प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
WhiteOak Capital MF removes exit load: व्हाइटओक कैपिटल म्युचुअल फंड ने निवेशकों के लिए एक बड़ा और लाभकारी कदम उठाते हुए घोषणा की है कि वह अपनी सभी इक्विटी और हाइब्रिड स्कीम्स में नए निवेशों पर एग्जिट लोड (निकलने पर लगने वाला शुल्क) को 27 अप्रैल से हटा देगा। हालांकि, यह बदलाव लिक्विड फंड्स और आर्बिट्राज फंड्स पर लागू नहीं होगा, जहां मौजूदा एग्जिट लोड स्ट्रक्चर पहले की तरह जारी रहेगी।
यह कदम निवेशकों के अनुभव को बेहतर बनाने और निवेश को ज्यादा लचीला बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। इसके तहत निवेशक अब बिना किसी एग्जिट पेनल्टी के अपने निवेश को आसानी से निकाल सकेंगे।
फंड हाउस ने कहा, “यह बदलाव व्हाइटओक कैपिटल एसेट मैनेजमेंट की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसमें वह निवेशकों की सुविधा, पारदर्शिता और आसान पहुंच को प्राथमिकता देता है। इन कैटेगरी में एग्जिट लोड हटाकर हम अपने उत्पादों को बदलती हुई निवेशकों की जरूरतों और पसंद के अनुसार ढाल रहे हैं। इससे निवेशकों को ज्यादा तरलता (liquidity) मिलेगी और वे अपने पोर्टफोलियो से जुड़े फैसले ज्यादा तेजी और आसानी से ले सकेंगे।”
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फंड हाउस के लगभग 16 इक्विटी और हाइब्रिड फंड्स में अब एग्जिट लोड नहीं लगेगा। फंड हाउस के अनुसार, जिन योजनाओं में अब एग्जिट लोड को पूरी तरह “शून्य” (Nil) कर दिया गया है, उनमें शामिल कुछ प्रमुख योजनाओं ये हैं– व्हाइटओक कैपिटल फ्लेक्सी कैप फंड, व्हाइटओक कैपिटल मिड कैप फंड, व्हाइटओक कैपिटल ईएसजी बेस्ट-इन-क्लास स्ट्रेटेजी फंड, व्हाइटओक कैपिटल डिजिटल भारत फंड, व्हाइटओक कैपिटल क्वालिटी इक्विटी फंड, व्हाइटओक कैपिटल कंजम्पशन अपॉर्चुनिटीज फंड, व्हाइटओक कैपिटल बैलेंस्ड एडवांटेज फंड, व्हाइटओक कैपिटल मल्टी एसेट एलोकेशन फंड, व्हाइटओक कैपिटल बैलेंस्ड हाइब्रिड फंड और व्हाइटओक कैपिटल इक्विटी सेविंग्स फंड आदि।
व्हाइटओक कैपिटल म्युचुअल फंड के सीईओ आशीष सोमैया ने कहा कि कंपनी ने अपने सभी इक्विटी और हाइब्रिड फंड्स को बिना एग्जिट लोड के करने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स में बदलाव के कारण निवेशक पहले से ही बार-बार खरीद-बिक्री करने से बचते हैं। इसलिए निवेश की लागत को और बढ़ाने के लिए एग्जिट लोड लगाने की जरूरत नहीं है। अब उनके अनुसार एग्जिट लोड का ज्यादा महत्व नहीं रह गया है।
पहले की व्यवस्था में कई योजनाओं में एग्जिट लोड लगाया जाता था। अगर निवेशक तय समय सीमा के अंदर अपनी यूनिट्स को बेचते या स्विच करते थे, तो उन्हें 0.10% से 1% तक का शुल्क देना पड़ता था। कुछ योजनाओं में यह शुल्क यूनिट मिलने के 7 दिन या 30 दिन के भीतर बेचने पर लागू होता था। वहीं कुछ योजनाओं में निवेश का एक हिस्सा बिना शुल्क निकाला जा सकता था, लेकिन बाकी राशि पर एग्जिट लोड लगाया जाता था।
अब इस बदलाव के बाद इन सभी योजनाओं में एग्जिट लोड पूरी तरह हटा दिया गया है। इसका मतलब है कि प्रभावी तारीख के बाद निवेशक जब भी यूनिट्स बेचेंगे या स्विच करेंगे, उन्हें कोई एग्जिट चार्ज नहीं देना होगा।
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व्हाइटओक कैपिटल म्युचुअल फंड के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर रमेश मंत्री ने कहा, “लिक्विडिटी यानी आसानी से पैसा निकाल पाने की सुविधा, एक अच्छे पोर्टफोलियो की खासियत होनी चाहिए, न कि उस पर कोई रोक। एग्जिट लोड हटाने से निवेशक अपनी असली जरूरतों और बाजार के मौकों के अनुसार बिना अतिरिक्त खर्च की चिंता किए फैसले ले सकते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि हमारा ध्यान ऐसे मजबूत और स्थिर पोर्टफोलियो बनाने पर है, जिसमें निवेशक भरोसे के साथ लंबे समय तक निवेशित रह सकें और जरूरत पड़ने पर सही समय पर फैसला लेने की आजादी भी उनके पास हो।
2025 के अंत में SEBI ने म्युचुअल फंड्स पर लगने वाला अधिकतम एग्जिट लोड को 5% से घटाकर 3% कर दिया था। यह रिडेम्प्शन वैल्यू के आधार पर तय किया जाता है। फिलहाल, ज्यादातर म्युचुअल फंड्स में एग्जिट लोड लगभग 1% से 2% के बीच होता है।
एग्जिट लोड वह शुल्क होता है, जो म्यूचुअल फंड निवेश करने के बाद तय अवधि के भीतर पैसा निकालने या स्कीम बदलने पर लेता है। निवेशकों के लिए यह एक अतिरिक्त खर्च होता है, जिससे निकासी के समय मिलने वाली कुल रकम कम हो जाती है।
आमतौर पर एग्जिट लोड का उद्देश्य निवेशकों को लंबे समय तक निवेशित रहने के लिए प्रोत्साहित करना होता है। हालांकि, इससे उन निवेशकों के लिए जल्दी पैसा निकालना महंगा हो जाता है, जो समय से पहले निवेश से बाहर निकलना चाहते हैं।