म्युचुअल फंड

3 साल SIP किया, फिर भी रिटर्न नहीं? एक्सपर्ट ने बताया क्या करें

कई निवेशक गिरावट में सोचने लगते हैं कि क्या SIP बंद कर देनी चाहिए, क्या फंड बदल देना चाहिए, या फिर कुछ समय के लिए इंतजार करना चाहिए

Published by
देवव्रत वाजपेयी   
Last Updated- April 17, 2026 | 9:01 AM IST

अगर आपने 2-3 साल पहले SIP शुरू की थी और अब आपके पोर्टफोलियो में रिटर्न बहुत कम दिख रहा है, या XIRR नेगेटिव में चला गया है, तो यह स्थिति परेशान करने वाली लग सकती है। कई निवेशक ऐसे समय में यही सोचने लगते हैं कि क्या SIP बंद कर देनी चाहिए, क्या फंड बदल देना चाहिए, या फिर कुछ समय के लिए इंतजार करना चाहिए। लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि 3 साल में फ्लैट या कमजोर रिटर्न दिखना अपने आप में घबराने की वजह नहीं है। असली बात यह समझना है कि परेशानी बाजार की वजह से है, फंड की वजह से है, या आपकी उम्मीदें बहुत जल्दी की थीं।

3 साल बहुत लंबा समय नहीं होता

म्युचुअल फंड एक्सपर्ट एके निगम का साफ कहना है कि इक्विटी SIP को 3 साल में जज करना सही तरीका नहीं है। उनके मुताबिक, इक्विटी निवेश का असली परीक्षण 5 से 7 साल में होता है, क्योंकि इतने समय में बाजार तेजी, गिरावट और रिकवरी तीनों दौर दिखा सकता है। अगर कोई निवेशक सिर्फ 3 साल का रिटर्न देखकर यह फैसला ले ले कि SIP काम नहीं कर रही, तो वह अधूरी तस्वीर देखकर निष्कर्ष निकाल रहा है। खासकर मिड और स्मॉल कैप फंड्स में बाजार का चक्र लंबा होता है, इसलिए वहां धैर्य और भी ज्यादा जरूरी हो जाता है।

एके निगम इसे आसान तरीके से समझाते हैं। उनका कहना है कि 3 साल में SIP को जज करना ऐसा है जैसे टेस्ट मैच को पहले ही दिन देखकर नतीजा सुना देना। बाजार में समय बहुत अहम होता है, और इक्विटी में जल्दी फैसला अक्सर गलत साबित हो सकता है।

अगर रिटर्न नहीं मिला, तो क्या सबसे पहले SIP बंद कर देनी चाहिए?

इस सवाल पर PersonalCFO के फाउंडर और CEO सुशील जैन का कहना है कि गिरते या कमजोर बाजार में SIP रोकना सही रणनीति नहीं है। उनके मुताबिक, SIP का सबसे बड़ा फायदा ही यह है कि यह बाजार की अस्थिरता को आपके पक्ष में काम करने देती है। जब बाजार गिरता है, तो उसी तय रकम में आपको ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं। बाद में जब बाजार ऊपर जाता है, तो वही ज्यादा यूनिट्स आपके रिटर्न को बेहतर बनाती हैं।

यानी अगर बाजार गिरने के समय आप SIP जारी रखते हैं, तो आप सस्ते दाम पर निवेश कर रहे होते हैं। लेकिन अगर आप उसी समय SIP रोक देते हैं, तो आप वही मौका खो देते हैं जो आगे चलकर आपके रिटर्न को मजबूत बना सकता था। इसलिए सिर्फ इसलिए SIP बंद कर देना कि 3 साल में रिटर्न नहीं मिला, एक्सपर्ट्स इसे गलत कदम मानते हैं।

यह पढ़ें: Top-10 Gold ETFs: 1 साल में 63% तक रिटर्न, क्या आपके पोर्टफोलियो में है ये फंड?

