विश्लेषकों का कहना है कि ओपेक+ सदस्यों द्वारा कच्चे तेल उत्पादन में प्रति दिन 20 लाख बैरल (बीपीडी) तक या वैश्विक आपूर्ति के 2 प्रतिशत तक की कटौती के निर्णय से तेल कीमतों में तेजी आने का अनुमान है और ब्रेंट 100 डॉलर के आंकड़े पर पहुंच सकता है, जो मौजूदा स्तरों से करीब 7.5 प्रतिशत तक की तेजी है। कच्चे तेल का नया उत्पादन स्तर नवंबर 2022 से शुरू होगा और दिसंबर 2023 तक यह समान बना रहेगा।
यूबीएस के जियोवानी स्टाउनोवो और वायने गॉर्डन ने एक ताजा रिपोर्ट में लिखा है, ‘हम तेल कीमतों को लेकर सकारात्मक नजरिया अपनाए हुए हैं। इस शीत ऋतु में तेल मांग को गैस से तेल में बदलाव का लाभ मिलने से ओईसीडी द्वारा बड़े तेल भंडार जारी करने की प्रक्रिया समाप्त होने की संभावना है कम ओपेक+ उत्पादन के बीच 5 दिसंबर को रूसी कच्चे तेल आयात पर यूरोपीय प्रतिबंध लागू हो जाएगा। ऐसे में हमें तेल बाजार में चुनौती और बढ़ने का अनुमान है। आगामी तिमाहियों में कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच सकता है।’
जहां ओपेक+ बैठकें अब सिर्फ हरेक 6 महीने में आयोजित होंगी, वहीं समूह अभी भी बाजार हालात में बदलाव होने पर विशेष बैठकें करने में सक्षम है। आंकड़े से पता चलता है कि इस बीच, कच्चे तेल की कीमतों में 82 डॉलर प्रति बैरल के निचले स्तर से 13 प्रतिशत की तेजी आई है और अभी ये कीमतें 93 डॉलर के आसपास हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि तेल कीमतों में और तेजी आने से दर वृद्धि और मुद्रास्फीति नियंत्रण के संबंध में वैश्विक केंद्रीय बैंकों, खासकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के कदमों का असर कम होगा। मुद्रास्फीति चार दशक ऊंचे स्तरों पर पहुंच गई है। विभिन्न देशों में 100 अरब पौंड निवेश का प्रबंधन करने वाली ब्रिटिश कंपनी क्विल्टर शेवियट में इक्विटी शोध विश्लेषक जैमी मैडॉक का कहना है, ‘उत्पादन में 20 लाख बैरल प्रतिदिन की कटौती करने के निर्णय से बदलाव आने का अनुमान है।
हम मौजूदा समय में बेहद समन्वित तेल भंडार दर्ज कर रहे हैं, जो मुख्य तौर पर अमेरिका से जुड़ा हुआ है जिसका उद्देश्य तेल कीमतों में नरमी को बढ़ावा देना और उपभोक्ताओं को ऐसे समय में मदद पहुंचाना है जब मुद्रास्फीति में तेजी आई है और रहन-सहन की लागत तेजी से बढ़ी है। ‘
कुछ विश्लेषकों का तर्क है कि ओपेक+ के कुछ सदस्य (जैसे रूस) पहले ही नई कम सीमा से नीचे उत्पादन कर रहे हैं, इसलिए ते बाजार से बैरल में प्रभावी कटौती कम है, लेकिन यह आगामी तिमाहियों में तेल कीमतों को प्रभावित करने के लिहाज से अभी भी महत्वपूर्ण है।