घरेलू म्युचुअल फंड्स (MFs) ने मार्च में ब्लू-चिप बैंकिंग शेयरों पर जोरदार दांव लगाया, ठीक उसी समय जब विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs) रिकॉर्ड स्तर पर बिकवाली कर रहे थे। नुवामा अल्टरनेटिव एंड क्वांटिटेटिव रिसर्च के विश्लेषण के मुताबिक, इस दौरान MFs की टॉप पांच खरीदारी पूरी तरह बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में रही।
MFs ने इन शेयरों में कुल मिलाकर 34,800 करोड़ रुपये का निवेश किया, जिसमें सबसे ज्यादा 15,800 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीद HDFC Bank में की गई। इसके बाद 6,800 करोड़ रुपये का निवेश ICICI Bank में हुआ।
यह खरीदारी ऐसे समय में हुई जब FPIs ने फाइनैंशियल शेयरों से करीब 60,000 करोड़ रुपये की निकासी की, जो पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण बने व्यापक जोखिम-से-बचाव (risk-off) माहौल का परिणाम था।
| Bank | Net Inflows (₹ Cr) |
|---|---|
| HDFC Bank | 15,800 |
| ICICI Bank | 6,800 |
| SBI | 4,800 |
| Kotak Bank | 3,800 |
| Axis Bank | 3,600 |
| Total | 34,800 |
Source: Nuvama Alternative & Quantitative Research
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कुल मिलाकर, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने मार्च में 1.12 लाख करोड़ रुपये के इक्विटी शेयर बेचे, जो अब तक का उनका सबसे बड़ा मंथली आउटफ्लो है। इसके विपरीत, घरेलू म्युचुअल फंड्स (MFs) ने इक्विटी बाजार में लगभग 90,000 करोड़ रुपये का निवेश किया, जो उनकी अब तक की दूसरी सबसे बड़ी मासिक खरीदारी रही।
बैंकों के अलावा, श्रीराम फाइनेंस, रिलायंस इंडस्ट्रीज, इंफोसिस और लार्सन एंड टुब्रो जैसे शेयरों को भी सबसे ज्यादा खरीदा गया। वहीं, म्युचुअल फंड्स ने पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, ग्रासिम इंडस्ट्रीज और अपोलो हॉस्पिटल्स में अपने निवेश में कटौती की।
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बेंचमार्क निफ्टी इस दौरान 11 फीसदी गिर गया, जो पिछले छह साल में इसकी सबसे बड़ी गिरावट रही। वहीं बैंक निफ्टी (Bank Nifty) ने 17 फीसदी की गिरावट के साथ और खराब प्रदर्शन किया। हालांकि, इस महीने अब तक बैंक निफ्टी इंडेक्स 10 फीसदी से ज्यादा की रिकवरी कर चुका है।
इक्विटी-ओरिएंटेड म्युचुअल फंड्स में मार्च के दौरान नए निवेश में तेज उछाल देखा गया, जहां शुद्ध निवेश बढ़कर 40,450 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो आठ महीने का उच्चतम स्तर है।