म्युचुअल फंड

हाइब्रिड म्युचुअल फंड्स में FY26 में ₹1.55 लाख करोड़ का निवेश, डायवर्स पोर्टफोलियो का बढ़ा क्रेज

AMFI के आंकड़ों के अनुसार, मार्च, 2026 तक हाइब्रिड फंड के फोलियो बढ़कर 1.9 करोड़ हो गए, जबकि एक साल पहले यह संख्या 1.56 करोड़ थी

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बीएस वेब टीम   
Last Updated- May 18, 2026 | 4:21 PM IST

Hybrid Mutual Fund: बाजार में जारी उतार-चढ़ाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों ने डायवर्स निवेश विकल्पों की ओर रुख किया है, जिसके चलते हाइब्रिड म्युचुअल फंड्स स्कीम्स में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 1.55 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 29 फीसदी ज्यादा है। हाइब्रिड म्युचुअल फंड एक साथ कई तरह के एसेट क्लास (शेयर, बॉन्ड, सोना-चांदी जैसी कमोडिटी आदि में) में निवेश करता है। इसका मकसद रिस्क और रिटर्न में संतुलन बनाना होता है।

फोलियो बढ़कर 1.9 करोड़, AUM भी बढ़ा

एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के आंकड़ों के अनुसार, मार्च, 2026 तक हाइब्रिड फंड के फोलियो बढ़कर 1.9 करोड़ हो गए, जबकि एक साल पहले यह संख्या 1.56 करोड़ थी। इस दौरान लगभग 34 लाख नए निवेशक खाते जुड़े। इस कैटेगरी का एसेट अंडर मैनजमेंट (AUM) भी बढ़कर 10.35 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो मार्च, 2025 में 8.83 लाख करोड़ रुपये था।

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डायवर्स पोर्टफोलियो का बढ़ा क्रेज

एडलवाइस म्युचुअल फंड की एमडी और सीईओ राधिका गुप्ता ने कहा, ”हाइब्रिड फंड्स ने मजबूत वृद्धि दर्ज की है क्योंकि निवेशक अस्थिर समय में संतुलित निवेश विकल्पों की तलाश कर रहे हैं।”

गुप्ता ने कहा, “AUM में वृद्धि यह दर्शाती है कि निवेशक डायवर्स पोर्टफोलियो और एसेट एलोकेशन आधारित निवेश को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं। हाइब्रिड फंड अब उन निवेशकों के लिए मुख्य विकल्प बनते जा रहे हैं जो अपेक्षाकृत कम जोखिम के साथ इक्विटी में भागीदारी चाहते हैं।

बाजार की अनिश्चितता और सोने की तेजी का फायदा

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों को लेकर चिंताओं, रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों जैसी वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण वित्त वर्ष 2026 के दौरान इक्विटी बाजारों में उतार-चढ़ाव बना रहा। इसी अवधि में सोने ने शॉर्ट-टर्म में इक्विटी से बेहतर प्रदर्शन किया, जिसका फायदा उन हाइब्रिड कैटेगरी को मिला जिनका निवेश इस कीमती धातु में था।

आनंद राठी वेल्थ लिमिटेड के ज्वाइंट सीईओ फिरोज अजीज ने कहा, “नतीजतन, कई हाइब्रिड फंड्स शॉर्ट-टर्म में शुद्ध इक्विटी फंड्स की तुलना में अपेक्षाकृत स्थिर और बेहतर रिस्क एडजेस्टेड रिटर्न देने में सफल रहे। इससे निवेशकों का हालिया झुकाव इस कैटेगरी की ओर बढ़ा है।”

उन्होंने आगे कहा कि अनिश्चित बाजार परिस्थितियों से निपटने के लिए निवेशकों ने डायवर्सिफाइड और एसेट एलोकेशन आधारित रणनीतियों को ज्यादा प्राथमिकता दी। इससे वित्त वर्ष 2026 के दौरान हाइब्रिड म्युचुअल फंड्स में मजबूत निवेश को और सहारा मिला।

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जोखिम से बचाव के लिए बढ़ा रुझान

अल्फा एएमसी के सीईओ और फंड मैनेजर राजेश सिंगला ने कहा कि हाइब्रिड फंड्स को लोकप्रियता इसलिए मिली क्योंकि वे डेट निवेश के जरिए गिरावट के जोखिम से सुरक्षा प्रदान करते हैं।

उन्होंने कहा, “वित्त वर्ष 2025 में AUM 1.2 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 1.55 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचना कोई संयोग नहीं था। यह दर्शाता है कि जब वैश्विक परिस्थितियां जटिल हो जाती हैं, तब निवेशक वही करते हैं जो उन्हें करना चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा कि जब भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली जाती है और इक्विटी बाजार एक ही सत्र में 2-3 फीसदी तक झूलने लगते हैं, तब शुद्ध इक्विटी फंड्स असहज महसूस होते हैं। हाइब्रिड फंड्स ऐसी सुविधा देते हैं जो शुद्ध इक्विटी फंड्स नहीं दे सकते।

सिंगला ने कहा कि मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड्स इस वृद्धि के प्रमुख कारक रहे, जबकि कम जोखिम और टैक्स एफिशिएंसी के कारण आर्बिट्राज फंड्स में भी उल्लेखनीय निवेश देखने को मिला

नए NFOs से ज्यादा पुराने फंड्स पर भरोसा

वित्त वर्ष 2026 के दौरान 17 हाइब्रिड न्यू फंड ऑफर (NFO) लॉन्च किए गए, जबकि पिछले वित्त वर्ष में इनकी संख्या 12 थी। हालांकि, इन NFOs के जरिए कुल निवेश घटकर करीब 4,106 करोड़ रुपये रह गया, जो वित्त वर्ष 2025 में लगभग 4,792 करोड़ रुपये था।

अजीज ने कहा, “यह दर्शाता है कि जहां एसेट मैनेजमेंट कंपनियां (AMC) नए ऑफर पेश करने में आक्रामक रहीं, वहीं निवेशकों ने बड़े पैमाने पर उन स्थापित हाइब्रिड फंड्स को प्राथमिकता दी जिनका प्रदर्शन रिकॉर्ड पहले से मजबूत रहा है, बजाय नई लॉन्च हुई योजनाओं के।”

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चालू वित्त वर्ष के आउटलुक पर गुप्ता ने कहा कि निवेशकों की रुचि मजबूत बने रहने की संभावना है। उन्होंने कहा, “आर्बिट्राज, इक्विटी सेविंग्स, बैलेंस्ड एडवांटेज, एग्रेसिव हाइब्रिड और मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड्स जैसी कैटेगरी मौजूदा समय जैसे अस्थिर बाजार माहौल के लिए बेहतर हैं। इसलिए हाइब्रिड फंड्स का आउटलुक पॉजिटिव बना हुआ है।”

(PTI इनपुट के साथ)

First Published : May 18, 2026 | 4:21 PM IST