मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने बुधवार को एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMC) के सीनियर अधिकारियों के पारिश्रमिक (रिम्यूनरेशन) से जुड़े खुलासे के नियमों में ढील देने का प्रस्ताव रखा। इसके तहत व्यक्तिगत नाम के साथ वेतन और पारिश्रमिक का खुलासा करने की मौजूदा व्यवस्था की जगह कंसॉलिडेटेड खुलासे का प्रावधान किया जाएगा। सेबी ने कहा कि यह प्रस्ताव उद्योग की गोपनीयता और प्रतिस्पर्धी नुकसान से जुड़ी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए लाया गया है।
अपने कंसल्टेशन पेपर में सेबी ने कहा, “इससे सीनियर मैनजमेंट के पारिश्रमिक का एक समग्र और व्यवस्थित दृष्टिकोण मिलेगा। यूनिटधारक सीनियर मैनजमेंट स्तर पर दिए जा रहे कुल पारिश्रमिक का बेहतर आकलन कर सकेंगे, जबकि खुलासे का स्तर प्रासंगिकता (मैटेरियलिटी) और अनुपातिकता (प्रोपोर्शनैलिटी) जैसे सिद्धांतों के अनुरूप रहेगा।”
फिलहाल, म्युचुअल फंड एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMC) को अपनी वेबसाइट पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO), मुख्य निवेश अधिकारी (CIO), मुख्य परिचालन अधिकारी (COO), सबसे ज्यादा वेतन पाने वाले टॉप 10 कर्मचारियों तथा ऐसे सभी कर्मचारियों के पारिश्रमिक का खुलासा करना अनिवार्य है, जिनकी सालाना आय कम से कम 1.02 करोड़ रुपये हो। यदि कोई कर्मचारी वर्ष के केवल कुछ हिस्से के लिए कार्यरत रहा हो, तो उसकी मासिक आय 8.5 लाख रुपये या उससे ज्यादा होने पर भी यह खुलासा करना पड़ता है।
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सेबी ने कहा कि लिस्टेड एएमसी पहले से ही सेबी के लिस्टिंग ऑब्लिगेशंस एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स (LODR) नियमों और कंपनियां अधिनियम के तहत पारिश्रमिक संबंधी विस्तृत खुलासे करने के लिए बाध्य हैं। हालांकि, अनलिस्टेड एएमसी अलग नियामकीय ढांचे और स्वामित्व संरचना के तहत काम करती हैं। इसलिए उनके लिए वर्तमान खुलासा व्यवस्था अलग है।
सेबी ने कहा, “लिस्टेड कंपनियों पर लागू होने वाली खुलासा संबंधी आवश्यकताओं की सीधे तौर पर अनलिस्टेड एएमसी से तुलना नहीं की जा सकती।”
प्रस्तावित ढांचे के तहत एएमसी को व्यक्तिगत कर्मचारियों के पारिश्रमिक का विवरण सार्वजनिक करने के बजाय विभिन्न कैटेगरी में आने वाले कर्मचारियों की संख्या के साथ कंसॉलिडेटेड पारिश्रमिक आंकड़े जारी करने होंगे।
यह प्रस्ताव म्युचुअल फंड उद्योग से मिले सुझावों के बाद आया है। उद्योग का कहना था कि कर्मचारियों के स्तर पर विस्तृत पारिश्रमिक (रिम्यूनरेशन) का खुलासा लिस्टेड कंपनियों के लिए ज्यादा प्रासंगिक है, जहां शेयरधारकों के पास स्वामित्व अधिकार होते हैं। इसके विपरीत, म्युचुअल फंड में निवेशक यूनिटधारक होते हैं और उनका एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) में प्रत्यक्ष स्वामित्व नहीं होता।
उद्योग के प्रतिनिधियों ने गोपनीयता और डेटा सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि व्यक्तिगत पारिश्रमिक की सार्वजनिक जानकारी से कर्मचारियों की निजी सूचनाओं के दुरुपयोग का खतरा बढ़ सकता है। साथ ही, इससे एएमसी को प्रतिभाशाली पेशेवरों को आकर्षित करने और बनाए रखने में प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान हो सकता है, क्योंकि PMS और AIF पर इस तरह के खुलासा नियम लागू नहीं होते।
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अलग से, सेबी ने फंड मैनेजरों के पारिश्रमिक के खुलासे के लिए भी एक नया ढांचा प्रस्तावित किया है। सेबी ने कहा कि वर्तमान में फंड मैनेजरों के पारिश्रमिक (रिम्यूनरेशन) का अलग से खुलासा नहीं किया जाता। यह जानकारी केवल टॉप वेतन पाने वाले कर्मचारियों या निर्धारित वेतन सीमा से ऊपर के कर्मचारियों से जुड़े मौजूदा खुलासों के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से सामने आती है।
सेबी ने कहा कि चूंकि किसी भी म्युचुअल फंड योजना (स्कीम) के निवेश संबंधी फैसलों की मुख्य जिम्मेदारी संबंधित फंड मैनेजर पर होती है। इसलिए उनके पारिश्रमिक के बारे में निवेशकों को जानकारी उपलब्ध कराने के पक्ष में तर्क मौजूद हैं।
हालांकि, नियामक ने फंड मैनेजरों के वेतन का सार्वजनिक खुलासा अनिवार्य करने के बजाय एक वैकल्पिक व्यवस्था का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत किसी स्कीम के फंड मैनेजर या मैनेजरों को दिए गए कुल पारिश्रमिक का कंसोलिडेटेड विवरण केवल यूनिटधारकों के विशेष अनुरोध पर उपलब्ध कराया जाएगा। यह जानकारी केवल उन स्कीमों तक सीमित रहेगी, जिनमें संबंधित निवेशक ने अनुरोध किए जाने की तारीख तक निवेश कर रखा हो।
सेबी ने इन प्रस्तावों पर आम जनता और बाजार सहभागियों से 30 जून तक सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं।
(PTI इनपुट के साथ)