आईपीओ के जरिये कोष उगाही के संदर्भ में संवत 2078 शानदार वर्ष साबित हुआ। सेकंडरी बाजार में उठापटक के बावजूद, संवत 2078 में भारत के दो सबसे बड़े आईपीओ आए। संवत 2078 कुल 40 कंपनियों ने आईपीओ के जरिये 88,474 करोड़ रुपये की पूंजी जुटाई और इस संदर्भ में पिछले साल का आंकड़ा पार किया। इससे पहले, संवत 2077 में 47 कंपनियों द्वारा 81,655 करोड़ रुपये की कोष उगाही की गई थी।
स्थानीय निवेशकों की मजबूत भागीदारी और वैश्विक तरलता के समावेश की वजह से संवत 2077 से शानदार कोष उगाही को मदद मिली। हालांकि अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा आक्रामक मौद्रिक कदमों के बीच वैश्विक तरलता में कमी आने से संवत 2079 के लिए परिदृश्य अनिश्चितता में बदल गया है और इसे लेकर सवाल पैदा हुए हैं कि क्या पहले ही अपने डीआरएचपी सौंप चुकीं कंपनियां बाजार में आने में सक्षम होंगी।
संवत 2078 में, सरकार के स्वामित्व वाली जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने आईपीओ के जरिये 21,008 करोड़ रुपये जुटाए। इसने वन97 कम्युनिकेशंस (पेटीएम) के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा, जिसने 18,300 करोड़ रुपये जुटाए थे। इसके अलावा करीब एक दशक पहले कोल इंडिया द्वारा 15,000 करोड़ रुपये के आईपीओ का रिकॉर्ड भी टूट गया।
वर्ष में स्व. राकेश झुनझुनवाला के नेतृत्व वाली स्टार हेल्थ ऐंड अलायड इंश्योरेंस द्वारा 7,249 करोड़ रुपये की पूंजी जुटाई गई, जिसके अलावा लॉजिस्टिक दिग्गज डेलिवरी ने 5,235 करोड़ रुपये और अदाणी विल्मर ने 3,600 करोड़ रुपये जुटाए। कुल आईपीओ कोष उगाही में शीर्ष पांच निर्गमों का करीब दो-तिहाई योगदान रहा।
ध्यान देने की बात यह है कि कई बड़े निर्गम संवत 2078 की पहली छमाही के दौरान आए, जब धारणा अनुकूल बनी हुई थी।दूसरी छमाही में राहत उपाय समाप्त किए आने और कम ब्याज दरों की वजह से उतार-चढ़ाव को बढ़ावा मिला। नई सूचीबद्ध कंपनियों पर नजर रखने वाला बीएसई आईपीओ इंडेक्स पिछले 12 महीनों में 29.6 प्रतिशत नीचे आया, जबकि सेंसेक्स में 2.5 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई।
स्टार्टअप क सूचीबद्धता के बाद उनके कमजोर प्रदर्शन से बाजार नियामक सेबी को नियामकीय ढांचा सख्त बनाने का कदम उठाने की जरूरत महसूस हुई। प्राइम डेटाबेस के प्रबंध निदेशक प्रणव हल्दिया ने कहा, ‘हमने सेबी को कीमतों के आधार पर मानकों पर जोर देते देखा है। निवेशकों में इसे लेकर अनिश्चितता पैदा हुई है कि कौन से निर्गमों पर दांव लगाया जाए।’
बैंकरों का कहना है कि तरलता परिदृश्य में बदलाव आने से निवेशक मुनाफे की अनिश्चित राह के बीच कंपनियों पर भी दांव लगा रहे हैं। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के कार्यकारी निदेशक अजय सराफ का कहना है, ‘मुनाफे की राह अब ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है और इसमें सक्षम रहने वाली कंपनियां निवेशकों की दिलचस्पी आकर्षित कर सकती हैं।’
भारतीय बाजार में पिछले साल करीब 1.96 लाख करोड़ रुपये की पूंजी निकासी दर्ज की गई। हालांकि इसके बड़े हिस्से की भरपाई घरेलू म्युचुअल फंडों द्वारा की गई बिकवाली और प्रत्यक्ष रिटेल प्रवाह से हो गई, लेकिन इससे आईपीओ बाजार प्रभावित हुआ और बड़े आकार के निर्गमों की लोकप्रियता घट गई।
इक्विरस कैपिटल के संस्थापक अजय गर्ग ने कहा कि बड़े निर्गमों को विदेशी प्रवाह अनुकूल होने तक समस्या का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा, ‘घरेलू निवेशक भरोसा बनाए हुए हैं। लेकिन हमें बड़े आकार के निर्गमों को बाजार में सफलता दिलाने के लिए मजबूत एफपीआई प्रवाह की जरूरत है।’ पिछले साल के मुकाबले संवत 2079 में कोष उगाही की रफ्तार नरम रहने की संभावना है।