क्या गिरते बाजार में SIP सच में फायदा देती है, या यह सिर्फ किताबों की बात है?

सुशील जैन का कहना है कि यह सिर्फ थ्योरी नहीं, बल्कि लंबे समय में काम करने वाली असली रणनीति है। वे बताते हैं कि SIP की पूरी ताकत ही इस बात में है कि आप बाजार के ऊंचे-नीचे भाव को लेकर रोज फैसला नहीं लेते, बल्कि लगातार निवेश करते रहते हैं। गिरते बाजार में आपका निवेश ज्यादा यूनिट्स खरीदता है, और जब बाजार रिकवर करता है, तो उन्हीं यूनिट्स से ज्यादा फायदा होता है।

उनके मुताबिक, अगर कोई निवेशक गिरावट के दौर में SIP जारी रखता है, तो लंबी अवधि में उसे बेहतर औसत लागत मिलती है। यही वजह है कि SIP को वोलाटाइल मार्केट में ज्यादा कारगर माना जाता है। यानी बाजार की गिरावट SIP निवेशक के लिए हमेशा बुरी खबर नहीं होती। कई बार वही गिरावट आगे की कमाई की नींव रखती है।

अगर कोई निवेशक करेक्शन के समय SIP रोक देता है, तो उसका नुकसान क्या होता है?

सुशील जैन के मुताबिक, SIP रोकने से नुकसान दो तरह से होता है। पहला नुकसान यूनिट्स का होता है। जब बाजार नीचे होता है, तो उसी रकम में ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं। अगर आप उस समय SIP रोक देते हैं, तो आप कम कीमत पर ज्यादा यूनिट्स जोड़ने का मौका खो देते हैं। यही यूनिट्स बाद में बाजार चढ़ने पर आपके रिटर्न को ऊपर ले जाती हैं।

दूसरा नुकसान समय का होता है। अगर आप गिरावट में SIP जारी रखते हैं, तो आपकी औसत खरीद लागत नीचे आती रहती है। ऐसे में बाजार में पूरी रिकवरी आने से पहले भी आपका पोर्टफोलियो संभल सकता है। लेकिन अगर आपने SIP रोक दी, तो आपको ब्रेक-ईवन तक पहुंचने के लिए ज्यादा इंतजार करना पड़ सकता है। यानी SIP बंद करना सिर्फ उस महीने का निवेश रोकना नहीं है, बल्कि भविष्य की रिकवरी से मिलने वाला फायदा भी कम कर देना है।

यह पढ़ें: पूंजी बाजार के शेयरों की चमकीली राह, अगले 10 साल में MFs का AUM 17% की दर से बढ़ने का अनुमान

3 साल में रिटर्न नहीं मिला, तो क्या करें? घबराएं नहीं, जांच करें

एके निगम का कहना है कि ऐसे समय में पहला कदम घबराहट नहीं, बल्कि जांच होना चाहिए। सबसे पहले यह देखना चाहिए कि आपका फंड अपने बेंचमार्क और अपनी कैटेगरी के दूसरे फंड्स के मुकाबले कैसा कर रहा है। अगर बाजार में ही कमजोरी है और पूरी कैटेगरी का प्रदर्शन दबाव में है, तो सिर्फ आपके फंड को दोष देना ठीक नहीं होगा। लेकिन अगर आपका फंड लगातार 3 साल या उससे ज्यादा समय से अपने साथियों से पीछे चल रहा है, तब फंड बदलने पर विचार किया जा सकता है।

यानी एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि SIP बंद मत कीजिए, लेकिन फंड को आंख बंद करके भी मत पकड़े रहिए। अगर समस्या बाजार की है, तो धैर्य रखिए। अगर समस्या फंड की है, तो फंड बदलिए, रणनीति नहीं।

क्या SIP हर निवेशक के लिए सही होती है?

