म्युचुअल फंड

SEBI का बड़ा फैसला: ‘सिग्निफिकेंट इंडाइसेज’ के लिए ₹20,000 करोड़ AUM जरूरी; क्या होगा असर?

SEBI ने एक सर्कुलर में कहा कि इस कदम का मकसद इंडाइसेज सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना है

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अंशु   
Last Updated- May 06, 2026 | 6:27 PM IST

मार्केट रेगुलेटर सेबी ने ‘सिग्निफिकेंट इंडाइसेज’ (significant indices) के निर्धारण के मामले में मंगलवार को एक नई रूपरेखा पेश की। इसके तहत किसी भी इंडेक्स को उस समय ‘सिग्निफिकेंट इंडाइसेज’ माना जाएगा, जब उसे ट्रैक करने वाली म्युचुअल फंड योजनाओं का दैनिक औसत संयुक्त प्रबंधन अधीन परिसंपत्ति (AUM) पिछले छह महीनों में लगातार 20,000 करोड़ रुपये से ज्यादा रहा हो।

इंडाइसेज सिस्टम को बेहतर बनाने का लक्ष्य

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने एक सर्कुलर में कहा कि इस कदम का मकसद इंडाइसेज सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना है। सर्कुलर के मुताबिक, इंडाइसेज को बांटने की यह सीमा प्रत्येक वर्ष 30 जून और 31 दिसंबर को समाप्त होने वाली छमाही आधार पर आंकी जाएगी।

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AUM से तय होगी इंडाइसेज कैटेगरी

सेबी ने स्पष्ट किया कि एक बार किसी इंडाइसेज को ‘सिग्निफिकेंट’ कैटेगरी में शामिल कर दिया गया तो वह इसमें बना रहेगा, जब तक कि उसका AUM लगातार तीन वर्षों तक निर्धारित सीमा से नीचे नहीं चला जाता। सेबी ने कहा कि लिस्टेड सिक्योरिटी पर आधारित इंडाइसेज को तब ‘सिग्निफिकेंट इंडाइसेज’ माना जाएगा जब वह म्युचुअल फंड योजनाओं में छह महीने की अवधि के दौरान तय AUM मानदंड को पूरा करता है।
यह कदम सेबी (सूचकांक प्रदाता) विनियम, 2024 के लागू होने के बाद आया है, जो ऐसे इंडेक्स प्रोवाइडर्स पर लागू होते हैं जो ‘सिग्निफिकेंट इंडाइसेज’ को मैनेज करते हैं।

सेबी ने जारी की ‘सिग्निफिकेंट इंडाइसेज’ लिस्ट

सेबी ने ऐसे इंडाइसेज की एक शुरुआती लिस्ट भी जारी की है, जिसमें प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी 50 के साथ निफ्टी 500 और बीएसई 500 जैसे व्यापक इंडेक्स शामिल हैं। इसके अलावा एनएसई इंडिसेस लिमिटेड, बीएसई इंडेक्स सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और क्रिसिल के सेक्टोरल, डेट और हाइब्रिड इंडेक्स भी लिस्ट में शामिल हैं।

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6 महीने में कराना होगा रजिस्ट्रेशन

नए प्रावधान के तहत इन ‘सिग्निफिकेंट इंडाइसेज’ प्रोवाइडर्स को छह महीने के भीतर सेबी में रजिस्ट्रेशन कराना होगा। हालांकि, आरबीआई द्वारा अधिकृत इंडाइसेज पर यह शर्त लागू नहीं होगी। मौजूदा प्रोवाइडर्स को बदलाव अवधि के दौरान काम जारी रखने की अनुमति होगी, बशर्ते वे तय समय सीमा में आवेदन करें।

सेबी ने यह भी कहा कि पहले से किसी अन्य क्षमता में रजिस्टर्ड और इंडाइसेज सेवाएं दे रही संस्थाओं को दो साल के भीतर अलग कानूनी इकाई बनानी होगी। नियामक ने स्पष्ट किया कि शिकायत निवारण प्रणाली केवल सेबी-रजिस्टर्ड प्रोवाइडर्स द्वारा जारी ‘सिग्निफिकेंट इंडाइसेज’ पर ही लागू होगा।

(PTI इनपुट के साथ)

First Published : May 6, 2026 | 6:27 PM IST