोर्ट के मुताबिक, स्मॉल और मिडकैप (SMIDs) सेगमेंट में अभी सतर्क रुख अपनाना चाहिए। यहां निवेश SIP के जरिए और ऐसे फंड मैनेजर्स के साथ करना बेहतर है, जो वैल्यूएशन और क्वालिटी पर फोकस करते हैं।
रिपोर्ट में कई ऐसे संकेतों का जिक्र किया गया है जो मौजूदा गिरावट को निवेश का अवसर बताते हैं:
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रिपोर्ट के अनुसार, हालिया करेक्शन के बाद FMCG, IT, ऑटो, ऑयल एंड गैस और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे हाई-ROE सेक्टर्स में आंशिक रूप से आकर्षक वैल्यूएशन दिखने लगे हैं। ये सेक्टर लंबे समय से भारत के प्रीमियम वैल्यूएशन का आधार रहे हैं।
हालांकि, महामारी के बाद मेटल्स, माइनिंग और कंस्ट्रक्शन जैसे साइक्लिकल सेक्टर्स में तेज री-रेटिंग हुई है, जबकि उनकी लॉन्ग टर्म रिटर्न क्षमता कमजोर रही है। इसके विपरीत, हाई क्वालिटी वाले सेक्टर्स में ग्रोथ थोड़ी धीमी हुई है, जिससे वैल्यूएशन में गिरावट आई है– और यही निवेश के अवसर पैदा कर रही है।
रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि बाजार में गिरावट ने हाई क्वालिटी वाले स्टॉक्स में चुनिंदा अवसर पैदा किए हैं। हालांकि, कमजोर क्वालिटी वाले बिजनेस में हाई वैल्यूएशन व्यापक बाजार के लिए चुनौती बने हुए हैं। ऐसे माहौल में वैल्यू निवेशकों के लिए यह एक पॉजिटव सेटअप है, बशर्ते वे क्वालिटी और वैल्यूएशन पर फोकस बनाए रखें।