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एफपीआई पर नियम होंगे सख्त!

Last Updated- December 11, 2022 | 3:23 PM IST

 बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) देश में निवेश करने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) या कोषों के ‘लाभार्थी मालिक’ की पहचान के लिए सख्त ढांचा बनाने पर विचार कर रहा है। मामले के जानकारों का कहना है कि नियामक अभी देख रहा है कि लाभार्थी मालिक की अतिरिक्त जानकारी मुहैया कराने के लिए निवेश की मौजूदा सीमा कम की जाए तो कितना व्यावहारिक होगा और उसका कितना असर होगा।
एफपीआई (कोष) साझा निवेश साधन है, जो घरेलू म्युचुअल फंडों की तरह सेबी के पास पंजीकृत होता है और देसी प्रतिभूतियों में निवेश करता है। वर्तमान प्रारूप के तहत कोष में ज्यादा अंशदान करने वाली सभी इकाइयों के लाभार्थी मालिकों का खुलासा करना होता है। अगर कोष की निवेशक कोई कंपनी है तो यह सीमा 25 फीसदी तय की गई है और साझेदारी फर्म के मामले में सीमा 15 फीसदी है। यदि एफपीआई अधिक जोखिम वाले देश का है तो कोष के सभी निवेशकों के लिए सीमा 10 फीसदी होगी।
इस सीमा से ऊपर पहुंचने पर एफपीआई को अपने ग्राहक को पहचानें (केवाईसी) दस्तावेज जमा कराना होता है, जिसमें पहचान और पता तथा घरेलू बाजार में विदेशी निवेश की सुविधा प्रदान करने वाले कस्टोडियन बैंक की वित्तीय ​स्थिति की जानकारी देनी होती है। ​किसी कंपनी को आगे करके निवेश के जरिये पैसों का हेरफेर करने या धनशोधन निषेध कानून का उल्लंघन होने का संदेह होने पर सेबी लाभार्थी मालिक की जानकारी मांग सकता है। इसकी जानकारी मिलने से सेबी को यह पता लगाने में मदद मिलती है कि यह कोष सही तरह से निवेश कर रहा है या इसका नियंत्रण कपटपूर्ण इकाइयों के जरिये किया जा रहा है।
सूत्रों ने कहा कि लाभार्थी मालिक की पहचान के लिए निवेश सीमा घटाने के मसले पर हाल में एक बैठक में चर्चा की गई थी। मामले के जानकार एक शख्स ने कहा, ‘सेबी यह सीमा घटाने का इच्छुक है। हालांकि उद्योग इस कदम का विरोध कर सकता है क्योंकि इसमें काफी ज्यादा कागजी काम करना होगा और कई एफपीआई पर भी इसका असर पड़ेगा।’ उन्होंने कहा कि सेबी का मानना है कि 25 फीसदी की मौजूदा सीमा काफी अ​धिक है। तकनीकी तौर पर कोष में 24.99 फीसदी अंशदान वाली इकाइयों का कोष पर अच्छा खासा नियंत्रण हो सकता है और लाभार्थी मालिक की पहचान का भी खुलासा नहीं करना होगा।
सख्त प्रारूप होने से पारद​र्शिता बढ़ेगी और बाजार में उचित विदेशी पूंजी का निवेश सुनिश्चित होगा। इस कदम का विरोध करने वालों की दलील है कि भारत में अन्य देशों की तुलना में एफपीआई के लिए पहले से ही काफी सख्त नियम हैं। कस्टोडियन के एक अ​धिकारी ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया, ‘कई देशों में एफपीआई निवेश का ढांचा सहज है। इससे कोई भी आसानी से कोष में निवेश कर सकता है और उससे बाहर निकल सकता है। भारतीय बाजार में ज्यादा निवेश-अनुकूल ढांचा नहीं है। इसमें नरमी देने के बजाय ढांचे को सख्त बनाए जाने से पारद​र्शिता बढ़ सकती है लेकिन सही तरीके से निवेश करने वाले इससे हतोत्साहित भी हो सकते हैं।’ 
सूत्रों ने कहा कि यह मसला पूर्व मुख्य आ​र्थिक सलाहकार केवी सुब्रमणयन की अध्यक्षता वाली एफपीआई सलाहकार समिति के पास भेजा गया है। सेबी द्वारा हाल ही में गठित समिति को एफपीआई के निवेश और संचालन संबं​धित मसले पर परामर्श देने का काम सौंपा गया है।
 

First Published - September 19, 2022 | 9:42 PM IST

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