म्युचुअल फंड

Navi MF का यू-टर्न: पैसिव के बाद अब ऐक्टिव इक्विटी फंड्स पर दांव, क्या बदलेगी निवेश की रणनीति?

नवी म्युचुअल फंड अब कम लागत वाली पैसिव योजनाओं के बजाय ऐक्टिव इक्विटी फंड्स पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, ताकि निवेशकों को बेहतर अल्फा और रिटर्न मिल सके

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अभिषेक कुमार   
Last Updated- March 31, 2026 | 10:07 PM IST

म्युचुअल फंड उद्योग में कदम रखने के करीब 5 साल बाद नवी म्युचुअल फंड अब ऐक्टिव इक्विटी के क्षेत्र में अपनी भूमिका बढ़ा रहा है। इसके लिए वह कम लागत वाली पैसिव योजनाओं पर ध्यान देने की पुरानी रणनीति से हट रहा है। फ़ंड हाउस के सीईओ आदित्य मल्की के अनुसार हाल के वर्षों में फंड हाउस ने अपनी फंड प्रबंधन क्षमताओं का विस्तार किया है और अपनी ऐक्टिव योजनाओं के प्रदर्शन को बेहतर बनाने पर काम किया है। इस कारण इस सेगमेंट में पहुंच बढ़ाने की उसकी बुनियाद तैयार हो गई है।

2021 की शुरुआत में एस्सेल एमएफ के अधिग्रहण के जरिये इस उद्योग में कदम रखने वाला नवी एमएफ अभी सिर्फ दो ऐक्टिव इक्विटी योजनाएं चलाता है – नवी फ्लेक्सीकैप फंड और नवी लार्ज ऐंड मिडकैप फंड। ये दोनों ही अधिग्रहण के समय एस्सेल फंड के पोर्टफोलियो का हिस्सा थीं। 

पिछले 5 वर्षों में फंड हाउस ने अपना पूरा ध्यान लगभग पूरी तरह अपनी पैसिव योजना की श्रृंखला तैयार करने पर केंद्रित किया है, जिसके तहत उसने नवी निफ्टी 50 इंडेक्स फंड, नवी निफ्टी नेक्स्ट 50 इंडेक्स फंड, नवी निफ्टी बैंक इंडेक्स फंड और नवी निफ्टी मिडकैप 150 इंडेक्स फंड जैसी कई योजनाएं शुरू की हैं।

उसकी प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियों में ज़्यादातर हिस्सा पैसिव योजनाओं का है। उसकी सबसे बड़ी योजना अभी निफ्टी 50 इंडेक्स फंड है, जिसकी एयूएम करीब 3,936 करोड़ रुपये है। फंड हाउस की कुल एयूएम अधिग्रहण के समय के लगभग 700 करोड़ रुपये थी जो फरवरी 2026 तक बढ़कर लगभग 9,200 करोड़ रुपये हो गई है।

कोविड के बाद के दौर में जहां पैसिव फंडों में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिली है, वहीं ऐक्टिव योजनाओं में ज्यादातर पैसा आ रहा है। निवेशक हर श्रेणी में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले फंडों को ही ज्यादा पसंद कर रहे हैं। इसके अलावा, ऐक्टिव फंडों का वितरण चैनल पर भी दबदबा है, क्योंकि इनमें कमीशन ज्यादा मिलता है, जिससे ये बिचौलियों के लिए ज्यादा आकर्षक बन जाते हैं।

मल्की के अनुसार, ऐक्टिव बिजनेस फिर से शुरू करने का फैसला एक तरह का स्वाभाविक विस्तार है। उन्होंने कहा, अलग-अलग निवेशकों की जरूरतें अलग-अलग होती हैं। जहां कुछ लोग पैसिव फंड के जरिये कम लागत वाले बीटा को पसंद करते हैं, वहीं दूसरे लोग अल्फा के मौकों की तलाश में रहते हैं। हमारी भूमिका दोनों को पेश करना है, न कि किसी एक को दूसरे पर तरजीह देना।

सीईओ ने कहा कि फंड हाउस इक्विटी फंडों के इस भीड़-भाड़ और बहु प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में सबसे अलग दिखने के लिए ज्यादा जोखिम वाला रास्ता अपनाएगा। 

First Published : March 31, 2026 | 10:07 PM IST