प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
शेयर बाजार में भले ही उठापटक चल रही हो मगर घरेलू म्युचुअल फंडों (एमएफ) ने मार्च में शेयरों में अपने निवेश में खासा इजाफा किया है। कोविड महामारी के बाद से हुई सबसे बड़ी बिकवाली से शेयर भाव कम होने का फायदा उठाते हुए म्युचुअल फंडों ने खूब दांव लगाया।
मार्च में म्युचुअल फंडों का शेयरों में कुल निवेश (30 मार्च तक के अंतरिम आंकड़े) बढ़कर 1 लाख करोड़ के पार पहुंच गया। बाजार में आई गिरावट और इक्विटी योजनाओं में नए निवेश के बढ़ने से एमएफ को शेयरों में निवेश बढ़ाने में मदद मिली। इस खरीदारी ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की 1.23 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली के असर को कुछ हद कम कम करने में भी मदद की। विदेशी निवेशकों ने मार्च में अब तक की सबसे बड़ी मासिक बिकवाली थी, जिसने अक्टूबर 2024 में की गई 92,000 करोड़ रुपये की बिकवाली को भी पीछे छोड़ दिया।
मार्च में निफ्टी में 11 फीसदी की गिरावट आई जो मार्च 2020 में कोविड महामारी के समय आई भारी गिरावट के बाद से सूचकांक की सबसे बड़ी मासिक गिरावट थी। पिछले महीने हुई जोरदार खरीदारी से वित्त वर्ष 2026 में म्युचुअल फंडों का शेयरों में कुल निवेश बढ़कर 5 लाख करोड़ के पार पहुंचा गया जो वित्त वर्ष 2025 के पिछले उच्चतम स्तर 4.7 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है।
मोतीलाल ओसवाल ऐसेट मैनेजमेंट के कार्यकारी निदेशक और मुख्य बिज़नेस अधिकारी अखिल चतुर्वेदी ने कहा, ‘पिछली दो तिमाहियों में मार्च सबसे मजबूत महीनों में से रहा जिसमें इक्विटी योजनाओं में सकल और शुद्ध, दोनों तरह के निवेश में काफी बढ़ोतरी देखने को मिली। इसकी मुख्य वजह एकमुश्त निवेश में आया सुधार है क्योंकि निवेशकों ने बाजार में आई गिरावट के दौरान अपने पास मौजूद पैसों को निवेश किया और साथ ही एमएफ योजनाओं से पैसे निकालने की रफ्तार भी धीमी हुई।’
नए निवेश के अलावा हाइब्रिड फंड में इक्विटी आवंटन में बदलाव और इक्विटी योजनाओं में नकद होल्डिंग से भी एमएफ का इक्विटी में निवश बढ़ा। हाइब्रिड फंडों का शेयरों में निवेश पिछले एक साल से बढ़ रहा है और मार्च में भी इसमें तेजी के असार हैं।
म्युचुअल फंड शेयर बाजार में बड़ी ताकत के तौर पर उभर रहे हैं जिसकी वजह है उनकी बढ़ती पहुंच और सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) में बढ़ता निवेश। उनका यह उभार ऐसे समय में हुआ है जब विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं। मार्च में एमएफ ने बाजार में महत्त्वपूर्ण संतुलनकारी भूमिका निभाई और एफपीआई की 1.2 लाख करोड़ रुपये की भारी बिकवाली के असर की अपनी लिवाली से काफी हद तक भरपाई की।
यूनियन एमएफ में सीईओ मधु नायर ने कहा, ‘एमएफ के बढ़ते दायरे की वजह वित्तीय जागरूकता, डिजिटलीकरण और प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी है, जिससे धीरे-धीरे परिवारों की बचत वित्तीय संपत्तियों में निवेश की जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में शेयर बाजार के लगातार अच्छे प्रदर्शन ने इस बदलाव को और तेज कर दिया है जिससे ज्यादा निवेशक म्युचुअल फंड का रुख कर रहे हैं।’
उन्होंने कहा कि म्युचुअल फंडों में निवेशकों की बढ़ती भागीदारी से घरेलू शेयर बाजार को स्थिरता मिल रही है। हालांकि वित्त वर्ष 2026 में शेयर में एमएफ के निवेश की गति कुछ धीमी पड़ गई। फरवरी तक निवेश लगभग 3 लाख करोड़ रुपये रहा जो वित्त वर्ष 2025 के कुल आंकड़े से लगभग 27 फीसदी कम था। कमोडिटी और हाइब्रिड फंड में आए निवेश ने इक्विटी योजनाओं में आई सुस्ती की भरपाई करने में मदद की।
मार्च महीने के एमएफ निवेश का आंकड़ा और शेयरों की कुल शुद्ध खरीद के अंतिम आंकड़े अगले हफ्ते आने की उम्मीद है। अंतिम आंकड़ों में बदलाव हो सकता है क्योंकि सेबी और एक्सचेंज, दोनों के आंकड़े संशोधित हो सकते हैं।