सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के पूंजीगत खर्च से मौजूदा वित्त वर्ष 2023 की दूसरी तिमाही में पूंजीगत वस्तु कंपनियों के सालाना राजस्व और मुनाफा वृद्धि में मदद मिलने की संभावना है। इस क्षेत्र के विश्लेषकों का कहना है कि तिमाही आधार पर भी, इन दोनों मोर्चों पर आंकड़ों में सुधार आने का संकेत मिलता है, क्योंकि ऑर्डर प्रवाह इस अवधि के दौरान मजबूत बना हुआ है।
जहां जिंस कीमतें जुलाई-सितंबर अवधि के दौरान नरम बनी रहीं, वहीं मंदी और रुपये में गिरावट को लेकर भी चिंताएं बरकरार हैं। मंगलवार को, अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक कोष ने भारत की वित्त वर्ष 2023 की जीडीपी का अनुमान 7.4 प्रतिशत से घटाकर 6.8 प्रतिशत कर दिया।
इससे पहले विश्व बैंक ने वित्त वर्ष 2023 के लिए भारत के जीडीपी अनुमान को 7.5 प्रतिशत से घटाकर 6.5 प्रतिशत कर दिया। उसने रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक मौद्रिक सख्ती का भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ने का संकेत दिया। पूंजीगत वस्तु क्षेत्र पर नजर रख रहे विश्लेषकों का अनुमान है कि इस क्षेत्र में परिचालन कर रही कंपनियां करीब 10
प्रतिशत की राजस्व वृद्धि और 13.4 प्रतिशत कर-बाद लाभ (पीएटी) दर्ज कर सकती हैं। बीएस रिसर्च ब्यूरो द्वारा एकत्रित आंकड़े के अनुसार, इनमें लार्सन ऐंड टुब्रो, थर्मेक्स, एबीबी और केईसी इंटरनैशनल, जैसी कंपनियां शामिल हैं।
बीएस रिसर्च के आंकड़े से पता चलता है कि तिमाही आधार पर राजस्व और पीएटी वृद्धि इस क्षेत्र की कंपनियों के लिए 10 प्रतिशत और 33.1 प्रतिशत रहने की संभावना है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के मुकाबले दूसरी तिमाही में एबिटा में वृद्धि 12.5 प्रतिशत रहने की संभावना है। एक साल पहले की अवधि के मुकाबले, एबिटा में चार प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है।
केईसी इंटरनैशनल के निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी विमल केजरीवाल का कहना है, ‘पूंजीगत वस्तु क्षेत्र के लिए कुछ कारक सकारात्मक दिख रहे हैं। इस्पात, एल्युमीनियम और तांबा जैसी जिंसों की कीमतें नरम पड़ रही हैं, जो एक बड़ी राहत है। साथ ही, रेलवे और पारेषण एवं वितरण जैसे क्षेत्रों में निविदा गतिविधि में भी तेजी आई है।’
उदाहरण के लिए, केईसी ने दूसरी तिमाही में करीब 4,500-5,000 करोड़ रुपये मूल्य के अनुबंधों की घोषणा की। दूसरी तरफ, इस क्षेत्र की दिग्गज लार्सन ऐंड टुब्रो ने दूसरी तिमाही में 10,000-17,500 करोड़ रुपये के दायरे में ऑर्डरों की घोषणा की। ये ऑर्डर हाइड्रोकार्बन, बिजली, जल प्रबंधन और हैवी इंजीनियरिंग जैसे सेगमेंट से थे।
मुंबई की ब्रोकरेज कंपनी आईसीआईसीआई डायरेक्ट रिसर्च के विश्लेषकों चिराग शाह, विजय गोयल, अमेय माहुरकार और यश पंवार का कहना है, ‘कुल मिलाकर, ऑर्डर प्रवाह दूसरी तिमाही में मजबूत बना रहा। पारेषण एवं वितरण, हरित ऊर्जा, डेटा केंद्र, रेलवे, जल, परिवहन और इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में निविदा गतिविधि भी मजबूत रही।’
कुछ विश्लेषकों का कहना है कि लेकिन जोखिम भी बने हुए हैं। इनमें एक है ईंधन लागत, जिसका मार्जिन पर दबाव देखा जा सकता है। दूसरा जोखिम परियोजना क्रियान्वयन में विलंब है, जिससे आगामी तिमाहियों में ऑर्डर प्रवाह पर प्रभाव पड़ सकता है। वहीं लंदन मेटल एक्सचेंज भी कमजोर बना हुआ है और इस साल अब तक इसमें 1 प्रतिशत की कमजोरी आई है। इस साल अब तक रुपया आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच डॉलर के मुकाबले करीब 10 प्रतिशत तक गिरा है।