म्युचुअल फंड

क्या अब सैलरी मिलेगी Mutual Fund में? सेबी का बड़ा प्रस्ताव

सेबी ने कुछ मामलों में थर्ड पार्टी पेमेंट की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा

Published by
अभिषेक कुमार   
Last Updated- May 21, 2026 | 9:32 AM IST

भारतीय कंपनी जगत को जल्द ही अपने कर्मचारियों के वेतन का कुछ हिस्सा म्युचुअल फंडों की यूनिटों के रूप में देने की इजाजत मिल सकती है। बुधवार को जारी एक परामर्श पत्र में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कुछ खास मामलों में फंडों में थर्ड-पार्टी भुगतान की अनुमति का प्रस्ताव किया है। इसके अलावा नियामक फंडों के वितरकों को कमीशन भी यूनिटों के रूप में देने की अनुमति पर विचार कर रहा है।

अभी, किसी निवेशक को म्युचुअल फंड में निवेश अपने ही बैंक खाते से करना होता है। सेबी ने कहा कि इस नियम का मकसद गलत इस्तेमाल रोकना और मनी लॉन्ड्रिंग रोकने वाले नियमों का पालन सुनिश्चित करना है। हालांकि नियामक ने बताया कि म्युचुअल फंड सलाहकार समिति की सिफारिशों के आधार पर वह कुछ खास परिस्थितियों में तीसरे पक्ष के भुगतान की अनुमति की योजना बना रहा है। इनमें से एक प्रस्ताव के तहत नियोक्ताओं को अपने कर्मचारियों की ओर से फंडों की योजनाओं में निवेश करने की अनुमति मिल जाएगी।

सेबी ने कहा, प्रस्तावित व्यवस्था में नियोक्ताओं द्वारा अपने कर्मचारियों को अलग-अलग तरह के फायदे और बचत के मौके देने की पुरानी परंपरा को मान्यता दी गई है। इस व्यवस्था से फंड कंपनियों को वेतन में से कटौती करके फंडों में निवेश के लिए एक साथ भुगतान स्वीकार करने की सुविधा मिलेगी। यह सुविधा सूचीबद्ध कंपनियों, ईपीएफओ में पंजीकृत फर्मों और खुद परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों (एएमसी) के लिए उपलब्ध होगी। इस व्यवस्था के तहत निवेश कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक रहेगा।

सेबी ने यह भी प्रस्ताव किया है कि एएमसी को यह अनुमति दी जाए कि वे अपने पैनल में शामिल फंड वितरकों को कमीशन का कुछ हिस्सा नकदी के बजाय फंडों की यूनिटों के रूप में दें। परामर्श पत्र के अनुसार इस कदम से वितरकों को फंडों की यूनिटों में निवेश करने का सुविधाजनक, आसान और अनुशासित तरीका मिलेगा और वितरकों को लंबी अवधि के लिए बचत और निवेश करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

नियामक ने थर्ड-पार्टी भुगतान के लिए कई सुरक्षा उपाय सुझाए हैं। इनमें भुगतान करने वाले और पाने वाले के बीच के रिश्ते की पुष्टि, बेहतर केवाईसी जांच, ऑडिट ट्रेल्स और यह सुनिश्चित करना शामिल है कि रीडम्पशन यानी निवेश निकासी से मिली रकम सिर्फ पाने वाले के सत्यापित बैंक खाते में ही जमा हो। एक अलग प्रस्ताव में सेबी ने सुझाव दिया कि निवेशकों को नियामकीय ढांचे के जरिये अपने फंड निवेश या उससे मिले रिटर्न का कुछ हिस्सा सामाजिक कार्यों में दान करने की सुविधा दी जाए।

इस प्रस्ताव के तहत निवेशक अपनी सबस्क्रिप्शन राशि, लाभांश या रीडम्पशन से मिली रकम का एक हिस्सा दान दे सकते हैं। सेबी ने इसके लिए दो संभावित तरीके बताए हैं — या तो सोशल कंट्रीब्यूशन की सुविधा वाली खास फंड योजनाएं शुरू करना या फिर मौजूदा योजनाओं को ही इस विकल्प की अनुमति देना।

दान को सोशल स्टॉक एक्सचेंज पर पंजीकृत गैर-लाभकारी संगठनों द्वारा जारी जीरो कूपन ज़ीरो प्रिंसिपल (जेडसीजेडपी) योजनाओं में लगाया जा सकता है या सीधे उन एनजीओ को दिया जा सकता है, जिनकी पहचान योजना के दस्तावेज में की गई है। सेबी ने कहा कि फंडों के जरिये दान देने की सुविधा से निवेशकों पर भरोसेमंद एनजीओ की खुद से पहचान करने का परिचालन संबंधी बोझ कम होगा।

नियामक ने कहा कि सोशल स्टॉक एक्सचेंज में पंजीकृत संस्थाओं के जरिये योगदान भेजने से पारदर्शिता की मजबूत परत मिलेगी और निवेशकों को यह भरोसा होगा कि उनका पैसा सत्यापित संस्थाओं तक पहुंच रहा है। इस फ्रेमवर्क में सख्त जानकारी की शर्तें, फंड के अंतिम इस्तेमाल की समय-समय पर रिपोर्टिंग और निवेशक से स्पष्ट और पूर्व में सहमति लेना भी जरूरी होगी।

 

First Published : May 21, 2026 | 9:32 AM IST