प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
भारत के फाइनैंशियल बाजारों में इक्विटी सेगमेंट में रिकवरी के शुरुआती संकेत दिखने लगे हैं। हालांकि कुल फंड फ्लो अब भी दबाव में बने हुए हैं। वैलम कैपिटल की ताजा मंथली मैक्रो रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2026 के दौरान विभिन्न एसेट क्लासेस के प्रदर्शन में साफ अंतर देखने को मिला। एक ओर इक्विटी बाजारों में लगातार निवेश (इनफ्लो) बना रहा, वहीं मनी मार्केट और फिक्स्ड इनकम सेगमेंट में भारी निकासी (आउटफ्लो) दर्ज की गई। दूसरी तरफ, कमोडिटीज में निवेश पॉजिटिव तो रहा, लेकिन इसकी रफ्तार धीमी रही। इससे संकेत मिलता है कि कीमती धातुओं में तेजी स्थिर पड़ने के साथ निवेशकों की दिलचस्पी कुछ कम होती दिख रही है।
मार्च महीने में कुल नेट एसेट-लेवल फ्लो में तेज गिरावट देखने को मिली और यह निगेटिव हो गया। फरवरी में जहां 73,589 करोड़ रुपये का इनफ्लो था, वहीं मार्च में यह बदलकर करीब 2.2 लाख करोड़ रुपये के बड़े आउटफ्लो में तब्दील हो गया।
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स रहे, जहां लगभग 1.95 लाख करोड़ रुपये की भारी निकासी दर्ज की गई। इसके अलावा फिक्स्ड इनकम फंड्स में भी लगातार आउटफ्लो बढ़ा, जो यह दर्शाता है कि निवेशक ब्याज दरों को लेकर सतर्क हैं और रिडेम्प्शन का दबाव बना हुआ है।
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इसके विपरीत, इक्विटी बाजारों में निवेशकों की रुचि बनी रही। मार्च में इक्विटी में नेट इनफ्लो बढ़कर 46,501 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले महीने के मुकाबले 11% ज्यादा है।
भारतीय शेयर बाजारों ने एक महीने में मजबूत रिकवरी भी दर्ज की, जहां स्मॉल-कैप शेयरों में 8.1%, मिड-कैप में 6.9% और लार्ज-कैप में 4.8% की बढ़त देखी गई। हालांकि, साल-दर-साल (YTD) आधार पर तस्वीर अब भी कमजोर है। लार्ज-कैप में 6.2% और स्मॉल-कैप में 3.0% की गिरावट बनी हुई है, जो 2025 के करेक्शन की गंभीरता को दर्शाती है। कुल मिलाकर, रिकवरी शुरू तो हो गई है, लेकिन अभी अधूरी है।
फंड फ्लो निवेशकों के रुझान की साफ तस्वीर पेश करते हैं। पैसा अब अपेक्षाकृत सुरक्षित और स्थिर विकल्पों की ओर बढ़ रहा है। मार्च में लार्ज-कैप फंड्स में 28,558 करोड़ रुपये का मजबूत इनफ्लो दर्ज हुआ, जो फरवरी की तुलना में 19,242 करोड़ रुपये ज्यादा है। वहीं फ्लेक्सी-कैप और मिड-कैप फंड्स में भी निवेश का सिलसिला बना रहा।
इसके उलट, आर्बिट्राज फंड्स से 22,182 करोड़ रुपये की बड़ी निकासी हुई, जो तेज रिवर्सल को दर्शाती है। जबकि डायनामिक स्ट्रैटेजीज से भी लगातार पूंजी बाहर निकलती रही। कुल मिलाकर, निवेशक इक्विटी बाजार में बने तो हुए हैं, लेकिन अब उनका झुकाव ज्यादा भरोसेमंद और सरल निवेश विकल्पों की ओर है।
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रिपोर्ट के अनुसार, इक्विटी बाजार के भीतर सेक्टोरल रोटेशन साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (PSU) और कंजंप्शन से जुड़े फंड्स से निवेश बाहर निकल रहा है जबकि मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, डिफेंस और फार्मा सेक्टर्स में पूंजी का फ्लो बढ़ रहा है। यह बदलाव दर्शाता है कि 2026 के लिए निवेशक घरेलू कैपेक्स आधारित ग्रोथ और हेल्थकेयर थीम पर ज्यादा भरोसा जता रहे हैं।
इस साल कीमती धातुएं टॉप परफॉर्मर बनकर उभरी हैं। गोल्ड और सिल्वर ने साल-दर-साल (YTD) आधार पर करीब 16% का रिटर्न दिया है, जो सभी इक्विटी कैटेगरी से बेहतर है। यह ट्रेंड दिखाता है कि वैश्विक अनिश्चितता के बीच निवेशकों की दिलचस्पी सुरक्षित निवेश विकल्पों (safe-haven assets) में बनी हुई है।
वैश्विक स्तर पर बाजारों में अमेरिका से बाहर निकलने का ट्रेंड दिख रहा है, जिसकी वजह कमजोर होता डॉलर है। ब्राजील, पोलैंड, साउथ कोरिया और ताइवान जैसे उभरते बाजारों ने हाल के महीनों में मजबूत रिटर्न दिए हैं और भारत से बेहतर प्रदर्शन किया है।
हालांकि, इस वैश्विक रैली में भारत की हिस्सेदारी सीमित रही है। भारत से जुड़े ETF में शॉर्ट-टर्म में कुछ बढ़त जरूर दिखी है, लेकिन एक साल के नजरिए से देखें तो प्रदर्शन अब भी पीछे बना हुआ है।
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वैश्विक निवेश थीम में सेमीकंडक्टर और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर सबसे बड़े विजेता बनकर उभरे हैं। Invesco Semiconductors और First Trust Nasdaq Semiconductor ETF ने सिर्फ एक महीने में 22–23% का रिटर्न दिया। वहीं, साउथ कोरिया के AI Power Infrastructure ETF में 22.4% की तेज बढ़त देखी गई। दूसरी ओर, साइबर सिक्योरिटी और चीनी टेक सेक्टर का प्रदर्शन कमजोर रहा।
रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही इक्विटी बाजारों में रिकवरी के संकेत दिख रहे हों, लेकिन निवेशकों का भरोसा अभी पूरी तरह मजबूत नहीं हुआ है। फंड फ्लो से साफ है कि निवेशक अभी भी क्वालिटी और कम उतार-चढ़ाव वाली रणनीतियों को तरजीह दे रहे हैं। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में सुधार के बावजूद सतर्क रुख बना हुआ है।