म्युचुअल फंड

Flexi Cap Funds में तेजी से आ रहा पैसा, कहीं आप भी कर तो नहीं रहे ये गलती?

खुदरा निवेशकों को केवल इस कैटेगरी के हालिया प्रदर्शन को देखकर इसमें निवेश करने से बचना चाहिए। असली सवाल यह है कि क्या यह उनके निवेश लक्ष्यों और जरूरतों के अनुसार बेहतर है

Published by
संजय कुमार सिंह   
कार्तिक जेरोम   
Last Updated- April 16, 2026 | 4:54 PM IST

Flexi Cap Funds: फ्लेक्सी कैप फंड्स में मार्च 2026 में 10,054.12 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया, जो पिछले 12 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। लेकिन खुदरा निवेशकों को केवल इस कैटेगरी के हालिया प्रदर्शन को देखकर इसमें निवेश करने से बचना चाहिए। असली सवाल यह है कि क्या यह उनके निवेश लक्ष्यों और जरूरतों के अनुसार बेहतर है।

Flexi Cap Funds में हाई इनफ्लो की वजह

मार्च में निवेश बढ़ने के पीछे कई कारण रहे। एसबीआई म्युचुअल फंड के ज्वाइंट सीईओ डी. पी. सिंह के अनुसार, “अन्य कैटेगरी की तुलना में इसके अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन ने इनफ्लो को बढ़ावा दिया।” वे आगे कहते हैं कि इस कैटेगरी में सबसे बड़ा सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) पोर्टफोलियो है।

पराग पारिख म्युचुअल फंड के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट और फंड मैनेजर राज मेहता कहते हैं, “ऐसा लगता है कि कई खुदरा निवेशकों ने खरीद लागत को औसत करने के लिए गिरावट के समय खरीदारी की है।”

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इन्हें लोकप्रिय क्या बनाता है?

इस कैटेगरी की लोकप्रियता इस बात पर आधारित है कि यह फंड मैनेजर्स को अलग-अलग मार्केट कैप में निवेश करने की अनुमति देता है। सिंह के अनुसार, “यह स्ट्रक्चर फंड मैनेजर्स को एक मार्केट कैप से दूसरे में शिफ्ट करने की ज्यादा आजादी देता है, जिससे फ्लेक्सी कैप फंड्स डायवर्सिफाइड फंड्स की दुनिया में खास तौर पर ज्यादा डायनेमिक बन जाते हैं।”

निवेशकों को यह तय करने की जरूरत नहीं होती कि कब किस मार्केट कैप से बाहर निकलना है या उसमें कदम रखना है। मेहता के अनुसार, “यह निर्णय फंड मैनेजर उनकी ओर से लेते हैं। साथ ही, निवेशकों को एक ही फंड के जरिए सभी मार्केट कैप में एक्सपोजर मिल जाता है।”

किसे करना चाहिए निवेश?

फ्लेक्सी कैप फंड्स उन निवेशकों के लिए बेहतर विकल्प हैं जो खुद से मार्केट कैप से जुड़े फैसले नहीं लेना चाहते। जो निवेशक अलग-अलग मार्केट कैप में फैला हुआ पोर्टफोलियो बनाकर उसे समय-समय पर रीबैलेंस नहीं कर सकते, वे भी इन फंड्स का उपयोग कर सकते हैं।

पहली बार इक्विटी म्युचुअल फंड में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए फ्लेक्सी कैप फंड एक मुख्य निवेश विकल्प होना चाहिए या नहीं, यह उनकी निवेश रणनीति पर निर्भर करता है। सिंह के अनुसार, “जो निवेशक फिक्स्ड डिपॉजिट या बॉन्ड जैसे निश्चित रिटर्न वाले इंस्ट्रूमेंट से म्युचुअल फंड्स में आ रहे हैं, उनके लिए शुरुआत में मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड्स या बैलेंस्ड एडवांटेज फंड्स बेहतर हो सकते हैं। वहीं जो निवेशक पहले से सीधे इक्विटी में निवेश कर रहे हैं, वे फ्लेक्सी कैप, मल्टीकैप या लार्ज एंड मिडकैप फंड चुन सकते हैं।”

