नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) इस साल की शुरुआत से फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग के लिए कारोबारी अवधि को बढ़ाने पर विचार कर रही है। इसके लिए NSE को SEBI से हरी झंडी मिलने का इंतजार है। द इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, NSE इक्विटी डेरिवेटिव्स के लिए ट्रेडिंग ऑवर बढ़ाने की तैयारी में है।
NSE शाम के कारोबारी सत्र को 6:00 बजे से रात 9:00 बजे तक बढ़ाने पर विचार कर रहा है। ट्रेडर्स जल्द ही नियमित ट्रेडिंग टाइम 9:15 से 3:30 के बाद फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग में भाग ले सकते हैं। एक सूत्र के हवाले से कहा गया है कि NSE इस सत्र को 11:30 बजे तक बढ़ा सकता है।
NSE लंबे ट्रेडिंग ऑवर के माध्यम से भारतीय व्यापारियों को वैश्विक घटनाओं पर तेज प्रतिक्रिया दिखाने का मौका देने पर विचार कर रहा है। कारोबारी सत्र में विस्तार से NSE के ट्रेडिंग वॉल्यूम में भी विस्तार होने की उम्मीद है। इसके अलावा GIFT City जैसे प्लेटफॉर्म चौबीसों घंटे ट्रेडिंग की सुविधा पेश कर रहे है। ऐसे में NSE प्रतिस्पर्धा में बने रहे के लिए फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) में ट्रेडिंग टाइम बढ़ाने पर विचार कर रहा है।
Also read: अमेरिकी बॉन्ड की तुलना में Sensex से कम रिटर्न
NSE ने इस संबंध में अपना प्रस्ताव पहले ही बाजार नियामक, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) को सौंप दिया है। उल्लेखनीय है कि SEBI ने पहले ही नियमों का एक सेट बना दिया है जो फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) कारोबार को रात 11:55 बजे तक और शेयरों को शाम 5:00 बजे तक खुला रखने के शेयर बाजार के निर्णय को सुविधाजनक बनाएगा। अब NSE को केवल SEBI से हकी झंडी मिलने का इंतजार है।
बता दें कि NSE इस साल की शुरुआत से ट्रेडिंग ऑवर को बढ़ाने की योजना बना रही है और विभिन्न चरणों में विस्तारित ट्रेडिंग ऑवर में उत्पादों को पेश करने की संभावना है। इसकी योजना निफ्टी और बैंक निफ्टी सहित इंडेक्स फ्यूचर्स और ऑप्शंस के साथ शुरुआत करने और बाद में स्टॉक डेरिवेटिव्स को शामिल करने की है। साथ ही, सभी उत्पादों की समाप्ति के दिन और समय समान रहेंगे।
कुछ बाजार सहभागियों के अनुसार, ट्रेडिंग सत्रों का समय बढ़ाने की NSE की योजना के पीछे कोई अच्छा कारण नहीं है। उन्होंने इकनॉमिक टाइम्स को बताया कि लंबे सत्रों से जरूरी नहीं कि ट्रेडिंग वॉल्यूम बढ़े, बल्कि इससे लागत बढ़ेगी और कर्मचारियों में असंतोष पैदा होगा।