मासायोशी सोन के मजबूत सहयोगी राजीव मिश्रा अपने प्रस्तावित नए फंड के लिए 8-10 अरब डॉलर जुटाने की संभावना तलाश रहे हैं और उन्होंने इसके लिए अबू धाबी और सऊदी अरब के फंडों से बातचीत की है।
अधिकारियों का कहना है कि इसकी भी संभावना है कि सोन सॉफ्टबैंक या अन्य माध्यमों के जरिये इस नए फंड में कुछ निवेश कर सकते हैं, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं की जा सकी है।
60 वर्षीय मिश्रा गुरुवार को दिल्ली की यात्रा पर थे और तब सोन के प्रस्ताव को सॉफ्टबैंक कर्मियों के बीच पेश किया गया था। उन्होंने छतरपुर में अपने फार्म हाउस में एक डिनर पार्टी में भी हिस्सा लिया था जिसमें कई संस्थापकों, सॉफ्टबैंक के वरिष्ठ अधिकारियों, सिकोइया और केकेआर जैसे अन्य निजी इक्विटी फंडों के दिग्गजों और स्पाइसजेट के सीएमडी अजय सिंह जैसे उनके दोस्तों ने भी भाग लिया था।
उनका यह भी कहना है कि मिश्रा अक्सर लंदन की यात्रा करते रहेंगे, जहां वह पहले विजन फंड को देखेंगे और अपने स्वयं के फंड के लिए अबू धाबी और दुबई जाएंगे। उन्होंने अपने साथियों को बताया कि इन सब चीजों को मूर्त रूप देने में एक साल का समय लग जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इस फंड में सॉफ्टबैंक के कुछ ऐसे पूर्व अधिकारी भी शामिल होंगे जो उनके साथ काम कर चुके हैं, जिनमें अक्षय नहेटा का नाम भी है।
मिश्रा का पश्चिम एशियाई फंडों के साथ अच्छा संबंध है और वह सरकार के सॉवरिन फंड मुबाडला (अबू धाबी) को पहले विजन फंड में प्रमुख निवेशक के तौर पर शामिल करने में सफल रहे और उनका मानना है कि वह फिर से उसके साथ सौदा पूरा करने में सक्षम हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शेख जयेद बिन सुल्तान अल नह्यान द्वारा नियंत्रित निवेश उद्यम चिमेरा कैपिटल के बारे में बातचीत चल रही है।
अन्य खबरों में कहा गया है कि मिश्रा ने सऊदी अरब के पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड जैसे सॉवरिन फंडों के साथ मजबूत संबंध विकसित किए हैं, जिससे सॉफ्टबैंक के पहले विजन फंड में 45 अरब डॉलर के निवेश को बढ़ावा मिला है।
सॉफ्टबैंक और राजीव मिश्रा से इस बारे में प्रतिक्रिया हासिल नहीं की जा सकी है।