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फंड मैनेजर पर ज्यादा निर्भरता

इस कैटेगरी की मुख्य कमी यह है कि यह काफी हद तक फंड मैनेजर के निर्णयों पर निर्भर करती है। सेबी-रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार और SahajMoney.com के फाउंडर अभिषेक कुमार के अनुसार, “निवेशक फंड मैनेजर के एसेट एलोकेशन और टाइमिंग के फैसलों पर काफी भरोसा करते हैं। अगर ये फैसले गलत साबित होते हैं, तो लंबे समय तक कमजोर प्रदर्शन देखने को मिल सकता है।”

जो निवेशक अलग-अलग मार्केट कैप में निश्चित (फिक्स्ड) आवंटन चाहते हैं, उन्हें यह कैटेगरी बेहतर नहीं लग सकती।

इन बातों का रखें ध्यान

फ्लेक्सी कैप फंड चुनते समय निवेशकों को शॉर्ट-टर्म रिटर्न से आगे देखने की जरूरत होती है। मीरा मनी के हेड ऑफ इन्वेस्टमेंट रिसर्च और फाउंडिंग मेंबर मोहित बागड़ी के अनुसार, “निवेशकों को अलग-अलग मार्केट साइकिल में फंड मैनेजर के प्रदर्शन को ज्यादा महत्व देना चाहिए। रिटर्न की स्थिरता, गिरावट के दौरान सुरक्षा (डाउनसाइड प्रोटेक्शन) और रिस्क-एडजेस्टेड रिटर्न, एब्सोल्यूट रिटर्न से कहीं ज्यादा मायने रखते हैं।”

निवेशकों को यह समझना चाहिए कि ग्रोथ की तलाश में फंड मैनेजर मिडकैप और स्मॉलकैप में निवेश के जरिए कितना जोखिम ले रहा है। बागड़ी के अनुसार, “निवेशकों को पोर्टफोलियो की एकाग्रता (कंसंट्रेशन) और सेक्टर व स्टॉक एक्सपोजर की भी समीक्षा करनी चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि लचीलापन का इस्तेमाल जरूरत से ज्यादा जोखिम लेने के लिए तो नहीं किया जा रहा है।”

मार्केट साइकिल के विभिन्न चरणों में फंड मैनेजर के एसेट एलोकेशन फैसलों का मूल्यांकन करना चाहिए। बागड़ी कहते हैं, “यदि एलोकेशन में बदलाव स्थिर और सोच-समझकर किया गया हो, तो यह पॉजिटिव संकेत है। लेकिन अगर एलोकेशन बहुत बार और बिना किसी स्पष्ट पैटर्न के बदलता है, तो फैसले किसी ठोस निवेश ढांचे के बजाय परिस्थितियों के आधार पर लिए जा रहे हो सकते हैं।”

फंड का बड़ा आकार अपने आप में खराब नहीं होता। बागड़ी के अनुसार, “असल सवाल यह है कि क्या फंड अपने बड़े आकार के बावजूद अपनी रणनीति को प्रभावी ढंग से लागू कर पा रहा है या नहीं।”

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इन गलतियों से बचें

कई निवेशक हालिया प्रदर्शन पर जरूरत से ज्यादा भरोसा कर लेते हैं, बिना यह समझे कि ये रिटर्न कहीं अस्थायी और जोखिम भरे स्मॉलकैप झुकाव (बायस) की वजह से तो नहीं आए। कुमार के अनुसार, “कई निवेशक पोर्टफोलियो ओवरलैप को भी नजरअंदाज कर देते हैं और उन शेयरों में दोबारा निवेश कर बैठते हैं, जिनमें वे पहले से ही अलग-अलग मार्केट कैप फंड्स के जरिए निवेश कर चुके होते हैं।”

First Published : April 16, 2026 | 4:54 PM IST