एके निगम इस बात की भी तरफ इशारा करते हैं कि कई बार समस्या सिर्फ रिटर्न की नहीं, बल्कि एसेट एलोकेशन की होती है। अगर किसी निवेशक ने 100% पैसा इक्विटी फंड्स में लगाया है और बाजार की गिरावट से वह बहुत ज्यादा परेशान हो रहा है, तो इसका मतलब यह भी हो सकता है कि उसकी जोखिम सहने की क्षमता और पोर्टफोलियो का ढांचा एक-दूसरे से मेल नहीं खा रहे। ऐसे मामलों में कुछ हिस्सा हाइब्रिड या मल्टी-एसेट फंड्स में रखना मदद कर सकता है।

मतलब साफ है, अगर उतार-चढ़ाव बहुत ज्यादा परेशान कर रहा है, तो SIP बंद करने की बजाय पोर्टफोलियो का संतुलन ठीक करना ज्यादा समझदारी हो सकती है।

मौजूदा वैल्यूएशन के बीच SIP बढ़ानी चाहिए या नहीं?

सुशील जैन का मानना है कि SIP शुरू करने या बढ़ाने के लिए “सही” समय पकड़ना लगभग नामुमकिन है। इसलिए उनके अनुसार, अगर आपका लक्ष्य लंबी अवधि का है, तो अभी SIP बढ़ाना गलत नहीं है। वे खासतौर पर टॉप-अप SIP की सलाह देते हैं। टॉप-अप SIP का मतलब है कि आप हर साल अपनी SIP की रकम थोड़ा-थोड़ा बढ़ाते जाएं। इससे आपकी निवेश क्षमता समय के साथ बढ़ती है और लंबी अवधि में बड़ा कॉर्पस बनाने में मदद मिलती है।

उनका कहना है कि बाजार को टाइम करने की कोशिश करने से बेहतर है कि आप अनुशासित तरीके से निवेश बढ़ाते रहें। इससे आप भाव का अंदाजा लगाने के चक्कर में नहीं पड़ते और औसत लागत का फायदा भी मिलता रहता है।

XIRR गिर गया है, तो क्या इसे खराब संकेत मानें?

SIP का रिटर्न आमतौर पर XIRR के आधार पर देखा जाता है। XIRR ऐसा वार्षिक रिटर्न है, जिसमें निवेश की हर किस्त के समय को ध्यान में रखा जाता है। यही कारण है कि SIP के शुरुआती वर्षों में XIRR अक्सर कमजोर या निगेटिव दिख सकता है, भले ही फंड में कोई बुनियादी खराबी न हो।

दरअसल, जब कोई निवेशक 2 या 3 साल से SIP कर रहा होता है, तब उसकी ज्यादातर किस्तें हाल की होती हैं। कुछ किस्तों को सिर्फ कुछ हफ्तों का समय मिला होता है, कुछ को कुछ महीनों का। केवल शुरुआती किस्तें ही ऐसी होती हैं, जिन्हें लंबा समय मिला है। ऐसे में अगर बाजार गिरता है, तो निवेश पर सुरक्षा की परत बहुत कम होती है और XIRR तेजी से नीचे चला जाता है।

एके निगम के मुताबिक, शुरुआती सालों में XIRR को बहुत गंभीरता से देखकर फैसला लेना गलत हो सकता है। वे कहते हैं कि कम या नेगेटिव XIRR का मतलब यह नहीं है कि आपकी SIP खराब है या फंड बेकार है। शुरुआती दौर में XIRR बाजार की हल्की गिरावट से भी तेजी से नीचे जा सकता है, क्योंकि उस समय आपके निवेश का बड़ा हिस्सा नया होता है और उसे बढ़ने का ज्यादा समय नहीं मिला होता।

उनकी राय में XIRR को सही तरीके से समझने के लिए लंबा समय देना जरूरी है। वे मानते हैं कि 5 साल के बाद XIRR ज्यादा उपयोगी तस्वीर दिखाता है। उससे पहले इसे देखकर घबराकर फैसला लेना नुकसानदेह हो सकता है।

(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय एक्सपर्ट्स की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)

First Published : April 17, 2026 | 8:53 AM IST