म्युचुअल फंड

फंडों के आला कर्मियों के वेतन खुलासे पर नरमी; अब नाम नहीं, कुल सैलरी बताएंगी AMC

नियामक ने कहा कि उद्योग के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि ज्यादातर एएमसी में मौजूदा खुलासा ढांचे के तहत आने वाले कर्मचारी कुल कर्मियों का बहुत छोटा हिस्सा हैं

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अभिषेक कुमार   
Last Updated- June 10, 2026 | 11:36 PM IST

बाजार नियामक सेबी ने म्युचुअल फंड परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों (एएमसी) द्वारा अपने कर्मियों के वेतन के बारे में जानकारी देने के तरीके में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत उसने अलग-अलग अधिकारियों के नाम के साथ जानकारी देने की जगह कुल वेतन का आंकड़ा देने का सुझाव दिया है। मंगलवार को इस बारे में एक परामर्श पत्र जारी किया गया। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब उद्योग से जुड़े लोगों ने प्राइवेसी, डेटा प्रोटेक्शन और निवेशकों के लिए अलग-अलग अधिकारियों वेतन की जानकारी की सीमित अहमियत को लेकर चिंता जताई थी।

मौजूदा नियमों के तहत एएमसी को सीईओ, सीआईओ और सीओओ, सबसे ज्यादा वेतन पाने वाले 10 अग्रणी कर्मचारियों और तय वेतन-भत्तों से ज्यादा कमाने वाले सभी कर्मचारियों के नाम, पद और पारिश्रमिक की जानकारी देनी होती है। अब सेबी ने इन अलग-अलग जानकारियों की जगह अलग-अलग श्रेणी के हिसाब से वेतन के कुल आंकड़े और कर्मचारियों की संख्या बताने का प्रस्ताव रखा है।

नियामक ने कहा कि उद्योग के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि ज्यादातर एएमसी में मौजूदा खुलासा ढांचे के तहत आने वाले कर्मचारी कुल कर्मियों का बहुत छोटा हिस्सा हैं। उद्योग के लोगों ने यह भी तर्क दिया है कि अलग-अलग कर्मचारियों के वेतन या कमाई को सार्वजनिक करने से उनकी निजता को खतरा हो सकता है। साथ ही, इससे म्युचुअल फंडों को प्रतिभा के लिए पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (पीएमएस) और ऑल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंडों (एआईएफ) के साथ मुकाबला करने में दिकक्त हो सकती है क्योंकि उन पर ऐसी कोई शर्त लागू नहीं होती।

सेबी ने प्रस्ताव दिया है कि एएमसी वरिष्ठ अधिकारी, सबसे ज्यादा वेतन पाने वाले कर्मचारियों और तय सीमा से ज्यादा वेतन वाले कर्मचारियों को दिए गए कुल वेतन-भत्तों की जानकारी दें। साथ ही हर श्रेणी में आने वाले कर्मचारियों की संख्या भी बताई जाए। सेबी ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि फंड मैनेजरों को योजना के स्तर पर मिलने वाले वेतन-भत्तों की जानकारी सिर्फ संबंधित योजना के निवेशकों के अनुरोध पर ही उपलब्ध कराई जाए।

हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि व्यक्तिगत स्तर पर खुलासे कम करने से संचालन का एक महत्त्वपूर्ण माध्यम कमजोर हो सकता है। किंग स्टब ऐंड कासिवा, एडवोकेट्स ऐंड अटॉर्नीज में पार्टनर अभिषेक पालीवाल ने कहा, व्यक्तिगत पारिश्रमिक खुलासे ऐतिहासिक रूप से महत्त्वपूर्ण जवाबदेही तंत्र के रूप में काम करते रहे हैं, जिससे निवेशकों और हितधारकों को यह आकलन करने में मदद मिलती है कि क्या वेतन-भत्तों का ढांचा फंड के प्रदर्शन, जोखिम प्रबंधन उद्देश्यों और निवेशकों के दीर्घकालिक हितों के अनुरूप हैं। इस तरह के खुलासे प्रोत्साहन व्यवस्थाओं की जांच को भी सुगम बनाते हैं। असमान वेतन या अनुचित क्षतिपूर्ति की परंपरा से जुड़ी गवर्नेंस संबंधी संभावित चिंताओं का पता लगाने में मददगार होते हैं।

पालीवाल ने कहा, हालांकि प्राइवेसी से जुड़ी चिंताएं जायज हैं, लेकिन नियामक को यह पक्का करना होगा कि जानकारी देने के नियमों में किसी भी तरह की ढील से पारदर्शिता, जवाबदेही और निवेशकों के भरोसे पर कोई असर न पड़े। सेबी ने इन प्रस्तावों पर 30 जून तक लोगों से टिप्पणी मांगी है।

First Published : June 10, 2026 | 11:30 PM IST