प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
पिछले दो सालों से शेयर बाजार में बार-बार हो रही उठापटक का असर अब म्युचुअल फंडों (एमएफ) की वृद्धि पर पड़ने लगा है। फंडों में नए निवेशकों के जुड़ने की रफ्तार पिछले तीन महीनों से लगातार घट रही थी और अब अप्रैल में यह तीन साल के सबसे निचले स्तर पर चली गई। इस महीने उद्योग में करीब 2,95,000 नए निवेशक जुड़े। यह जून 2023 के बाद सबसे कम है।
अप्रैल में पहली बार म्युचुअल फंडों में निवेश करने वाले निवेशकों की संख्या मार्च के 4,71,000 के मुकाबले 37 फीसदी कम रही। फरवरी में करीब 763,600 निवेशकों ने म्युचुअल फंडों में निवेश शुरू किया था। मोतीलाल ओसवाल ऐसेट मैनेजमेंट के कार्यकारी निदेशक और चीफ बिजनेस ऑफिसर अखिल चतुर्वेदी ने कहा, नए निवेशकों के जुड़ने की रफ्तार धीमी हो गई है क्योंकि इक्विटी फंडों का हाल का प्रदर्शन अब उतना आकर्षक नहीं रहा। यह शायद एक छोटा-सा झटका है। जैसे ही बाजार में सुधार होगा, वृद्धि फिर से रफ्तार पकड़ लेगी।
शेयर बाजार में कीमतों में सुधार और सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव के दौर ने इक्विटी फंडों के पिछले रिटर्न चार्ट में उनके प्रदर्शन पर असर डाला है। ऐक्टिव लार्जकैप फंडों ने एक साल की अवधि में औसतन सिर्फ 0.5 फीसदी का रिटर्न दिया है। हाल के हफ्तों में आई जोरदार तेज़ी के बाद स्मॉलकैप और मिडकैप फंडों के रिटर्न में सुधार हुआ है। लेकिन यह रिटर्न अभी भी एक अंक में ही है। वैल्यू रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, इन दो योजनाओं की श्रेणियों का औसत रिटर्न करीब 8.5 फीसदी है।
म्युचुअल फंडों में नए निवेशकों का जुड़ना लोकप्रिय श्रेणियों में नई स्कीम लॉन्च होने की रफ्तार पर भी निर्भर करता है। जानकारों के मुताबिक नई फंड ऑफरिंग (एनएफओ) के दौरान फंड हाउसों के विपणन व वितरण पर ज़ोर देने से उनकी नए निवेशकों तक पहुंच बढ़ती है। अप्रैल में सिर्फ एक ऐक्टिव इक्विटी स्कीम जियोब्लैकरॉक लार्जकैप फंड ने अपना एनएफओ खत्म किया और सिर्फ 30 करोड़ रुपये जुटाए।
नुवामा वेल्थ के अध्यक्ष और प्रमुख राहुल जैन ने कहा, अभी शॉर्ट-टर्म इक्विटी फंडों के रिटर्न इतने आकर्षक नहीं हैं कि वे नए निवेशकों को अपनी ओर खींच सकें। हो सकता है कि वैश्विक अनिश्चितता और शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव की वजह से भी लोग अपनी निवेश योजनाओं को टाल रहे हों। इसके अलावा, लोकप्रिय श्रेणियों में नए फंडों का नहीं आना भी एक वजह हो सकती है।
यूनीक निवेशकों की कुल संख्या को कुल स्थायी खाता संख्या (पैन) पंजीकरणों के आधार पर मापा जाता है। अप्रैल 2026 के अंत में इस उद्योग में 6.17 करोड़ यूनीक निवेशक थे।
जानकारों के मुताबिक पिछले तीन महीनों में नए निवेशकों के जुड़ने में आई कमी की एक वजह सोने और चांदी की कीमतों में तेजी की रफ्तार भी धीमी पड़ना है। कीमती धातुओं के ईटीएफ और फंड ऑफ फंड्स (एफओएफ) ने हाल तक नए निवेशकों को आकर्षित करने में मदद की थी क्योंकि सोने और चांदी की कीमतों में आई जबरदस्त तेजी ने नए निवेशकों की एक लहर को अपनी ओर खींचा था।