प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
मार्च-अप्रैल में ऐक्टिव सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) खातों में आई गिरावट का मुख्य कारण निवेशकों का एक खास वर्ग था। इन दो महीनों के दौरान म्युचुअल फंड उद्योग के डायरेक्ट प्लान बी-30 (टॉप 30 शहरों को छोड़कर) एसआईपी खातों में 3,50,000 से ज्यादा की कमी आई। बाकी हिस्सों में स्थिति काफी हद तक स्थिर रही या बढ़ोतरी जारी रही।
फंड निवेशकों का आधार मोटे तौर पर दो हिस्सों में बंटा हुआ है। देश के जिन 30 शहरों में फंड परिसंपत्तियां सबसे ज्यादा हैं, वहां के निवेशकों को टी-30 निवेशक कहा जाता है। बाकी सभी निवेशक बी-30 श्रेणी में आते हैं। निवेशकों को उनके निवेश के तरीके के आधार पर भी बांटा जाता है – रेग्युलर प्लान (जो बिचौलियों के जरिये बेचे जाते हैं और जिन पर कमीशन मिलता है) और डायरेक्ट प्लान (जो सीधे फंड हाउस से खरीदे जाते हैं)।
कोविड के बाद एसआईपी खातों की संख्या लगातार बढ़ रही थी, पर हाल के महीनों में उसमें गिरावट देखने को मिली है। इसका कारण शायद शेयर बाजारों में लंबे समय से जारी उतार-चढ़ाव का निवेशकों के मूड पर असर हो सकता है।
बिज़नेस स्टैंडर्ड को मिले उद्योग के आंकड़ों के मुताबिक दो महीने की इस अवधि में कुल ऐक्टिव एसआईपी खातों की संख्या में 1,14,000 की गिरावट आई है। लेकिन निवेशकों के दोनों वर्गों में रुझान काफी अलग-अलग रहे। जहां टी-30 रेग्युलर प्लान सेगमेंट में इस दौरान 3,13,601 नए खाते जुड़े, वहीं बी-30 डायरेक्ट सेगमेंट में 3,50,000 से ज्यादा खाते कम हो गए।
इस गिरावट ने पिछली बढ़त को पूरी तरह खत्म कर दिया और उद्योग के कुल खातों की संख्या को नीचे कर दिया। टी-30 के डायरेक्ट प्लान खातों में भी लगभग 72,000 की गिरावट आई।
म्युचुअल फंड अधिकारियों का कहना है कि यह रुझान उम्मीद के मुताबिक ही है क्योंकि डायरेक्ट प्लान में निवेश करने वाले लोग, खासकर वे जिन्होंने हाल के वर्षों में निवेश शुरू किया है, बाजार के उतार-चढ़ावों के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं।
मिरे ऐसेट एमएफ में वितरण और रणनीतिक गठजोड़ की प्रमुख सुरंजना बड़ठाकुर ने कहा, हाल के वर्षों में म्युचुअल फंडों में आने वाले नए निवेशकों का बड़ा हिस्सा बी-30 शहरों का है और उनमें से कई लोग सीधे या बिना किसी मदद के आए हैं। हो सकता है कि कुछ लोग महामारी के बाद बाजार में आई जबरदस्त तेजी को देखकर अच्छे रिटर्न की उम्मीद से आए हों और हाल के उतार-चढ़ाव की वजह से इन निवेशकों का एक हिस्सा अपनी एसआईपी बंद करने के बारे में सोच रहा हो।
मार्च में बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी 12 फीसदी गिर गए थे। यह मार्च 2020 के बाद उनकी सबसे बड़ी मासिक गिरावट थी। इसका कारण पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट के बीच तेल की कीमतों में इजाफा था। एडलवाइस फंड के अध्यक्ष व बिक्री प्रमुख दीपक जैन ने कहा, बाजार में उतार-चढ़ाव के दौर में निवेशकों, खासकर जो युवा हैं या पहली बार बाजार में कदम रख रहे हैं, का चिंतित होना पूरी तरह स्वाभाविक है। बाजार के चक्र को समझना एक सीखने की प्रक्रिया है, जिससे हर अनुभवी निवेशक गुजरा है।
उद्योग सूत्रों के अनुसार टी-30 और बी-30 शहरों में बदलाव का असर टी-30 और बी-30 से एसआईपी खातों की संख्या पर भी पड़ सकता है। मार्च से लागू हालिया बदलावों में टी-30 शहरों में दो बदलाव किए गए हैं। बी-30 पर केंद्रित एमएफ वितरण प्लेटफॉर्म जेडफंड्स के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनीष कोठारी ने कहा कि डायरेक्ट प्लान में बी-30 शहरों के खातों के ज्यादा बंद होने का मतलब यह नहीं है कि निवेशक फंडों से बाहर निकल रहे हैं।
उन्होंने कहा, जेडफंड्स में हम घबराहट के ठीक उलट देख रहे हैं। पिछले छह महीनों में हमारे लगभग 40 फीसदी नए निवेशक सीधे दूसरी तरफ आए हैं। ये वे लोग हैं जिन्होंने खुद से शुरुआत की, उन्हें बाजार में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ा और फिर उन्होंने तय किया कि कोई उनकी मदद के लिए साथ हो। सीधे निवेश से किसी की मदद लेने की ओर यह बदलाव ही इन आंकड़ों का असली संकेत है।
एसआईपी खातों पर कुछ दबाव जरूर है। लेकिन कुल एसआईपी निवेश काफी हद तक स्थिर रहा है। बी-30 से कुल निवेश फरवरी के लगभग 12,306 करोड़ रुपये से बढ़कर अप्रैल में 12,627 करोड़ रुपये हो गया।